Thursday 13 November 2008

कभी श्याम बन के कभी राम बन के

श्रीगंगानगर के दिग्गज कांग्रेसी नेता राधेश्याम पार्टी ले टिकट नही मिलने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए। यह सब लिखा है " तिरंगे नेता की दुरंगी चाल में" आज कई लोग मिले और कहा कि कुछ हो जाए, तो जनाब उनका सुझाव सर माथे।
नेता जी का नाम है राधेश्याम और ये बीजेपी में शामिल हुए हैं। तो कहना पड़ेगा---
कभी श्याम बन के
कभी "राम" बन के
चले आना, ओ राधे चले आना।
कभी तीन रंग में आना
कभी दुरंगी चाल सजाना
ओ राधे चले आना।
अब राधेश्याम का नाम बदल कर राधेराम कर दिया गया है। ताकि सनद रहे और वक्त जरुरत काम आए। श्रीगंगानगर इलाके में राधेश्याम के राधेराम में बदल जाने की बात लोगों को हजम नही हो रही। क्योंकि यह आदमी कांग्रेस को अपनी माँ कहता था।

3 comments:

seema gupta said...

श्रीगंगानगर इलाके में राधेश्याम के राधेराम में बदल जाने की बात लोगों को हजम नही हो रही। क्योंकि यह आदमी कांग्रेस को अपनी माँ कहता था।
" oh oh shayad sotailee maa semja hoga... to badal lee.."

Regards

राज भाटिय़ा said...

क्योंकि यह आदमी कांग्रेस को अपनी माँ कहता था।
निक्कमी मां के बच्चे भी तो निक्कमे ही होंगे ना, अगर संस्कारी मां के बच्चे होते तो मर जाते लेकिन अपनी जुबान से ना बदलते , पंजाबी मै एक कहावत है जेसी कोको (एक चिडिया) वेसे ही कोको के बच्चे.
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

अब इन नेताओं का तो क्या कहा जाये. जो न कर दें..कब किस बात से मुकर जायें..कम है.