Saturday 29 November 2008

अहिंसा परमो धर्म है


गाँधी जी के पदचिन्हों
पर चल प्यारे,
दूसरा गाल भी
पाक के आगे कर प्यारे।
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अहिंसा परमो धर्म है
रटना तू प्यारे,
एक तमाचा और
जरदारी जब मारे।
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ये बटेर हाथ में तेरे
फ़िर नहीं आनी है,
लगे हाथ तू
देश का सौदा कर प्यारे।

4 comments:

seema gupta said...

गाँधी जी के पदचिन्हों
पर चल प्यारे,
दूसरा गाल भी
पाक के आगे कर प्यारे।
" यही तो कर रहें हैं..."

परमजीत बाली said...

सही चोट मारी है।यही सब कुछ तो हो रहा है तभी तो यह हाल है।

We hate Pakistan said...

जिहाद के नाम पर ये फैलाता है जूनून

मासूमों का खून बहाकर पाक को सुकून


आप भी, अपना आक्रोश व्यक्त करे

http://wehatepakistan.blogspot.com/

Alag sa said...

कहते हैं न, अहिंसा या क्षमा भी ताकतवरों को ही शोभा देती है।