Thursday 27 November 2008

मिली क्यों,मिली तो बिछड़ी क्यों

सुना है,पढ़ा है और किसी
सयाने ने बताया भी था कि
भाग्य में जो है वह मिलेगा
तुम मिलीं, मिलकर बिछड़ गईं
सवाल ये कि
तुम मेरे भाग्य में थीं
तो बिछड़ क्यों गईं
अगर भाग्य में नहीं थीं तो
तुम मिलीं कैसे
अगर दोनों बात भाग्य के साथ है
तो फ़िर ये बिल्कुल साफ है कि
भाग्य बदलता है
इसलिए तुम उदास मत होना
अपना मिलन फ़िर हो सकता है।

2 comments:

seema gupta said...

भाग्य बदलता है
इसलिए तुम उदास मत होना
अपना मिलन फ़िर हो सकता है।
"कितनी प्यारी सोच और उम्मीद है की भाग्य बदलता है , शायद जैसे दुःख हमेशा नही रहता वैसे ही बिछोह भी हमेशा नही रहता होगा..."

Regards

सीमा सचदेव said...

हम भारतीय भाग्य के भरोसे रहते हुए सदैव मन मे उमीद पाले रखते है ,चलो अच्छा है ,कम से कम जिजीविषा तो कायम रहता है | आपकी रचना अच्छी लगी |

सादर