Monday, 2 April, 2018


कहानी---
सफ़ेद कपड़ों मेँ लिपटा झूठ
-अब माधुरी बहि जी आपसे कुछ कहेंगीं । माधुरी बहिन ने माइक संभाला। बोलना शुरू किया। धर्म, अध्यात्म से होकर वे पारिवारिक जिम्मेदारियों पर खूब अच्छा बोलीं। उनका सम्बोधन सभी को भा  रहा था। फिर गीता का ज्ञान। मानस पर मीमांसा। कुछ मिनट बोल के माधुरी बहिन ने अपने गुरु की तरफ देखा। गुरु जी ने नजरों के माध्यम से उसे सराहा। माधुरी बहिन अपने स्थान पर जा विराजीं। अब राजेश्वरी बहिन...एंकर ने कहा। राजेश्वरी अपने स्थान से हिचकती हुई उठीं। बड़ी सधी हुई मधुर वाणी मेँ  जन्म से मृत्यु तक की बात की। जगत को मिथ्या बताया। वासनाओं को छोड़ने का आग्रह किया। हर बात पर  पॉज़िटिव रू अपनाने की सलाह दी। मीठा बोलने को प्रेरित किया। संयम का महत्व बताया। तप, साधना, पूजा, आराधना की विवेचना की। सत्संग की सार्थकता को समझाया। सब सुन रहे थे बड़ी तन्मयता से। एक एक शब्द जैसे सभी के अंदर तक प्रवेश कर रहा था। अपनी वाणी को विराम दे राजेश्वरी बहिन ने गुरु के सामने सिर झुकाया। गुरु ने आशीर्वाद दिया और स्नेह से उसकी ओर देखा। एंकर ने राजेश्वरी के बारे मेँ बताया कि उन्हें धर्म अध्यात्म मेँ रुचि कैसे हुई। अब तक कितना कितना ज्ञान वे पा चुकीं है। गुरु की विशेष कृपा हैं इन पर।  गृहस्थी होने के बावजूद वैरागन जैसा जीवन है राजेश्वरी बहिन जी का।  ये दृश्य एक भवन मेँ हो रहे धार्मिक, आध्यात्मिक आयोजन का है। आयोजन मेँ बड़ी संख्या मेँ महिलाएं मौजूद थीं। सभी महिलाएं सफ़ेद वस्त्रों मेँ। उन सफ़ेद वस्त्रों मेँ से कितनी ही महिलाओं के अंतरंग वस्त्र/अधो वस्त्रों की हल्की झलक वहां बैठे पुरुषों की नजर को आनंदित कर रहे थी।  उनकी पता नहीं कौन कौन सी कुंठा शांत भी कर रही थी। अनेक महिलाओं ने सभा मेँ आने के बाद से हुए परिवर्तन के संबंध मेँ अपने अनुभव साझा करते हुए गुरु के प्रति आभार जताया। अचानक! बंद करो ये पाखंड! झूठ का राज है यहां! दिखावा है! परिवारों को बर्बाद किया जा रहा है! सब उस तरफ देखने लगे जिधर से आवाज आई थी। सभी ने देखा, एक व्यक्ति को  बीच सभा मेँ खड़े हुए। सांस चढ़ी हुई। चेहरा तमतमाया हुआ। लगभग सभी के लिए अंजान था वह व्यक्ति। एकदम से  किसी की हिम्मत नहीं हुई उसके पास जाने की। वह बोलने लगा, कौनसा धर्म ? कौनसा अध्यात्म? कैसा आचरण और किस प्रकार का गृहस्थ आश्रम? मैं समझाता हूँ। व्यक्ति ने बोलना शुरू किया तो सब जड़ हो गए। वह कहने लगा, यहाँ अधिकतर वो महिलाएं हैं जिन्होने  अपने व्यवहार, धर्म, अध्यात्म  के पीछे छिपे पाखंड से अपनी अपनी गृहस्थी का बेड़ा गरक करने मेँ कोई कसर नहीं छोड़ी है। या तो इनका गुरु ना समझ है या फिर ये गुरु की शिक्षा को ग्रहण करने मेँ सक्षम नहीं। धर्म  और अध्यात्म के अर्थ को ये सब ना तो जान पायीं और समझ सकीं। वो! वो जो साइड मेँ है, उसने अपने पति को घास तक नहीं डाली। बरसों तक साधना के नाम पर पति को दूसरे कमरे मेँ सुलाती रही। ना मन का सुख दिया ना तन का। आखिर काला पड़ गया उसका शरीर। मगर पत्नी को अध्यात्म  से प्रेम हो चुका था। पति ने यूं तड़ तड़ के जान दे दी। और वो! वो जो उसका हाथ थामे गुरु के निकट बैठी है, उसने कभी अपने घर की परवाह नहीं की। पति को इतना ही महत्व दिया कि वह सुहागन समझी जाए। ऐसा नहीं है कि उसके अंदर की तमाम कामनाओं का अंत हो गया हो। शमन करना उसे आया नहीं इसलिए  दमन करने लगी अपनी कामनाओं का चूंकि धर्म और अध्यात्म की ज्ञाता हो गई, इसलिए किसी को कुछ कह भी नहीं पाती। पति से कहे तो धर्म, अध्यात्म, संयम, वैरागी, त्यागी  और साधना का जो लेवल लगा है, वह झूठा पड़ने का भय।  पति नहीं चाहता फिर भी वह यहां आती है। आखिर पति ने उसे कहना बंद कर दिया। जो मर्जी करे। जहां मर्जी जाए। बोलने वाले व्यक्ति ने एक क्षण सांस लिया, फिर बोला, वो जो सिर पर पल्लू किए बैठी है  उसका पति सड़क पर मरा मिला। क्योंकि मैडम को धर्म, अध्यात्म से फुरसत नहीं थी। गुरु की वंदना अधिक जरूरी थी, पति से। पति क्या करता। बेक़द्र हो घूमता रहता, इधर उधर। एक दिन कुर्बान हो गया अपनी पत्नी के धर्म और अध्यात्म पर। बात करते हो धर्म की! अध्यात्म की! प्रेम की!  संयम और अच्छे आचरण की!  किसको बता रहो हो? किसको समझा रहे हो? पहले खुद तो अपने अंदर उतारो इन सब बातों को। वह  बोले जा रहा था। जैसे आज खाली कर देना चाहता हो अपने आप को। अंजाम की परवाह किए बिना। उसने फिर जहर उगला….धर्म, अध्यात्म की सभा मेँ सच कहना जहर उगलना ही होता है, वो पतली दुबली सी, पूछो उससे, उसने अपने पति को क्यों छोड़ रखा है? क्या कसूर है उसके पति का? कौनसा धर्म निभाया है उसने पत्नी होने का। पति को पता भी नहीं होगा कि उसका कसूर क्या है। आपसे कह रहा हूँ, उस व्यक्ति ने दूसरी महिला की तरफ इशारा करते हुए कहा, तुमने अपने पति को कभी पति समझा है क्या? सच्ची बताना! सिवाए नौकर के उसे कुछ जाना ही नहीं। और वो जो मोटा सा व्यक्ति! वही, बड़े बड़े नितंब वाला! तू, बता तो, पुरुष होकर भी  कितने पुरुषों के साथ सोया है! …..तुझे,  यहां धर्म की चर्चा करते लाज नहीं आई। देखा है कभी तेरे घर कौन कौन आता था। तू यहां आता है महिलाओं के सफ़ेद कपड़ों से झाँकते, उनके अधो वस्त्रों को देखने। ताकि तेरी कुंठा शांत होती रहे। और तेरा गुरु, पूछ उससे ......जो त्याग, संयम की बात करता है,  वह सब कुछ बटोर लेता है आप सब से। आप से ले लेकर उसने अपना घर भर लिया....और...और   बस इससे अधिक व्यक्ति कुछ नहीं बोल सका। कई व्यक्ति खड़े हो गए। उससे हाथा-पाई और फिर मार पीट। इसमेँ वे भी शामिल हुईं, जिनके बारे मेँ बोला गया था। कुछ ही देर मेँ सच  बोलने वाला व्यक्ति सड़क पर लहूलुहान पड़ा हुआ था। खून से लथपथ सच सड़क पर कराह रहा था। कोई उसे उठाने वाला नहीं था। उधर अंदर धर्म सभा मेँ सफ़ेद कपड़ों मेँ लिपटा झूठ धर्म और  अध्यात्म की बात कर रहा था। झूठ कह रहा था,  हमें  सच का दामन नहीं छोड़ना, चाहे कुछ भी करना पड़े। धर्म और अध्यात्म के खिलाफ समय समय पर ऐसे नास्तिक आते रहे हैं। उनको सबक सिखा  धर्म की रक्षा करनी है,  ऐसे नास्तिक और पाखंडियों से ।  और वो महिलाओं की तरह मटक मटक के चलने वाला खास अंदाज से महिलाओं की  सेवा कर रहा था। गुरु ने कहा, ऐसी बाधा आती ही है इस मार्ग पर।   धर्म का पथ है ही मुश्किलों से भरा हुआ। उधर बाहर सड़क पर सच कुछ देर तक कराहता रहा और फिर धीरे धीरे सरकता सरकता आँखों से ओझल हो गया। ना तो किसी ने उसका हाथ पकड़ा और ना कोई उसके साथ चला। सफ़ेद कपड़ों मेँ लिपटे झूठ की आवाज और बुलंद हो गई।
--गोविंद गोयल, 237-मुखर्जी नगर, श्रीगंगानगर।


Sunday, 3 September, 2017

खबरों की गढ़ाई गढ़ाई जैसी तो हो!
गोविंद गोयल
श्रीगंगानगर। समझ से परे है कि मीडिया/मीडिया कर्मियों को हुआ क्या है! ऐसी ऐसी खबरें जिनका कोई वजूद नहीं! इसमें कोई शक नहीं कि कुछ खबरें होती हैं और कुछ वक्त की मांग के अनुसार गढ़ी भी जाती हैं, यूं कहिये की गढ़नी भी पढ़ती हैं, लेकिन गढ़ाई गढ़ाई जैसी तो हो! ये क्या कि सिर कहीं और पैर कहीं। बाबा गुरमीत सिंह राम रहीम और मंत्री परिषद के पुनर्गठन विषय पर मीडिया ने जो कुछ कहा, उसमें कब कितना सच था, सब सामने आ गया। झूठ, कोरे कयास और गढ़ाई सच की तरह परोसी जाती रही। आम जन के पास ऐसा कोई जरिया होता नहीं जो सच को जान सके। उसके  लिए तो मीडिया और मीडिया कर्मी ही भगवान होते हैं, ऐसे गरमा गरम विषयों पर। बाबा के उत्तराधिकारी के संदर्भ मेँ क्या क्या ना छपा मीडिया मेँ और क्या नहीं दिखाया गया। गुप्त बैठक मेँ क्या हुआ, यह तक बता दिया। बैठक की जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन मीडिया ने ये भी बता दिया कि उसमें हुआ क्या! कभी मुंह बोली बेटी को उत्तराधिकारी बताया तो कभी बेटे को। सभी कयास लगा लिए। सभी प्रकार की संभावना जता दी। सच के निकट एक भी नहीं। चूंकि बाबा के नाम पर आज के दिन हर खबर पढ़ी और देखी जाती है, इसलिए आने दो जो आ रहा है। जाने दो जो हवा मेँ जा रहा है। आखिर डेरा की ओर से आए वीडियो ने सच बता दिया कि ऐसा  कुछ भी नहीं है। जिसका जिक्र कहीं ना था, उसको खूब अधिकार थे। बात यहाँ तक कि उत्तराधिकारी बनाने का कोई प्रस्ताव तक नहीं है। खैर! ये तो उस डेरे की बात है, जिसका मुखिया रेप के मामले मेँ सजा काट रहा है। अब बात नरेंद्र मोदी मंत्री परिषद के पुनर्गठन की। जबसे सरकार के  मुखिया ने पुनर्गठन के संकेत दिये, मीडिया मेँ सूत्रों का काम शुरू हो गया। पता नहीं कौन-कौन जानकारी देने के नाम पर मीडिया का मज़ाक बनाता  रहा, मज़ाक उड़ाता रहा। ये सच है कि मीडिया को अपने सूत्रों पर भरोसा करना पड़ता है, किन्तु ये भी तो देखो कि नरेंद्र मोदी हर बार अपने निर्णय से मीडिया को ही नहीं देश भर को चौंकाते रहे हैं, ऐसी स्थिति मेँ अपने सूत्र द्वारा दी गई जानकारी को क्रॉस चैक करने मेँ हर्ज क्या! किसी के मन मेँ क्या है, ये जान लेना असंभव है। राजनीति मेँ किसी का अगला कदम क्या होगा, ये बता पाना नामुमकिन है। इसलिए कयास लगते रहे। संभावित नामों की घोषणा होती रही। बात वही, जो संभावित नाम मीडिया बता रहा था उसमें से इक्का दुक्का ही मोदी जी की असली लिस्ट मेँ थे। संभावित मंत्रियों के नामों वाली लिस्ट मेँ उन व्यक्तियों और नेताओं के नाम थे, जिनके आस पास तक भी मीडिया के कयास नहीं पहुँच पाए। ऐसा तो नहीं कि  मोदी जी मीडिया से कोई खेल ही खेल रहे हों, जो मीडिया कहे उसके अलग हट के किया जाए। राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के चुनाव मेँ भी सेम टू सेम हुआ था। नए नाम। वो नाम, जिनके बारे मेँ मोदी जी के अलावा किसी ने सोचा तक नहीं होगा। हरियाणा मेँ सीएम मनोहर लाल खट्टर होंगे, किसने बताया! कहीं एक लाइन भी ना तो बोली गई और प्रकाशित हुई थी। कितने ही उदाहरण है। इसमें कोई शक नहीं कि राजनीति की हर खबर जन जन की पसंद होती है, किन्तु इसका मतलब ये तो नहीं कि इस पसंद के लिए वह परोस दिया जाए जो सच के आस पास ही ना हो। जनता मीडिया मेँ परोसे गई ऐसी खबरों को हर हाल मेँ सच मानती है, क्योंकि उसकी नजर मेँ मीडिया का हर शब्द सच के अतिरिक्त कुछ नहीं होता। पता नहीं मीडिया और इस पवित्र काम से जुड़े व्यक्ति व्यक्तियों की किसी के प्रति कोई जवाबदेही भी होती है या नहीं। किसी और से नहीं तो खुद से तो होती ही होगी। भाई, किसी को बुरा लगा हो तो सॉरी। मगर इतना तो कहना ही पड़ेगा कि सच नहीं तो आधा सच तो हो। आधा सच नहीं तो कम से कम सच के निकट तो हो। दो लाइन पढ़ो-
उसकी आँखें जो गीली रहती है
कुछ ना कुछ तो जरूर कहती है।

[शब्दों और वाक्यों मेँ बदलाव करके खबर/आलेख को सोशल मीडिया पर फारवार्ड करने वाले के खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।] 

Tuesday, 4 July, 2017

सलाम....सलाम...सलाम


शब्दों के साथ छपे चित्र मेँ दिखाई देने वाले  इस परिवार को जानता नहीं। पहचानता नहीं। समझता भी नहीं। बस, यूं ही सफर मेँ मिल गए। ट्रेन मेँ चढ़ने के कुछ मिनट के बाद महिला मेम्बर वीडियो कॉलिंग से घर के किसी मेम्बर को यह बताने और दिखाने लगी कि कौन, कहां और कैसे बैठा है। आश्चर्य हुआ, लेकिन मोबाइल के इस दौर मेँ सब संभव था, यह सोच, देखता रहा। यह महिला हर मेम्बर का ध्यान रख रही थी। दो बुजुर्गों को मम्मी, डैडी बोलने वाली महिला ने उनको बैठाने, बर्थ पर चढ़ाने, लिटाने के बाद  खाने को दिया, दवा दी और मुस्कुराते  हुए अपनी बर्थ पर लेट मोबाइल मेँ फेसबुक या व्हाट्सएप मेँ कमेंट्स पढ़ और मुस्कुराने लगी। उसने डैडी’, मम्मी को बताया भी कि किसने क्या लिखा।  मैंने मेरे पास बैठे बुजुर्ग से पूछा, आपकी बिटिया है क्या? ना, मेरी नू [बहू] है। बेटी जैसी बहू। उसके बाद तो कई घंटे के सफर मेँ इस बहू के व्यवहार, आचरण, परिवार के प्रति उनके संस्कार देख उनको मन ही मन सलाम किया। बहू की किसी बात मेँ कोई बनावट नहीं दिखी और ना महसूस हुई। परिवार के मेंबर्स मेँ इतना कोर्डिनेशन, स्नेह, आपसी समझ, अपनापन कि उसे शब्दों मेँ नहीं बताया जा सकता। इस परिवार का लड़के ने पहली बार ट्रेन मेँ सफर किया था। बुजुर्ग 40 साल बाद ट्रेन मेँ  बैठे थे। मैं, नीलम और बहिन शशि हरिद्वार पहुँच कर भी बहू की तारीफ करते रहे। परिवार के आपसी स्नेह की चर्चा कर उनसे प्रेरणा लेने की बात करते रहे। उनके 5 मेंबर्स से किसी यात्री को शायद ही कोई असुविधा हुई हो। और वापसी मेँ ऐसा परिवार मिला, जिसमें आपसी कोर्डिनेशन तो होगा, लेकिन उनको केवल अपनी सुविधा से मतलब था, दूसरों को असुविधा हो तो हो। ईश्वर करे पहले वाले परिवार को खूब खूब यश, वैभव, शांति, सुकून, आनंद, सुख मिले और वे हवाज़ जहाज के मालिक भी बनें तो ट्रेन मेँ यात्रा करें ताकि दूसरों को उनके व्यवहार से प्रेरणा लेने का मौका मिले। दूसरे परिवार को भी यह सब मिले, लेकिन वे ट्रेन मेँ किसी को भी ना मिले। पहले वाले परिवार को सलाम, सलाम सलाम, खास कर बहू को, जो एक उदाहरण है मेरी नजर मेँ। दूसरे  परिवार को नमस्कार बस। अभिनंदन उस कोख का जिसने ऐसी बेटी को जन्म दिया और धन भाग उस परिवार के जहां वो बेटी बहू बन के गई। 

Sunday, 16 April, 2017

विचार बदलते ही संस्कार बदल जाते हैं

श्रीगंगानगर। तीन पुली के पास स्थित श्रीधर्म संघ संस्कृत महाविद्यालय गौशाला का वार्षिक उत्सव आज समारोह पूर्वक हुआ। समारोह मेँ व्यास पीठ से भक्तमाल की कथा सुनाई गई। भजन और कीर्तन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि रामायण के महत्व का बखान करते हुए कहा कि इसके बिना तो बैकुंठ भी अधुरा है। इसमें कहां कितनी गहराई है कोई नहीं जान सका। जो जितना गहरा उतरता है उतना ही अधिक पाता है। एक वक्ता ने वेद शास्त्रों और अर्थ की बात कही। उनका कहना था कि जिनके पास अर्थ है। अर्थ का अधिकार है, उनका गौरव और सम्मान वेद की रक्षा के लिए अपना समर्पण करें। वेद शास्त्रों के कारण ही तो धर्म जीवित और ज्वलंत हैं। भारत है। हिन्दू हैं। मुख्य वक्ता ने कहा कि जिस दिन 16 संस्कार समाप्त हो जाएंगे उस दिन हिन्दू नहीं रहेगा। सनातन धर्म नहीं रहेगा। उन्होने यह बार धर्म परिवर्तन, वर्ण परिवर्तन के संदर्भ मेँ काही। वे बोले, धर्म और वर्ण परिवर्तन से कुछ नहीं होने वाला, सदियों से हो रहा है। संस्कार सनातन धर्म का आधार हैं। जब तक ये हैं तब तक सनातन धर्म और हिन्दू समाप्त नहीं हो सकते। एक वक्ता ने कहा कि विचार बदलते ही संस्कार और संसार बदल जाते हैं। कुम्हार जिस मिट्टी से चिलम बनाता है अगर उसी मिट्टी से चिलम के स्थान पर घड़ा बनाए तो मिट्टी का संसार बदल जाता है। उसके संस्कार बदल जाते हैं। कई घंटे के इस आयोजन मेँ स्वामी ब्रह्मदेव जी, संगरिया के दयानन्द शास्त्री, तनसुख राम शर्मा, विधायक कामिनी जिंदल, राजकुमार गौड़ सहित शहर के अनेक नागरिक मौजूद थे। संस्था के संचालक स्वामी कल्याण स्वरूप सहित विभिन्न स्थानों से आए अनेक संत मौजूद थे। ओजस्वी ढंग से मंच संचालन स्वामी स्वदेशाचार्य ने किया। कुछ मिनट के लिए पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी भी कार्यक्रम मेँ पहुंचे।