Sunday 31 March 2013

साधारण वर्कर के लिए मंत्री बनना बड़ी बात-कुन्नर




श्रीगंगानगर-श्रीकरनपुर से निर्दलीय विधायक और कृषि विपणन मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर कहते हैं कि उन्होने 2008 में अशोक गहलोत को समर्थन देकर उनका अहसान चुकता किया है। एचबीसी चैनल को दिये इंटरव्यू में यह कहा। श्री कुन्नर ने कहा कि मैंने समर्थन खुद चल कर दिया। इसलिए दिया कि मुझे विधायक बनाने में अशोक गहलोत का बहुत बड़ा हाथ था....2008 में उनको मेरी जरूरत पड़ी तो मैं खुद चल कर उनके पास गया। रिपोर्टर बीच में पूछा तो 1998 का अहसान चुकता कर दिया....कुन्नर बोले, चुकता कर दिया। आगे की रणनीति क्या होगी,रिपोर्टर ने पूछा। श्री कुन्नर ने कहा,आगे की रणनीति उन पर [ अशोक गहलोत ] पर ही निर्भर है। चुनाव बीजेपी ले लड़ने की बात हो रही है, रिपोर्टर ने कहा। कुन्नर ने जवाब दिया,लोगों के कयास है।मेरी कोई बात नहीं हुई है। मेरी तो अभी कांग्रेस से कोई बात नहीं हुई। ना कांग्रेस ने मुझसे कोई बात की है। रिपोर्टर ने पूछा,कांग्रेस आपको फिर मौका देगी? श्री कुन्नर ने कहा कि यह तो कांग्रेस पर निर्भर करता है। मैंने तो चल कर समर्थन दिया था। किसी का कोई प्रेशर नहीं था। मैंने खुद मना किया था मंत्री पद के लिए...मंत्री पद की जरूरत नहीं है। साधारण कार्यकर्ता के लिए मंत्री बनना बहुत बड़ी बात होती है। हमारी हैसियत क्या थी.....रिपोर्टर उन्हे बताता है कि हैसियत तो थी....इसके साथ साथ वह सरपंच से अब तक के राजनीतिक सफर की चर्चा करता है। रिपोर्टर के एक सवाल के जवाब में श्री कुन्नर ने बताया कि 2008 में कुछ बीच के लोग आए थे बीजेपी की टिकट के लिए। केवल एमएलए बनने के लिए पाला बदलना.... इतनी उम्र हो गई अब...ऐसा नहीं करेंगे... सोचा छोड़ देंगे। इंटरव्यू में उनके मंत्रालय की भी बात चीत हुई।

Saturday 30 March 2013

मौन



मेरे मन का मौन
अब सुनेगा कौन,
हर चेहरा ताकता है
मन में कौन झांकता है,
तू ही कोई सपना बुन
मौन हो मेरा मौन सुन,
तुझे मीत  बताता है
तेरे गीत गाता है,
अपने मन को झिंझोड़
उसे मेरे मन से जोड़,
मौन का मौन से
अब होने दे संवाद
इस वाचाल जमाने को
कुछ तो रहे याद।

Friday 29 March 2013

मच गया बवाल



बाई के कारण घर में मच गया बवाल
पति अड़ गया,बोला बाई को घर से निकाल,
बाई रहेगी तो मैं नहीं आऊंगा
घर छोड़ कहीं दूर चला जाऊंगा,
पति ने थोड़ी  हिम्मत दिखाई
पत्नी की दुखती रग दबाई,
जा निकल,पत्नी बोली
शाम को झक मार के आएगा,
बाई गई तो तुरंत कोई दूसरा ले जाएगा,
तुझे निकलना है तो जल्दी से निकल
बाई तो ना आज जाए, ना जाए कल,
पति का क्या एक जाएगा हजार आएंगे
बाई चली कहीं चली गई तो कहां से लाएंगे,
पत्नी ने पति को आइना  दिखा दिया
क्या हैसियत है उसकी  मिनटों में बता दिया,
अब बाई जब कभी छुट्टी पर जाती है
पत्नी उसके सारे काम पति से करवाती है।

कांग्रेस नेताओं ने दुविधा में डाल दिया अशोक गहलोत को


श्रीगंगानगर-इस क्षेत्र के कांग्रेस जनों ने अपने नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दुविधा में डाल दिया। यही कारण है कि वे लगातार श्रीगंगानगर आने से बच रहे हैं। दुविधा है सरकारी मेडिकल कॉलेज। कांग्रेस नेताओं ने ये कह कह कर कि सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल गया....सीएम ने  मंजूरी दे दी....बजट में घोषणा भी कर दी....जनता को इस तरह पका दिया कि मुख्यमंत्री को आते ही इस बारे में बोलना पड़ेगा। संभव है कांग्रेस नेता कॉलेज का वैसे ही शिलान्यास भी करवा दें जैसा तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुगर मिल का किया था। परंतु कांग्रेस नेता जानते हैं कि अशोक गहलोत तभी कुछ  कहेंगे  जब वह हो सकने लायक हो। बस, यही दुविधा है उनके सामने। सरकारी मेडिकल कॉलेज कोई चुटकी में बनने वाला नहीं है। ईंट,गारे,चूना,बाजारी,मार्बल से बनी  ईमारत ही मेडिकल कॉलेज नहीं होती। कॉलेज कॉलेज होता है। सरकार नहीं जो जब चाहे बदल जाए....जमाने तक चलतीं हैं ऐसी संस्थाएं। जो सदियों तक चलना है उसका निर्माण,संचालन उसकी व्यवस्था भी तो उसी के अनुरूप होती है। किसी सेठ का सहयोग लें तो उसकी बल्ले बल्ले....कांग्रेस नेताओं के हाथ पल्ले कुछ नहीं पड़ेगा। सरकार के लिए तो सरकारी हॉस्पिटल ही मुश्किल हो गए चलाने ऐसे में एक बड़ा हाथी बांधना.....सरकार के मुखिया को बहुत कुछ सोचना है। कहीं करो तो भले के लिए और हो जाए बंटा धार, वह भी चुनाव जैसे साल में। अब प्रदेश का,सरकार का मुखिया आएगा तो उसके पास अपने स्नेही जनों को देने के लिए कुछ तो हो। स्नेही सरकारी जन मेडिकल कॉलेज मांग रहे हैं।ताकि वे उसके सहारे अपने आप को चुनाव में जिता सकें। वो आसान नहीं...तो कैसे आएं....आएं तो ऐसे आएं कि सरकारी मेडिकल कॉलेज दे भी दें और कुछ करना भी ना पड़े। बस इसके लिए तो शिलान्यास ही लास्ट हथियार है....कर दो...आने वाली सरकार अपने आप देखेगी.....। या फिर तुरंत सरेंडर करो उस सेठ के सामने जो हर सभा में कोसता है कांग्रेस  और उसके नेताओं को।अब जब तक यह सब नहीं हो जाता अशोक गहलोत कैसे श्रीगंगानगर आ सकते हैं। आ गए,मेडिकल कॉलेज के बारे में कुछ नहीं बोला तो कांग्रेस नेता कहीं के नहीं रहेंगे। इसलिए जब तक टलता है दौरा टालते रहो। उसके बाद आचार संहिता लग ही जाएगी।

Tuesday 26 March 2013

होली की चुटकी



आओ आज होली की बात करें। कुछ नई शुरुआत करें। पुरानी बातों को याद करें। वे बात जब इस दिन क्षेत्र के जाने माने व्यक्तियों को कुछ टाइटल दिये जाते थे। समय बदला। नाराजगी काज डर सताने लगा। परंपरा छूटने लगी....टूटने लगी। इसे जोड़ने की कोशिश करते हैं। इस उम्मीद के साथ कि होली पर कुछ हास्य के रंग सभी पर बिखरें। केवल हास्य को ध्यान में रख यह “चुटकियाँ” आई हैं। ये श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ क्षेत्र के प्रेमियों को आनंद प्रदान करेंगी।
कांडा किसका यार है
जांदू भी तैयार है,
गौड़ केवल शोर है
बाऊ असली  ज़ोर है।
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कुन्नर का क्या ज़ोर है
असली मंत्री ओर है।
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जिला कलक्टर तो
चोरडिया  बताते हैं,
कलक्टरी एडीएम
यादव चलाते हैं।
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एसपी साहब मस्ती में
आग लगे बस्ती में।
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बी डी के इर्द गिर्द
भांडों का टोला,
सबकी इच्छा एक
मेरा रंग दे
बसंती चोला।
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बी डी के साथ है मीडिया की फौज
जो दूर रहेगा उनसे ,नहीं मिलेगी मौज।
[26.3.13]