Friday 2 March 2012

बीजेपी में होने लगी राधेश्याम गंगानगर की नाकाबंदी

श्रीगंगानगर-राजनीति में कई बार कुछ कहे बिना ही बहुत कुछ सुनाई,दिखाई देने लगता है। कोई बयान नहीं है। कोई पोस्टर होर्डिंग भी नहीं लगे। फिर भी ऐसा राजनीतिक गलियारों में ये अहसास होने लगा है कि बीजेपी विधायक राधेश्याम गंगानगर की पार्टी में नाका बंदी शुरू हो गई है। यस! क्षेत्र के सबसे परिपक्व राजनेता की नाका बंदी। पार्टी का कोई भी ग्रुप ऐसा नहीं है जो इस काम में अपना योगदान ना दे रहा हो। सभी का एक सूत्री कार्यक्रम कि बीजेपी की टिकट को राधेश्याम की झोली में जाने से रोका जाए। लेकिन सबसे अधिक मुश्किल फिलहाल विकल्प की है। कोई ऐसा नेता नहीं दिख रहा जो बीजेपी की टिकट लेकर चुनाव जीत सके। बी डी अग्रवाल के रूप में एक आशा की किरण पार्टी के ऐसे नेताओ को नजर आई थी। लेकिन उन्होने अपनी पार्टी का ऐलान कर दिया। वैसे तलाश अभी समाप्त कहां हुई है। इनके पास हर बिरादरी के बंदे हैं जो राधेश्याम के मुक़ाबले टिकट के लिए आगे तो किए ही जा सकते हैं। नाम हम लिखते हैं। किसमे कितना दम है,आइडिया आप लगा लेना। तो जनाब नाका बंदी की कोशिश में लगे नेताओं के पास अरोड़ा बिरादरी के सोनू नागपाल,ओबीसी के प्रहलाद राय टाक,राजपूत समाज के गजेन्द्र सिंह भाटी,वैश्य समाज पेड़ीवाल [पार्टी में शामिल होने में कितना समय लगता है] हैं हीं। और नहीं तो प्रदेश में नेताओं का अकाल तो नहीं है। भैरों सिंह शेखावत की तरह बाहर से किसी बड़े लीडर को भी बुलाया जा सकता है। नाका बंदी में जुटे बीजेपी लीडरों को इस बात से कोई लेना देना नहीं कि राधेश्याम के अलावा कोई और जीत सकता है या नहीं। बस उनको तो राधेश्याम गंगानगर की कढ़ी खराब करनी है। चलो मान लो। राधेश्याम की टिकट कटवा दी। किन्तु उनको चुनाव लड़ने से कौन रोक सकता है। आज के दिन जो राधेश्याम गंगानगर के बिना कोई भी राजनीतिक टीकाकार विधानसभा चुनाव की का कल्पना नहीं कर सकता। बेशक नेहरू पार्क में किसान महा पंचायत में राधेश्याम गंगानगर का कोई पोस्टर,होर्डिंग नहीं था। उनके बंदों को भी खास अहमियत नहीं मिली। लेकिन इसका यह राजनीतिक अर्थ नहीं कि राधेश्याम गंगानगर गुजरे जमाने की बात हो गए।

Tuesday 28 February 2012

कुछ तो बोल दे

लब तू खोल दे
कुछ तो बोल दे,
मन की सारी
गाँठे प्यारी
एक दिन
मुझ संग खोल दे।

Tuesday 21 February 2012

प्रभारी मंत्री ने की बस जनसुनवाई

श्रीगंगानगर-राजस्थान सरकार के जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत प्रभारी मंत्री विनोद कुमार ने कलेक्ट्रेट में जन सुनवाई की। पहली अर्जी सिंचाई विभाग के बारे में थी। मगर विभाग के एससी नहीं थे। उनके स्थान पर जो अधिकारी आया उससे पूछा गया तो वह कहने लगा कि एससी ही कर सकते हैं। उसके बाद एससी को बुलाया गया। बिजली वालों के लिए तो खुद कलेक्टर अंबरीष कुमार ने मेज बजा कर आवाज लगाई। लेकिन कोई होता तो आता। ऐसे ही शिक्षा विभाग के अधिकारी की आवाज लगती रही। सुनवाई के समय मदद करने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता सभाकक्ष में थे। बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। मंत्री ने अर्जी ली,उसकी बात सुनी,अधिकारी से पूछा और अर्जी उसके हवाले कर दी। या तो मंत्री ने खुद कह दिया कि अधिकारी से मिल लेना या खुद अधिकारी बोल पड़ा,मुझसे आकर मिल लेना। जो भी लोग आए उनके काम लंबे समय से अटके हैं। किन्तु उनको आज भी यह बताने वाला कोई नहीं था कि उनका काम कब होगा। मंत्री के साथ कलेक्टर,एसपी, विधायक राधेश्याम गंगानगर,संतोष सहारण,कांग्रेस नेता राजकुमार गौड़,कुलदीप इंदौरा,पृथ्वी पाल सिंह सहित अन्य नेता पदाधिकारी भी थे। अधिकांश तो बस उपस्थिति लगाने के लिए ही थे। जिनकी सुनवाई करनी थी वे बाहर थे अपनी बारी के इंतजार में।

अव्यवस्था रही मंत्री की सुनवाई में

श्रीगंगानगर-प्रभारी मंत्री की जन सुनवाई के समय शुरू में तो काफी अव्यवस्था का माहौल रहा। शोर इतना अधिक था कि कौन क्या कह रहा है सुना ही नहीं जा रहा था। बड़ी संख्या में लोग एक साथ अंदर आ गए। पत्रकार भी बहुत अधिक थे। एसपी ने कलेक्टर के इशारे पर पत्रकारों से पूछा भी। एसपी ने पत्रकारों को बाहर ले जाने के प्रयास भी किए। लेकिन पार नहीं पड़ी। कुछ समय बाद बार बारी से एक एक करके बुलाने का सिलसिला शुरू हुआ तब कहीं जाकर कोई व्यवस्था बनी। जो जनप्रतिनिधि देरी से आए उनको उनके अनुकूल स्थान पर बैठने के लिए कई बार कुर्सी खिसकानी पड़ी। जिला प्रमुख के आने पर तो कलेक्टर,एसपी को भी कुर्सी छोडकर उनके लिए कुर्सी लगवानी पड़ी।

शंकर पन्नू पहुंचे किसानों के साथ प्रभारी मंत्री के दरबार में

श्रीगंगानगर- कांग्रेस के इस शासन किसानों की सुनवाई नहीं हो रही। अगर किसानों की सुनवाई होती तो कांग्रेस नेता पूर्व सांसद शंकर पन्नू को खुद गन्ना उत्पादकों का प्रतिनिधिमंडल लेकर सुनवाई के लिए प्रभारी मंत्री के दरबार में नहीं आना पड़ता। वे अन्य कांग्रेस नेताओं की तरह अंदर नहीं बैठे थे। शंकर पन्नू गन्ना उत्पादकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। वे बिना के किसानों के साथ अंदर गए। मंत्री से बात की। उनसे बाहर आकर किसानों से मिलने को कहा। प्रभारी मंत्री सुनवाई बीच में छोडकर बाहर आकर गन्ना उत्पादकों से मिले। गन्ना उत्पादकों ने शुगर मिल की हालत से मंत्री को अवगत करवाया। उनका कहना था कि मिल की हालत खराब है। गन्ना लिया नहीं जा रहा। चूंकि किसान अधिकतर श्रीकरनपुर क्षेत्र के थे इसलिए पृथ्वीपाल संधु भी उनके साथ हो लिए।

काली पट्टी लगा पत्रकार मिले प्रभारी मंत्री से

श्रीगंगानगर-नगर के कुछ पत्रकारों ने काली पट्टी लगाकर प्रभारी मंत्री से बात की। उनका कहना था कि नगर विकास न्यास उनको रियायती दर पर भूखंड नहीं दे रहा जबकि सरकार के आदेश हैं। न्यास अध्यक्ष ज्योति कांडा ने कहा कि वे रिजर्व प्राइज़ पर भूखंड देने को तैयार हैं। इस मसले पर कई पत्रकारों की कांडा जी से बोल चाल भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने बीच बचाव किया। न्यास के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़ ने प्रभारी मंत्री को बताया कि इसके लिए पीआरओ की चेयरमेनशिप में कमेटी बनाकर निर्णय लिया जाए। कांडा जी ने भूखंड से वंचित पत्रकारों को बात चीत के लिए बुलाया है।

Sunday 19 February 2012

तंत्र,टोटके,अश्लील वाक्यों की पुस्तक को कलेक्टर ने बताया लाभप्रद

श्रीगंगानगर-टोटकों,तंत्र विद्या का बेशक बहुत महत्व होता होगा। भूत प्रेत के बारे में भी सभी की अपनी अपनी मान्यता होगी। अश्लीलता भी पर्दे में गरिमामय होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जिला कलेक्टर जाने अनजाने इस प्रकार की बात को बढ़ावा दें और ऐसी बातों को समाज के लिए लाभप्रद बताएं। क्षेत्र में सोने,चांदी,डायमंड के जाने माने व्यवसायी,अनेकानेक सामाजिक धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए शामलाल जैन ने अरोग्यता का रहस्य नामक पुस्तक का लेखन व संकलन किया। कहने को तो इसमें आयुर्वेद से बीमारियों का इलाज की जानकारी है। परंतु इस पुस्तक में टोटकों के रूप में ऐसे ऐसे अश्लील वाक्य हैं कि उनको यहां लिखना भी संभव नहीं।ये टोटके आयुर्वेद से संबन्धित नहीं हो सकते। विज्ञान के इस युग में जब भूत,प्रेत जैसे अंधविश्वासों को दूर करने के प्रयास होते हैं, स्कूल से लेकर कॉलेज तक की शिक्षा में। ऐसे दौर में पुस्तक यह बताती है कि भूत प्रेत की बाधा कैसे बचा जा सकता है। तंत्र की जानकारी भी इस पुस्तक के कई पृष्ठों पर हैं। इस प्रकार की पुस्तक मेलों,बस अड्डे और रेलवे स्टेशन की स्टाल पर बिका करती हैं। किसी गर्ल्स कॉलेज के उत्सव में उसका विमोचन करवा खुले में वितरित करना उचित नहीं कहा जा सकता। मगर शाम लाल जी को कौन रोकता! वे कॉलेज के कोषाध्यक्ष जो हैं। इसलिए ऐसा हुआ। इसी पुस्तक के बारे में जिला कलेक्टर अंबरीष कुमार का संदेश भी है। जिसमें उन्होने कहा है कि यह पुस्तक समाज के लिए लाभप्रद सिद्ध होगी। पाठकों को इस पुस्तक के माध्यम से अपने जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। समाज खुशहाल एवं निरोगी जीवन व्यतीत कर सकेगा.........आदि आदि। शायद जिला कलेक्टर ने पुस्तक की पाण्डुलिपि पढे बिना ही संदेश दे दिया। अगर वे पढ़ते तो उन वाक्यों को जरूर हटवाते जो अश्लील हैं। तंत्र और टोटकों को बढ़ावा देने वाले हैं। अन्यथा संभव है संदेश देने से मना कर देते। इसी प्रकार के संदेश नगर परिषद आयुक्त हितेश कुमार और नगर परिषद सभापति जगदीश जांदू के भी हैं। शामलाल जैन का इतना नाम तो है ही कि कोई उनको संदेश के लिए कोई नाराज क्यों करने लगा। शामलाल जैन का उद्देश्य भी कोई गलत नहीं हो सकता। वे गर्व से कहते हैं कि जो कुछ लिखा है एकदम सही है....मैं दिखा सकता हूं कौनसी किताब से लिया। सही तो होगा....लेकिन उनके जैसे व्यक्ति के लिए ऐसे वाक्यों सार्वजनिक रूप से बांटी जाने वाली पुस्तक में लिखना ठीक है क्या?

Thursday 2 February 2012

शंकर पन्नू ने करवाई कांडा की मुर्दाबाद,हाय-हाय


श्रीगंगानगर-पूर्व सांसद शंकर पन्नू के सच्चे शब्दों ने नगर विकास न्यास अध्यक्ष ज्योति कांडा की मुर्दाबाद...हाय-हाय करवा दी। समारोह का जायका बिगाड़ दिया। गले में पड़े फूलों माला चुभने लगी। करनी मार्ग पर रेल फाटक उदघाटन समारोह था। छोटा सा शामियाना लगाया गया। हीरा लाल इंदौरा,शंकर पन्नू जैसे बड़े कांग्रेस नेता बुलाए गए। पूरी यूआईटी थी। साइड में वे परिवार भी खड़े थे जिनके मकान तोड़े थे। शंकर पन्नू ने बोलना शुरू किया। वे उनको देख कर बोले...कब्जा किया जब पूछा था क्या...तब अंदर कर देते तो.... इसके बाद पन्नू जी ने क्या बोलना था। वे परिवार शोर मचाने लगे जो मकानों की उम्मीद लगाए थे। शोर मचाते हुए मंच के करीब आ गए। पुलिस ने उनको दूर किया। वे जयोति कांडा मुर्दाबाद...हाय हाय करने लगे। हीरा लाल इंदौरा ने मंच से समझाया। ज्योति कांडा ने भाषण दिया। किसने सुनना था। मुर्दाबाद हाय हाय होती रही। कुछ क्षण बाद यूआईटी चली गई। नेता भी रवाना हो लिए। मकान मांगने वालों ने वहाँ लगे होर्डिंग को निशाना बनाया। पहले दोनों होर्डिंग पर ज्योति कांडा की फोटो पर गीली मिट्टी फेंकी। फिर फोटो पर पत्थर मार कर छेद किए। मन नहीं भरा तो होर्डिंग उखाड़ डाले। उनकी चिंदी चिंदी कर जिसके हाथ में जो आया वह उसे लेकर चलता बना। कोई बांस ले गया। किसी के हाथ लोहा आया। कोई फ़्लेक्स समेत कर चलता बना।जितना समय होर्डिंग को बनाने में लगा होगा उससे कम समय में उसको तार-तार करने में लगा। सभी खुश। शंकर पन्नू भी और कांडा जी भी। शंकर पन्नू की बात तो सच्ची थी किन्तु मौका और स्थान सही नहीं था। केवल उदघाटन होता तो मीडिया में उतना प्रचार नहीं होता। जितना अब होगा। इसीलिए तो कहते हैं कि कड़वा सच पत्थर के समान होता है,मगर वह नुकसान पत्थर की चोट से भी अधिक करता है।

Saturday 28 January 2012

संघ प्रष्ठभूमि वाले ट्रस्टियों के कालेज में कांग्रेसियों का जमघट


श्रीगंगानगर-आरएसएस से जुड़े व्यक्तियों की मैनेजमेंट वाले कॉलेज में कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति ने सबको हैरत में डाल दिया। वैसे तो कोई भी शिक्षण संस्था किसी पार्टी विशेष की नहीं होती। किन्तु उस संस्था को चलाने वाले कौन है उनकी पहचान,विचारधारा का जिक्र तो होता ही है। जिस आत्मवल्लभ जैन गर्ल्स कॉलेज का जिक्र यहां है,उससे कांग्रेस सरकार के मंत्री इसीलिए दूरी रखते थे कि कॉलेज के अधिकांश ट्रस्टी सक्रिय रूप से आरएसएस से जुड़े हैं। अमरचंद बोरड़ के पास तो आरएसएस के दायित्व तक रहें हैं। इस बार राजस्थान की कांग्रेस सरकार के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल, विधायक संतोष सहारण कांग्रेस के पूरे लवाजमे के साथ वहां पहुंचे हुए थे। जिस कृषि विपणन मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर ने गत वर्ष उतसव में आने से मैनेजमेंट को इंकार कर दिया था इसबार उन्हे शांति धारीवाल के कारण वहां आना पड़ा। जबकि कार्ड पर उनका नाम तक नहीं था। जब नगरीय विकास मंत्री नगर में हों तो नगर परिषद के सभापति और नगर विकास न्यास के अध्यक्ष को भी हाजिरी लगानी पड़ी। उनके साथ कई छोटे बड़े कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं का पहुँचना भी स्वाभाविक है। वैसे सभापति और अध्यक्ष 29 जनवरी के कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं। मंत्री शांति धारीवाल ने कॉलेज में नई लाइब्रेरी का उदघाटन किया। दो दो मंत्री सहित कांग्रेस नेताओं का जैन कॉलेज में जमघट मैनेजमेंट की बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। क्योंकि इससे पहले सत्तारूढ़ पार्टी के इतने बड़े नेता कभी कॉलेज में शायद ही आयें हों।

आमजन की सरकार के मंत्री के कार्यक्रम में आमजन नदारद


श्रीगंगानगर-राजस्थान की आमजन की सरकार के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल के कार्यक्रम में आमजन नदारद रहा। कार्यक्रम नगर विकास न्यास के अध्यक्ष ज्योति कांडा ने न्यास में आयोजित किया था। कार्यक्रम में विधायक संतोष सहारण,कांग्रेस नेता राजकुमार गौड़,पूर्व सांसद शंकर पन्नू,कश्मीरी लाल जसूजा,कई पार्षद थे। अगर जनप्रतिनिधि,कुछ कांग्रेस जनों और न्यास स्टाफ को निकाल दें तो बस केवल मीडिया कर्मी ही थे। हां,नगरीय विकास मंत्री से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मिलने आए लोगों की संख्या कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अधिक थी। लेकिन वे तो मंत्री से मिल कर चले गए थे। न्यास अध्यक्ष के कार्यक्रम में खुद उनके परिवार के सदस्य तक नहीं थे। ना ही था कोई कोलोनाइजर। अध्यक्ष बनने के बाद किसी मंत्री के समक्ष कांडा जी का यह पहल निजी कार्यक्रम था। लेकिन भीड़ के मामले में वे कामयाब नहीं हो सके। जनप्रतिनिधियों,कांग्रेस जनों और अपने स्टाफ की मौजूदगी में कांडा जी ने शांति धारीवाल को बड़ी सी माला पहनाई। राजस्थानी पगड़ी सिर पर रखी। अंगरखा दिया। इससे पूर्व मंत्री जी न्यास ऑफिस पहुंचे। चंद मिनट तक कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति में न्यास के अधिकारियों से बात की। बाहर लॉन में उनका स्वागत कार्यक्रम था। कांडा जी उनकी शान में कसीदे पढ़ते रहे और मौजूद लोग उनका स्वागत करते रहे। मंत्री जी ने समारोह को संबोधित भी किया। किन्तु प्रेस से बात करने में परहेज रखा।

चुनाव सूरतगढ़ या जोधपुर क्षेत्र से-विजयलक्ष्मी


श्रीगंगानगर-राजस्थान समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष विजय लक्ष्मी बिनोई ने कहा है कि वे अपने पुराने क्षेत्र सूरतगढ़ या जोधपुर क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहेंगी। अंतिम फैसला आलाकमान करेगा। वह जो कहेगा उसी के अनुसार चलेंगे। क्योंकि हमने तो आज तक वही किया जो पार्टी हाईकमान ने निर्देश दिये। वे बल्लू राम गोदारा गर्ल्स कॉलेज में मीडिया से बात कर रहीं थी। वे यहां कोलेक के वार्षिक उत्सव में भाग लेने आई थीं। पार्टी अध्यक्ष चंद्रभान के ब्यान कि कांग्रेस कमजोर है के बारे में अध्यक्ष ने कहा कि उन्होने ऐसा इसलिए कहा ताकि कांग्रेस कार्यकर्ता आराम से ना बैठे। और अधिक काम करें ताकि 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 1998 जैसा बहुमत मिल सके। श्रीमती बिशनोई ने इस बात से इंकार किया कि उनके अधिकारों में कोई कटौती की गई है। उनका कहना था कि और अधिक नेताओं को भी काम करने का मौका दिया जाएगा। उनका कहना था कि पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदारी दी जाती है। मैं खुद इसका प्रमाण हूं। अध्यक्ष ने माना कि बहुत सी एनजीओ केवल कागजों में चल रही हैं। उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। भंवरी प्रकरण में जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं।वार्ता के दौरान प्रेस कान्फ्रेंस के स्थान पर भी सवाल उठा। अध्यक्ष ने बताया कि उनका तो कोई इरादा नहीं था प्रेस कान्फ्रेंस का। जहां मैडम की प्रेस वार्ता थी वहाँ उनके साथ ना तो कॉलेज की प्राचार्या थी और ना ही छात्रा संघ की अध्यक्ष। जबकि कान्फ्रेंस छात्रा संघ के दफ्तर में हो रही थी। उनके साथ महिला कांग्रेस की महिलाएं थी जो उनको घेरे हुए थी।

Thursday 26 January 2012

भाटी,मूंदड़ा,जयदीप के बाद अब बी डी अग्रवाल का अवतरण

श्रीगंगानगर-चंद्रा ट्रैवेल्स के गजेन्द्र सिंह भाटी। इंहोने शहर भर में सेवा के अनेक प्रकल्प शुरू किए। काफी राशि विभिन्न प्रकार के आयोजनों पर खर्च की। लगभग हर किसी आयोजन में वे खुद या उनकी पत्नी रितु गजेन्द्र भाटी प्रमुख होती। संजय मूंदड़ा। कौन है जो इस नाम को ना जानता हो। आम जन से लेकर मीडिया तक में समाज सेवी बन कर छा गए। कई लाख रुपए गौ शालाओं को दान कर गो सेवक भी बने। यहां से लेकर दिल्ली-जयपुर तक के नेताओं से रिश्ते बनाए। जयदीप बिहाणी। एक खानदानी पहचान। शिक्षा का इतना बड़ा संस्थान। जिसकी दूर दूर तक पहचान और शान। एक दौर इनका भी चला। कोई कार्यक्रम जयदीप बिहाणी के बिना होना मुश्किल था। विज्ञापनों के सहारे या रिश्तों के भरोसे कैसे भी था। शायद ही कोई दिन होता होगा जब इनके नाम या चित्र प्रकाशित ना होते हो। समय कितनी तेजी से आगे निकल जाता है। आज ये कहां है? क्या गतिविधियां हैं?बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसा नहीं ये कि ये आज सक्षम नहीं रहे। या इनकी ऊर्जा,जोश,समाज सेवा की भावना समाप्त हो गई। सब कुछ है। किन्तु इंहोने अपने कदम रोक लिए।श्री भाटी को विधानसभा के चुनाव ने आईना दिखा दिया। संजय मूंदड़ा को सभापति का चुनाव ले बैठा। जयदीप को टिकट नहीं मिली।स्थान कभी कोई खाली नहीं रहता। इनके कदम रुके तो बी डी अग्रवाल का अवतार हुआ। वे अग्रवाल समाज को एकजुट करके आगे बड़े,बढ़ते ही चले गए। समाज में पहचान बनाई। दूसरे समाज से हाय हैलो हुई। पहले वालों ने लाखों खर्च किए तो श्री अग्रवाल ने करोड़ों की परवाह नहीं की। गरीब विद्यार्थियों हेल्प। बुजुर्गो का सम्मान। स्कूल कॉलेज में उनके प्रायोजित ज्ञान वर्धक कार्यक्रम। वे गंगानगर से निकाल कर नोहर भादरा तक पहुँच गए। ना...ना....करते राजनीति में उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया। दूसरे क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के इच्छुक एक दो नेता भी आ गए।आरएसएस के कार्यक्रम को सहयो करने लगे। राधेश्याम गंगानगर से जिनके विचार नहीं मिलते ऐसे नेता भी श्री अग्रवाल को महत्वाकांक्षा को हवा देने लगे। एक और उम्मीदवार तैयार हो गया चुनाव के लिए। पर बात भैरों सिंह शेखावत पर आकर अटक जाती है। पैसा ही चुनाव जीतने का कारक होता तो वे चुनाव नहीं हारते। संपर्क,मतदाताओं से सीधी जानकारी जीत के लिए जरूरी होता तो महेश पेड़ीवल चुनाव जरूर जीतते। श्रीगंगानगर में जीत हार के कारण अभी तक तो कोई समझ नहीं सका। बी डी अग्रवाल समझ गए तो यह उनकी एक और उपलब्धि है।

Sunday 22 January 2012

नर सेवा की बजाए अपने प्रचार पर मिट्टी किया धन

श्रीगंगानगर- कहीं पढ़ा था....एक बार मदन मोहन मालवीय विदेश में गए। वहां कुम्भ मेले के बारे में चर्चा चली। उनसे पूछा गया कि कुम्भ मेले में लाखों लोग आते हैं...प्रचार पर बहुत धन खर्च होता होगा। मालवीय जी ने बोले...प्रचार पर खर्च!केवल पच्चीस पैसे। विदेशियों को अचरज हुआ....केवल 25 पैसे! मालवीय जी का जवाब था...हां पच्चीस पैसे। पच्चीस पैसे के पंचांग में मेले की तिथि का जिक्र होता है और लाखों लोग उसी के आधार पर आ जाते हैं कुम्भ मेले में। तब से अब तक जमाना बहुत बदल गया। आज कल तो छोटे छोटे मंदिरो के कार्यक्रम के प्रचार के लिए हजारों हजार खर्च हो जाते हैं। नगर के विख्यात झांकी वाले बाला जी के मंदिर का वार्षिक उत्सव फरवरी में है। उस उत्सव के लिए नगर की हर गली,नुक्कड़,चौराहों पर बैनर,पोस्टर,होर्डिंग लगाए जा चुके हैं। इनकी संख्या इतनी है कि इनको गिनना मुश्किल है। इस पर हजारों.....[वैसे चर्चा ये है कि कई लाख रुपए] रुपए खर्च हो चुके हैं। यह खर्च किसी भी कम का नहीं । क्योंकि यह सामग्री फिर से काम आएगी नहीं। मतलब ये कि जो कुछ खर्च हुआ वह मिट्टी हो गया। इसमें कोई शक नहीं कि आज इस मंदिर के संचालकों के सूरत को देख खूब चंदा मिलता है। किन्तु उसका यह मतलब तो नहीं कि उसको मिट्टी कर दिया जाए। इस राशि से कोई भी ऐसी स्थायी जगह बनाई जा सकती है जो किसी गरीब के काम आए। गरीब परिवारों के लिए कोई कान्वेंट स्कूल खोला जा सकता है। गरीब परिवारों की लड़कियों के लिए रोजगार को कोई ट्रेनिंग सेंटर चल सकता है। और भी बहुत कुछ किस जा सकता है। कहीं और नहीं लगा सकते तो मंदिर का विस्तार कर अंधविद्यालय जैसे कोई प्रकल्प शुरू किए जा सकते हैं। वैसे भी शास्त्र कहते हैं कि नर सेवा नारायण सेवा... किन्तु कई लाख रुपए प्रचार में लगाकर मिट्टी कर देना तो किसी की सेवा नहीं,सिवाए पोस्टर,होर्डिंग बनाने वालों के। जिनको काम मिल जाता है। ऐसा नहीं है कि केवल लेखक को ही आप्ति है। चर्चा तो शहर में भी है मगर कोई बोल कर मंदिर संचालकों की नाराज नहीं करना चाहता।कुछ ये भी सोचते हैं कि धर्म का काम है...हम क्यों पाप के भागी बने। पोस्टर,होर्डिंग्स पर बाला जी छोटे हैं और कीर्तन करने वाले बड़े।कलयुग में भगत बड़ा हो ही जाता है। मंदिर नया हो तो प्रचार पर कुछ राशि खर्च करना जायज कही जा सकती है। इस मंदिर की मंडली तो दूर दूर तक पहुँच रखती है। प्रेस से लेकर पुलिस,बड़े बड़े व्यापारी,नेता सब इनके चरणों में शीश झुकाते हैं। शायद यही वजह है कि कोई इनसे किसी प्रकार का सवाल नहीं करता?जो करता है उसका इनका,इनके इनके चेलों का कोप भाजन बनना तय ही है। रामचरित मानस में तुलसी बाबा ने कहा है...परहित सरस धर्म नहीं भाई,पर पीड़ा नहीं सं अधमाई।

Saturday 14 January 2012

मेरा पहला लक्ष्य है साफ सुथरी राजनीति करना-अर्जुन मेघवाल



श्रीगंगानगर-अपनी वाणी से लोकसभा की मार्फत देश भर में पहचान बना चुके बीजेपी सांसद अर्जुन मेघवाल कहते हैं कि उनका राजनीति में आना एक संयोग मात्र है।संक्षिप्त इंटरव्यू में श्री मेघवाल ने कहा, कारण,वातावरण इस प्रकार बनता चला गया कि इसको ईश्वर का आदेश मान कर राजनीति में आ गया। क्योंकि वही सब कुछ करवाने वाला था। मकसद क्या होगा? सोचा नहीं था। आईएएस के रूप में नौकरी के छह साल बाकी थे। पूरा करना चाहता था। मैडम[वसुंधरा राजे] और ओम प्रकाश माथुर से बात हुई। नौकरी के बाद चुनाव लड़ने की बात उनके समक्ष रखी। तब मैडम ने कहा कि जो अब चुनाव जीतेगा वह टिकट लेने नहीं देगा। और हार भी जाएगा तो उसका हक आपसे पहले होगा। श्री मेघवाल ने कहा कि बस मैडम की यही बात अपील कर गई और राजनीति में आना तय हो गया। श्री मेघवाल के अनुसार तब श्री अशोक गहलोत ने भी उनसे इसी मुद्दे पर बात की थी। श्री मेघवाल के अनुसार एमपी का कैनवास एक आईएएस से काफी बड़ा होता है। आईएएस एक लिमिटेड क्षेत्र में ही काम,सेवा कर सकता है जबकि राजनीति सेवा के लिए बड़ा क्षेत्र उपलब्ध करवाती है। उन्होने कहा कि मेरा पहला लक्ष्य साफ सुथरी राजनीति करना है। अब तक के अपने राजनीतिक सफर को पूरी तरह संतोष जनक मानता हूं। किसी प्रकार का कोई आरोप अभी तक नहीं लगा है। अपने क्षेत्र में सांसद सेवा केंद्र चलाने वाला देश का पहला एमपी हूं। श्री मेघवाल ने बताया कि यह सेवा केंद्र हमेशा काम करता है। हर मतदाता कि छोटी से छोटी अर्जी पर कार्यवाही होती है। और इतना ही नहीं इसकी अर्जी देने वाले को सूचना तक दी जाती है। उन्होने बताया कि बीकानेर,दिल्ली,जयपुर में अलग अलग पीए हैं जो हर समय जनता के काम मे लगे रहते हैं। उन्होने कहा कि नौकरशाही लोकतन्त्र की भावना के अनुरूप होनी चाहिए। अच्छे जनप्रतिनिधि की बात नौकरशाही को हर हाल में सुननी चाहिए।श्री मेघवाल ने कहा कि नौकरशाही मुझे चकमा नहीं दे सकती। क्योंकि मैं जनता हूं कि सब काम कैसे करने है या करवाने हैं। श्री मेघवाल ने कहा कि वे ठीक 10.30 बजे लोकसभा पहुँच जाता हूं। समय पर आने वाले बहुत कम सांसद हैं। वे खुद कहते हैं कि चूंकि मैं एक बहुत अधिक सक्रिय सांसद हूं इसलिए मेरी जान पहचान भी बहुत अधिक है। कई बार किसी विषय पर पार्टी की ओर से तुरंत बोलना पड़े तो मैं संकट मोचक के रूप में काम में लिया जाता हूं। इस बात का मुझे गर्व है कि पार्टी मुझे इस काबिल समझती है। श्री मेघवाल के अनुसार राजनीति का बीज मेरे अंदर गंगानगर में 1991में श्याम चुघ ने डाला। तब में मण्डल अध्यक्ष थे। तब मेरे बच्चे छोटे थे। उसके बाद 1996 और 2003 में कोशिश की तो पार नहीं पड़ी। 2009 में ईश्वर ने यह चान्स दिया। ज्ञात रहे कि अर्जुन मेघवाल पहली बार सांसद बने हैं। इसके बावजूद वे ना केवल सांसदों बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की निगाह में हैं। इसका कारण कि उनकी हर विषय पर गहरी पकड़। उनका अध्ययन। भाषण देने की शैली। और सबसे अधिक अपने काम के प्रति गंभीरता। यही वजह है कि आज उनको जानने वाले देश के हर क्षेत्र में हैं।

Friday 13 January 2012

गंगानगर पहला प्यार है,किन्तु चुनाव बीकानेर से लड़ूँगा-अर्जुन

श्रीगंगानगर-श्रीगंगानगर क्षेत्र मेरी कर्म स्थली और पहला प्यार है। लेकिन लोकसभा का चुनाव बीकानेर से ही लड़ूँगा। यह कहना है बीकानेर के मौजूदा बीजेपी सांसद अर्जुन मेघवाल का। वे बीजेपी के प्रहलाद टाक के निवास पर प्रेस से बात कर रहे थे। इस क्षेत्र में उनकी बढ़ती सक्रियता के मद्दे नजर उनके श्रीगंगानगर से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा के तहत प्रेस ने उनसे यह इस बारे में पूछा था। श्री मेघवाल ने कहा, वे हर क्षेत्र के मुद्दे लोक सभा में उठाते हैं। इस कारण हर क्षेत्र में चुनाव लड़ने की चर्चा हो जाती है। उन्होने बताया कि 1974 में मैं टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में संगरिया में नौकरी शुरू की। उसके बाद से लगातार गंगानगर क्षेत्र से मेरा जुड़ाव रहा है। श्री मेघवाल ने कहा कि टिकट संसदीय दल तय करता है। सांसद ने कहा कि अगर ऐसा कोई मन होता तो मैं सारे कार्यक्रम छोड़ कर किसान सम्मेलन में भाग लेने आता। उनका कहना था कि मैं केवल इस क्षेत्र की ही समस्याएं उठता हूं,ऐसा नहीं है। देश में विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा के समय जो मुद्दा मेरे सामने आता है उसको लोकसभा में उठता हूं। मुद्दा उठाने का यह मतलब नहीं कि अर्जुन मेघवाल वहां से चुनाव लड़ेगा। उन्होने कितने ही मुद्दे गिनाए जो बीकानेर क्षेत्र के नहीं थे इसके बावजूद उन्होने लोकसभा में उनको रखा और फिर सरकार ने उन पर यथोचित कार्यवाही की। सांसद ने कहा कि वे राजनीति में मन,कर्म,वचन से ईमानदार रहने की कोशिश करते हैं। और उसमें कामयाब भी हुआ हूं। ज्ञात रहे कि वैसे तो श्रीगंगानगर क्षेत्र से कांग्रेस के भरत राम मेघवाल सांसद हैं। किन्तु सक्रियता के मामले में अर्जुन मेघवाल उनसे बहुत आगे हैं। इसलिए राजनीतिक क्षेत्र में यह चर्चा बहुत अधिक है कि इस बार अर्जुन मेघवाल बीकानेर की बजाए श्रीगंगानगर से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

Thursday 12 January 2012

अधूरा है राजस्थान का महिला आयोग,कई हजार केस पेंडिंग



श्रीगंगानगर-राजस्थान महिला आयोग के यहां कई हजार केस पेंडिंग हैं और अभी तक आयोग का पूरी तरह गठन भी नहीं हुआ है। आयोग की अध्यक्ष
प्रो लाड कुमारी जैन खुद स्वीकार करती हैं कि आयोग अभी अधूरा है। सर्किट हाउस में हुई वार्ता के दौरान प्रो जैन ने बताया कि अध्यक्ष,सचिव सहित कुल पांच सदस्य होने चाहिए। लेकिन अभी तीन सदस्यों की नियुक्ति की जानी है। उनके बिना आयोग ठीक ढंग से काम नहीं कर सकता। अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जल्दी ही सदस्यों के मनोनयन का भरोसा दिलाया है। प्रो जैन के अनुसार आयोग के पास लगभग 3500 हजार केस पेंडिंग हैं। 79 और आ गए। इस लिए हर रोज सुनवाई करने की योजना है ताकि पेंडिंग केसों की संख्या कम हो और पीड़ित को न्याय मिले। क्योंकि आयोग का अध्यक्ष ना होने के कारण सभी को तारीख पर तारीख ही दी जा रही थी। राजस्थान विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर लाड़ कुमारी जैन कहतीं है कि पद अधिक महत्वपूर्ण नहीं है उनके लिए। बस ये जरूर है कि कुछ नया और अधिक काम करने का अवसर मिला है। वह करके दिखाना है। अध्यक्ष ने कहा कि वे मन से महिलाओं के लिए काम करना चाहती है। सभी जिलों में एक्शन प्लान बनाना है। जिससे महिलाओं का शोषण किसी भी रूप में ना हो। राजस्थान की महिला नीति को रिव्यू किया जाना है। अध्यक्ष ने कहा कि उन्होने ज़िंदगी में कभी गलत बर्दाश्त नहीं किया। महिलाओं पर होने वाले अन्याय,शोषण के खिलाफ लड़ी। सबसे पहले 1987 में सती को महिमा मंडित करने से रोकने की लड़ाई लड़ी। उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इतने काम किए तभी तो सरकार ने यह ज़िम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर होने के बावजूद उन्होने कभी राजनीति में सक्रियता नहीं दिखाई। प्रो जैन के चेहरे पर अपने विचारों की दृढ़ता और आत्म विश्वास खूब झलक रहा था। उन्होने जो कुछ भी कहा वह पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ता से।

Monday 9 January 2012

बी डी की बड़ी किसान सभा ने नेताओं को हैरत में डाला




श्रीगंगानगर-क्षेत्र के अग्रवाल समाज में अपनी पैठ जमाने के बाद सोमवार को विकास डब्ल्यूएसपी के एमडी बी डी अग्रवाल ने किसानों के बीच भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवाई। सर छोटू राम को श्रद्धांजलि देने के लिए श्रीअग्रवाल ने किसानों की बड़ी सभा आयोजित कर यह साबित कर दिया कि वे भी किसानों को एकजुट कर सकते हैं। नेता या कोई किसान नेता इस प्रकार की सभा उस जगह करवाना पसंद करता हैं जहां लोगों की भीड़ दिखे। किन्तु बी डी ने अलग हटकर उस जगह सभा की जहां कोई सोच भी नहीं सकता। शहर से दूर सभा में किसने क्या कहा,इसका उतना महत्व नहीं जितना ये कि उसमें कितनी संख्या में किसानों की भागीदारी रही। सभा में किसानों की संख्या के बारे में जैसे ही नेताओं को पता लगा उनके पास कहने को कुछ नहीं था। क्योंकि कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि एक अकेला बी ड़ी अग्रवाल किसानों को इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित कर सकता है। सर छोटूराम किसान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बी.डी. अग्रवाल ने कहा है कि वे और उनका पूरा परिवार किसानों की सेवा में समर्पित है और रहेगा। वे किसानों को पूरा हक दिलाने के लिए सदैव संघर्षरत रहेंगे। किसान अपने को इतना बुलंद करें कि भगवान खुद उससे पूछ कर उसकी किस्मत लिखे। अग्रवाल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ ने सरसों और अन्य जिंसों के भाव तय कर रखे हैं। किसानों को वह भाव नहीं दिए जा रहे हैं। इससे किसान का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा पहला लक्ष्य है डब्ल्यूटीओ के अनुसार किसान को उसकी उपज का न्यूनतम मूल्य मिले। अधिकतम मूल्य हम लेना जानते हैं। वह हम अपने आप ले लेंगे।सभा को जिला परिषद के सदस्य महेश बुडानिया,किसान नेता गुरबलपालसिंह संधू,पार्षद रमजानअली चोपदार, नत्थूराम सींवर, डॉ. सुखदेवसिंह, उदयपाल झाझडिय़ा, बालकिशन, अंग्रेजसिंह वाल्ला, अमरीककौर, कृष्ण सहारण, नत्थूराम सिंगला व विजेंद्र पूनिया ने भी संबोधित किया। मंच संचालन महेश गुप्ता ने किया।

Monday 26 December 2011

पैगोड़ा होटल बिका

श्रीगंगानगर-नगर के हृदय स्थल गांधी चौक पर कई दशक से अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला पैगोड़ा होटल अब किसी और का हो गया है। इसे साठ के दशक में वेद प्रकाश सेठी ने स्थापित किया था। कुछ समय ने पैगोड़ा ने अपने खास पहचान बना ली। उसके बाद उनको पुत्रों ने इसकी ख्याति में और बढ़ोतरी की। इसका नाम चमकता ही गया। जो भी खास व्यक्ति इस क्षेत्र मे आया तो उसकी पसंद यही पैगोड़ा होटल रहा। लगभग पांच दशक के अपने सफर में पता नहीं कितनों व्यक्तियों की खातिर इस होटल ने की। आयोजन को भव्यता प्रदान की। इस होटल में कोई कार्यक्रम होते ही वह खुद खास हो जाता था। चाहे वह सगाई का हो या पार्टी का। रिश्तेदार,मित्र यही चर्चा करते...अरे पैगोड़ा में है तो बढ़िया ही होगा। आज तक किसी विवाद में इस होटल का नाम नहीं आया। साफ सुथरा। एक दम फिट। कहीं कोई कमी की गुंजाइश नहीं। यस, वही होटल अब सेठी परिवार का नहीं रहा। किसी और का हो गया। सेठी परिवार पैगोड़ा को बेच दिया है। अब यह गौरी शंकर जिंदल परिवार का है। यह कितने में खरीदा बेचा गया,यह लिखना कोई मायने नहीं रखता। शहर के बीच में इतना पुराना होटल बेचा खरीदा गया है तो निश्चित रूप से बड़ी रकम होगी। खैर,यह तो लेने और देने वालों के आपस का मामला है। खबर बस यही कि अब पैगोड़ा होटल सेठी परिवार का नहीं रहा। चर्चा तो पैगोड़ा रिसोर्ट की डील भी होने की है। लेकिन पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है।

गर्मियों में नहर बंदी का विरोध, क्षेत्र के बाग उजड़ने की आशंका


श्रीगंगानगर-इस क्षेत्र की लाइफ लाइन तीनों नहरों गैंग कैनाल,इन्दिरा गांधी नहर और भाखड़ा नहर में अप्रैल 2012 में प्रस्तावित बंदी को किसान क्षेत्र को बरबाद करने वाला मान रहे हैं। नहर बंदी 50 से 90 दिन तक की होगी। इस दौरान नहरों में पानी नहीं होगा। आज इस बंदी के विरोध में बागों के मालिक जिला कलेक्टर अंबरीष कुमार से मिले और उनको ज्ञापन दिया। किसानों का कहना था कि उनके गर्मी में उनके बागों को दो माह के बाद पानी उपलब्ध हो सकेगा। दो माह तक पानी ना मिलने के कारण बागों में लगे सभी फलों के पेड़ समाप्त होने की आशंका है। इस क्षेत्र की पहचान किन्नू तो बिना पानी के बिलकुल भी नहीं हो सकेगा। किसानों का कहना था कि बंदी सर्दी में ली जानी चाहिए। हालांकि बागों में पानी की डिग्गी हैं मगर उनकी क्षमता अधिकतम एक माह ही है। इस वजह से पानी की उपलब्धता लगातार संभव नहीं।

विभिन्न सूत्रों से पता चला है कि तीनों नहरों के मरम्मत के लिए 1352 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है। यह राशि चार साल में खर्च की जानी है। पहले साल बंदी का समय कुछ अधिक रहेगा। उसके बाद आगामी तीन साल इसकी अवधि कम रहेगी। सूत्रों ने कहा कि अगर यह काम नहीं हुआ तो किसानों को उतना पानी भी नहीं मिलेगा जितना अब मिल रहा है। क्योंकि नहरों की हालत बहुत खराब है। सरकारी सूत्र मानते हैं कि बंदी से किसानों पर फर्क तो पड़ेगा,लेकिन उतना नहीं जितना किसान बता रहें हैं।

Friday 23 December 2011

बड़े बड़े कांग्रेस नेता ज्योति कांडा की छतरी के नीचे


श्रीगंगानगर-नगर विकास न्यास के चेयरमेन ज्योति कांडा का कांग्रेस में कोई बड़ा कद बेशक ना हो किन्तु क्षेत्र के जाने माने बड़े बड़े कांग्रेस नेता उसकी छतरी के नीचे जरूर आ गए। सच है,जो पद पर है वही बड़ा। बाकी जो बचा वह दही में पड़ा हुआ बड़ा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास राजकुमार गौड़। दूसरे खास पूर्व सांसद शंकर पन्नू। तीसरे खास कुलदीप इंदौरा.....ऐसे ही सभापति जगदीश जांदू,कश्मीरी लाल जसूजा,ब्लॉक अध्यक्ष गुरजीत वालिया,ललित बहाल,युवक कांग्रेस के हनुमान मील,रोहित जाखड़,भूपेन्द्र चौधरी,श्याम शेखावटी,महिला कांग्रेस की बबीता वालिया,मनिन्दर कौर नन्दा,विक्रम चितलांगिया...सब के सब चेयरमेन ज्योति कांडा के बुलावे पर नगर विकास न्यास गए। चाहे श्री कांडा ने न्यास के चेयरमेन के रूप में अभी कुछ ना किया हो परंतु कांग्रेस नेता के रूप में वह कर दिया जिसकी धमक देर तक और दूर तक सुनाई देगी। जो नेता अपने आप से बड़ा किसी को मानते ही नहीं वे ज्योति कांडा के सामने जा बैठे सुझाव देकर उसकी चेयरमेनी को सफल बनाने के लिए। राजनीति में तो ऐसा होता नहीं। सब दूर से तमाशा देखते हैं। मन ही मन उसकी असफलता की कामना करते हैं ताकि उसकी विफलता से राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। यहां इसके विपरीत हुआ। ज्योति कांडा वह कर दिखाया जो शायद अभी जगदीश जांदू भी नहीं कर सके। जबकि वे मैनेजमेंट में माहिर हैं। राजनीति में ज्योति कांडा की चेयरमेन बनने से पहले शायद यही उपलब्धि थी की वे कांग्रेस नेता मदन लाल कांडा के पुत्र हैं। अब बात और है। वे न्यास के चेयरमेन तो हैं ही इसके अलावा वे वो नेता हो गए जो सभी गुटों के कांग्रेस नेताओं को एक छत के नीचे ला सकने की क्षमता रखते हैं। यह कोई मामूली बात नहीं है। इसके कई संदेश आएंगे, जाएंगे। चाहे कोई अपनी जुबान से कुछ ना कहे। किन्तु राजनीति में एक मुलाक़ात भी बड़ी खबर,बड़ी चर्चा का विषय होती है। राजनीति में यह संदेश कम महत्व पूर्ण नहीं होगा। कई बार मौन बहुत अधिक कह जाता है। एक चित्र एक कहानी बयां करने में सक्षम होता है। राजनीति में इस प्रकार की बैठक तो बहुत कुछ कहने की क्षमता रखती है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि ऊपर से सभी को ज्योति कांडा के हाथ मजबूत करने के निर्देश मिले हों। बिना निर्देश तो ये बड़े नेता किसी के पास जाने से रहे। संभव है आने वाले समय में यहां की कांग्रेस राजनीति में कुछ नए प्रष्ठ जुड़ें। क्योंकि दो साल बाद चुनाव हैं और कांग्रेस की हालत खराब। ऐसे में ऊपर वाले अभी से किसी नए को तैयार कर रहें हों तो क्या बड़ी बात हैं। किसी ने कहा हैइश्क मोहब्बत बहुत लिखा है,लैला-मंजनू रांझा-हीर,माँ की ममता,प्यार बहिन का,इन लफ्जों के मानी लिख।

Thursday 22 December 2011

सर्दी में सीमा पर अधिक चौकसी—डीआईजी


श्रीगंगानगर-सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी रणजीत सिंह ने बार्डर पर तैनात सभी अधिकारियों,जवानों को सर्दी में और अधिक चौकन्ना रहने की हिदायत दी है। उन्होने बताया कि बार्डर क्षेत्र में इस बात पर खास निगाह रखी जा रही है कि सर्दी धुंध में कोई राष्ट्र विरोधी तत्व कोई फायदा नी उठा ले। उनका कहना था कि सर्दी में दूर तक देख सकने वाले आधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा ऐसे मौसम के लिए विधेश आधुनिक उपकरण भी हैं। धुंध के समय पांच सात किलोमीटर के आगे देखना अधिक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इसी प्रकार के उपकरण सीमा पर तैनात अधिकारियों,जवानों के काम आते हैं। डीआईजी रणजीत सिंह ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई यहीं के खालसा कॉलेज से की। वे लॉन्ग जंप के जाने माने खिलाड़ी थे। उसी दौरान उनका चयन बीएसएफ में हो गया था। रणजीत सिंह चुरू जिले के रहने वाले हैं। उनके दिल में कॉलेज की यादों का विशाल संग्रह है। कोई भी उनसे कॉलेज की बात करता है तो उनके चेहरे पर आनंद साफ दिखाई पड़ता है।

Wednesday 21 December 2011

बाहर हंगामा...अंदर चिंतन.....न्यास में नया प्रयोग

श्रीगंगानगर-नगर विकास न्यास। चेयरमेन,सचिव सभी अपने अपने स्थान पर। कोई इधर उधर या घटा बढ़ी होगी तो आगे जिक्र करेंगे। फिलहाल आंखों देखा हाल पढ़ो,आनंद लो। मनन करो और फिर कमेन्ट कि क्या गलत क्या सही। दोपहर बाद साढ़े चार बजे होंगे। सचिव के कमरे से उनकी तेज बोलने की आवाज आने लगी। कान उधर हो गए। जो बरामदे में थे उनकी आंख भी। कुछ मिनट बाद एक कर्मचारी उनके कमरे से बाहर आया। उसने अपने साथ जो हुआ दूसरे कर्मचारी को बताया। दूसरे ने तीसरे को........फिर सभी को पता लग गया। फिर कुछ मिनट बाद सचिव पीए के कमरे में आए। कोई आदेश की बात की। वह कर्मचारी भी पास में था। दूसरे,तीसरे .....कई कर्मचारी भी आ गए। उन्होने सचिव से उनके व्यवहार पर आपति जताई। दोनों पक्षों में तेज आवाज में गरमा गरमी हुई। सचिव ने बात समाप्त करने के लिए पहले तो हाथ जोड़ कर क्षमा याचना की फिर अचानक उस कर्मचारी के पैरों में झुक गए। सभी अवाक! ये क्या हो गया! एक कर्मचारी फिर भी बोलता रहा। तब सचिव ने कहा...अब क्या क्षमा भी नहीं करोगे। आवाज फिर तेज हुई। सचिव ने कहा,काम नहीं करना तो छुट्टी ले लो। कोई एक कर्मचारी बोला.....आप ले लो छुट्टी। सचिव यह कहते हुए कि पब्लिक सब जानती है, कौन कैसा है..... अपने कमरे में चले गए। कुछ क्षण बाद बाहर आए कार में बैठे और रवाना हो गए । कोई कर्मचारी कह रहा था मेडिकल लेकर गए हैं। ऊपर जिक्र किया था कि चेयरमेन भी थे। यस,अब भी हैं। अनुज चेयरमेन भी हैं। मैंने देखा तब तो अनुज उनके साथ वाली कुर्सी पर थे बाद में इधर उधर भी बैठ सकते हैं। उनके अग्रज चेयरमेन जो हैं। जब उनके कमरे के बाहर उनके ही दफ्तर के अधिकारी कर्मचारी हंगामा करने में व्यस्त थे तब चेयरमेन नगर के अनेकानेक पार्षदों के साथ न्यास क्षेत्र की समस्याओं के समाधान पर चिंतन कर रहे थे। अब चेयरमेन न्यास के मुखिया होने के नाते बाहर आकर उनको धमकाते,पुचकारते, समझाते तो चिंतन में खलल पड़ता। इसलिए बैठक जारी रही...... चिंतन का सबसे बढ़िया ढंग भी यही है। बाहर क्या हो रहा है उस तरफ बिलकुल भी ध्यान मत दो। अंदर रहो। अंदर क्या हो रहा है यह किसी को पता नहीं लगना चाहिए। जब चिंतन जनता के लिए जनता के नुमाइंदे कर रहे हो तो फिर हंगामा,तमाशा कोई मायने नहीं रखता। ये तो सोचो कि नेता कितने गंभीर हैं समस्याओं के समाधान के लिए। आनंद कुमार गौरव कहते हैं—समझ गया है मेमना,अब शेरों की चल,बिना बात दोहराएंगे,फिर फिर वही सवाल।