Saturday 28 January 2012

संघ प्रष्ठभूमि वाले ट्रस्टियों के कालेज में कांग्रेसियों का जमघट


श्रीगंगानगर-आरएसएस से जुड़े व्यक्तियों की मैनेजमेंट वाले कॉलेज में कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति ने सबको हैरत में डाल दिया। वैसे तो कोई भी शिक्षण संस्था किसी पार्टी विशेष की नहीं होती। किन्तु उस संस्था को चलाने वाले कौन है उनकी पहचान,विचारधारा का जिक्र तो होता ही है। जिस आत्मवल्लभ जैन गर्ल्स कॉलेज का जिक्र यहां है,उससे कांग्रेस सरकार के मंत्री इसीलिए दूरी रखते थे कि कॉलेज के अधिकांश ट्रस्टी सक्रिय रूप से आरएसएस से जुड़े हैं। अमरचंद बोरड़ के पास तो आरएसएस के दायित्व तक रहें हैं। इस बार राजस्थान की कांग्रेस सरकार के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल, विधायक संतोष सहारण कांग्रेस के पूरे लवाजमे के साथ वहां पहुंचे हुए थे। जिस कृषि विपणन मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर ने गत वर्ष उतसव में आने से मैनेजमेंट को इंकार कर दिया था इसबार उन्हे शांति धारीवाल के कारण वहां आना पड़ा। जबकि कार्ड पर उनका नाम तक नहीं था। जब नगरीय विकास मंत्री नगर में हों तो नगर परिषद के सभापति और नगर विकास न्यास के अध्यक्ष को भी हाजिरी लगानी पड़ी। उनके साथ कई छोटे बड़े कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं का पहुँचना भी स्वाभाविक है। वैसे सभापति और अध्यक्ष 29 जनवरी के कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित हैं। मंत्री शांति धारीवाल ने कॉलेज में नई लाइब्रेरी का उदघाटन किया। दो दो मंत्री सहित कांग्रेस नेताओं का जैन कॉलेज में जमघट मैनेजमेंट की बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। क्योंकि इससे पहले सत्तारूढ़ पार्टी के इतने बड़े नेता कभी कॉलेज में शायद ही आयें हों।

आमजन की सरकार के मंत्री के कार्यक्रम में आमजन नदारद


श्रीगंगानगर-राजस्थान की आमजन की सरकार के वरिष्ठ मंत्री शांति धारीवाल के कार्यक्रम में आमजन नदारद रहा। कार्यक्रम नगर विकास न्यास के अध्यक्ष ज्योति कांडा ने न्यास में आयोजित किया था। कार्यक्रम में विधायक संतोष सहारण,कांग्रेस नेता राजकुमार गौड़,पूर्व सांसद शंकर पन्नू,कश्मीरी लाल जसूजा,कई पार्षद थे। अगर जनप्रतिनिधि,कुछ कांग्रेस जनों और न्यास स्टाफ को निकाल दें तो बस केवल मीडिया कर्मी ही थे। हां,नगरीय विकास मंत्री से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मिलने आए लोगों की संख्या कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से अधिक थी। लेकिन वे तो मंत्री से मिल कर चले गए थे। न्यास अध्यक्ष के कार्यक्रम में खुद उनके परिवार के सदस्य तक नहीं थे। ना ही था कोई कोलोनाइजर। अध्यक्ष बनने के बाद किसी मंत्री के समक्ष कांडा जी का यह पहल निजी कार्यक्रम था। लेकिन भीड़ के मामले में वे कामयाब नहीं हो सके। जनप्रतिनिधियों,कांग्रेस जनों और अपने स्टाफ की मौजूदगी में कांडा जी ने शांति धारीवाल को बड़ी सी माला पहनाई। राजस्थानी पगड़ी सिर पर रखी। अंगरखा दिया। इससे पूर्व मंत्री जी न्यास ऑफिस पहुंचे। चंद मिनट तक कांग्रेस नेताओं की उपस्थिति में न्यास के अधिकारियों से बात की। बाहर लॉन में उनका स्वागत कार्यक्रम था। कांडा जी उनकी शान में कसीदे पढ़ते रहे और मौजूद लोग उनका स्वागत करते रहे। मंत्री जी ने समारोह को संबोधित भी किया। किन्तु प्रेस से बात करने में परहेज रखा।

चुनाव सूरतगढ़ या जोधपुर क्षेत्र से-विजयलक्ष्मी


श्रीगंगानगर-राजस्थान समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष विजय लक्ष्मी बिनोई ने कहा है कि वे अपने पुराने क्षेत्र सूरतगढ़ या जोधपुर क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहेंगी। अंतिम फैसला आलाकमान करेगा। वह जो कहेगा उसी के अनुसार चलेंगे। क्योंकि हमने तो आज तक वही किया जो पार्टी हाईकमान ने निर्देश दिये। वे बल्लू राम गोदारा गर्ल्स कॉलेज में मीडिया से बात कर रहीं थी। वे यहां कोलेक के वार्षिक उत्सव में भाग लेने आई थीं। पार्टी अध्यक्ष चंद्रभान के ब्यान कि कांग्रेस कमजोर है के बारे में अध्यक्ष ने कहा कि उन्होने ऐसा इसलिए कहा ताकि कांग्रेस कार्यकर्ता आराम से ना बैठे। और अधिक काम करें ताकि 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 1998 जैसा बहुमत मिल सके। श्रीमती बिशनोई ने इस बात से इंकार किया कि उनके अधिकारों में कोई कटौती की गई है। उनका कहना था कि और अधिक नेताओं को भी काम करने का मौका दिया जाएगा। उनका कहना था कि पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं को ज़िम्मेदारी दी जाती है। मैं खुद इसका प्रमाण हूं। अध्यक्ष ने माना कि बहुत सी एनजीओ केवल कागजों में चल रही हैं। उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। भंवरी प्रकरण में जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं।वार्ता के दौरान प्रेस कान्फ्रेंस के स्थान पर भी सवाल उठा। अध्यक्ष ने बताया कि उनका तो कोई इरादा नहीं था प्रेस कान्फ्रेंस का। जहां मैडम की प्रेस वार्ता थी वहाँ उनके साथ ना तो कॉलेज की प्राचार्या थी और ना ही छात्रा संघ की अध्यक्ष। जबकि कान्फ्रेंस छात्रा संघ के दफ्तर में हो रही थी। उनके साथ महिला कांग्रेस की महिलाएं थी जो उनको घेरे हुए थी।

Thursday 26 January 2012

भाटी,मूंदड़ा,जयदीप के बाद अब बी डी अग्रवाल का अवतरण

श्रीगंगानगर-चंद्रा ट्रैवेल्स के गजेन्द्र सिंह भाटी। इंहोने शहर भर में सेवा के अनेक प्रकल्प शुरू किए। काफी राशि विभिन्न प्रकार के आयोजनों पर खर्च की। लगभग हर किसी आयोजन में वे खुद या उनकी पत्नी रितु गजेन्द्र भाटी प्रमुख होती। संजय मूंदड़ा। कौन है जो इस नाम को ना जानता हो। आम जन से लेकर मीडिया तक में समाज सेवी बन कर छा गए। कई लाख रुपए गौ शालाओं को दान कर गो सेवक भी बने। यहां से लेकर दिल्ली-जयपुर तक के नेताओं से रिश्ते बनाए। जयदीप बिहाणी। एक खानदानी पहचान। शिक्षा का इतना बड़ा संस्थान। जिसकी दूर दूर तक पहचान और शान। एक दौर इनका भी चला। कोई कार्यक्रम जयदीप बिहाणी के बिना होना मुश्किल था। विज्ञापनों के सहारे या रिश्तों के भरोसे कैसे भी था। शायद ही कोई दिन होता होगा जब इनके नाम या चित्र प्रकाशित ना होते हो। समय कितनी तेजी से आगे निकल जाता है। आज ये कहां है? क्या गतिविधियां हैं?बहुत कम लोग जानते हैं। ऐसा नहीं ये कि ये आज सक्षम नहीं रहे। या इनकी ऊर्जा,जोश,समाज सेवा की भावना समाप्त हो गई। सब कुछ है। किन्तु इंहोने अपने कदम रोक लिए।श्री भाटी को विधानसभा के चुनाव ने आईना दिखा दिया। संजय मूंदड़ा को सभापति का चुनाव ले बैठा। जयदीप को टिकट नहीं मिली।स्थान कभी कोई खाली नहीं रहता। इनके कदम रुके तो बी डी अग्रवाल का अवतार हुआ। वे अग्रवाल समाज को एकजुट करके आगे बड़े,बढ़ते ही चले गए। समाज में पहचान बनाई। दूसरे समाज से हाय हैलो हुई। पहले वालों ने लाखों खर्च किए तो श्री अग्रवाल ने करोड़ों की परवाह नहीं की। गरीब विद्यार्थियों हेल्प। बुजुर्गो का सम्मान। स्कूल कॉलेज में उनके प्रायोजित ज्ञान वर्धक कार्यक्रम। वे गंगानगर से निकाल कर नोहर भादरा तक पहुँच गए। ना...ना....करते राजनीति में उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया। दूसरे क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के इच्छुक एक दो नेता भी आ गए।आरएसएस के कार्यक्रम को सहयो करने लगे। राधेश्याम गंगानगर से जिनके विचार नहीं मिलते ऐसे नेता भी श्री अग्रवाल को महत्वाकांक्षा को हवा देने लगे। एक और उम्मीदवार तैयार हो गया चुनाव के लिए। पर बात भैरों सिंह शेखावत पर आकर अटक जाती है। पैसा ही चुनाव जीतने का कारक होता तो वे चुनाव नहीं हारते। संपर्क,मतदाताओं से सीधी जानकारी जीत के लिए जरूरी होता तो महेश पेड़ीवल चुनाव जरूर जीतते। श्रीगंगानगर में जीत हार के कारण अभी तक तो कोई समझ नहीं सका। बी डी अग्रवाल समझ गए तो यह उनकी एक और उपलब्धि है।

Sunday 22 January 2012

नर सेवा की बजाए अपने प्रचार पर मिट्टी किया धन

श्रीगंगानगर- कहीं पढ़ा था....एक बार मदन मोहन मालवीय विदेश में गए। वहां कुम्भ मेले के बारे में चर्चा चली। उनसे पूछा गया कि कुम्भ मेले में लाखों लोग आते हैं...प्रचार पर बहुत धन खर्च होता होगा। मालवीय जी ने बोले...प्रचार पर खर्च!केवल पच्चीस पैसे। विदेशियों को अचरज हुआ....केवल 25 पैसे! मालवीय जी का जवाब था...हां पच्चीस पैसे। पच्चीस पैसे के पंचांग में मेले की तिथि का जिक्र होता है और लाखों लोग उसी के आधार पर आ जाते हैं कुम्भ मेले में। तब से अब तक जमाना बहुत बदल गया। आज कल तो छोटे छोटे मंदिरो के कार्यक्रम के प्रचार के लिए हजारों हजार खर्च हो जाते हैं। नगर के विख्यात झांकी वाले बाला जी के मंदिर का वार्षिक उत्सव फरवरी में है। उस उत्सव के लिए नगर की हर गली,नुक्कड़,चौराहों पर बैनर,पोस्टर,होर्डिंग लगाए जा चुके हैं। इनकी संख्या इतनी है कि इनको गिनना मुश्किल है। इस पर हजारों.....[वैसे चर्चा ये है कि कई लाख रुपए] रुपए खर्च हो चुके हैं। यह खर्च किसी भी कम का नहीं । क्योंकि यह सामग्री फिर से काम आएगी नहीं। मतलब ये कि जो कुछ खर्च हुआ वह मिट्टी हो गया। इसमें कोई शक नहीं कि आज इस मंदिर के संचालकों के सूरत को देख खूब चंदा मिलता है। किन्तु उसका यह मतलब तो नहीं कि उसको मिट्टी कर दिया जाए। इस राशि से कोई भी ऐसी स्थायी जगह बनाई जा सकती है जो किसी गरीब के काम आए। गरीब परिवारों के लिए कोई कान्वेंट स्कूल खोला जा सकता है। गरीब परिवारों की लड़कियों के लिए रोजगार को कोई ट्रेनिंग सेंटर चल सकता है। और भी बहुत कुछ किस जा सकता है। कहीं और नहीं लगा सकते तो मंदिर का विस्तार कर अंधविद्यालय जैसे कोई प्रकल्प शुरू किए जा सकते हैं। वैसे भी शास्त्र कहते हैं कि नर सेवा नारायण सेवा... किन्तु कई लाख रुपए प्रचार में लगाकर मिट्टी कर देना तो किसी की सेवा नहीं,सिवाए पोस्टर,होर्डिंग बनाने वालों के। जिनको काम मिल जाता है। ऐसा नहीं है कि केवल लेखक को ही आप्ति है। चर्चा तो शहर में भी है मगर कोई बोल कर मंदिर संचालकों की नाराज नहीं करना चाहता।कुछ ये भी सोचते हैं कि धर्म का काम है...हम क्यों पाप के भागी बने। पोस्टर,होर्डिंग्स पर बाला जी छोटे हैं और कीर्तन करने वाले बड़े।कलयुग में भगत बड़ा हो ही जाता है। मंदिर नया हो तो प्रचार पर कुछ राशि खर्च करना जायज कही जा सकती है। इस मंदिर की मंडली तो दूर दूर तक पहुँच रखती है। प्रेस से लेकर पुलिस,बड़े बड़े व्यापारी,नेता सब इनके चरणों में शीश झुकाते हैं। शायद यही वजह है कि कोई इनसे किसी प्रकार का सवाल नहीं करता?जो करता है उसका इनका,इनके इनके चेलों का कोप भाजन बनना तय ही है। रामचरित मानस में तुलसी बाबा ने कहा है...परहित सरस धर्म नहीं भाई,पर पीड़ा नहीं सं अधमाई।

Saturday 14 January 2012

मेरा पहला लक्ष्य है साफ सुथरी राजनीति करना-अर्जुन मेघवाल



श्रीगंगानगर-अपनी वाणी से लोकसभा की मार्फत देश भर में पहचान बना चुके बीजेपी सांसद अर्जुन मेघवाल कहते हैं कि उनका राजनीति में आना एक संयोग मात्र है।संक्षिप्त इंटरव्यू में श्री मेघवाल ने कहा, कारण,वातावरण इस प्रकार बनता चला गया कि इसको ईश्वर का आदेश मान कर राजनीति में आ गया। क्योंकि वही सब कुछ करवाने वाला था। मकसद क्या होगा? सोचा नहीं था। आईएएस के रूप में नौकरी के छह साल बाकी थे। पूरा करना चाहता था। मैडम[वसुंधरा राजे] और ओम प्रकाश माथुर से बात हुई। नौकरी के बाद चुनाव लड़ने की बात उनके समक्ष रखी। तब मैडम ने कहा कि जो अब चुनाव जीतेगा वह टिकट लेने नहीं देगा। और हार भी जाएगा तो उसका हक आपसे पहले होगा। श्री मेघवाल ने कहा कि बस मैडम की यही बात अपील कर गई और राजनीति में आना तय हो गया। श्री मेघवाल के अनुसार तब श्री अशोक गहलोत ने भी उनसे इसी मुद्दे पर बात की थी। श्री मेघवाल के अनुसार एमपी का कैनवास एक आईएएस से काफी बड़ा होता है। आईएएस एक लिमिटेड क्षेत्र में ही काम,सेवा कर सकता है जबकि राजनीति सेवा के लिए बड़ा क्षेत्र उपलब्ध करवाती है। उन्होने कहा कि मेरा पहला लक्ष्य साफ सुथरी राजनीति करना है। अब तक के अपने राजनीतिक सफर को पूरी तरह संतोष जनक मानता हूं। किसी प्रकार का कोई आरोप अभी तक नहीं लगा है। अपने क्षेत्र में सांसद सेवा केंद्र चलाने वाला देश का पहला एमपी हूं। श्री मेघवाल ने बताया कि यह सेवा केंद्र हमेशा काम करता है। हर मतदाता कि छोटी से छोटी अर्जी पर कार्यवाही होती है। और इतना ही नहीं इसकी अर्जी देने वाले को सूचना तक दी जाती है। उन्होने बताया कि बीकानेर,दिल्ली,जयपुर में अलग अलग पीए हैं जो हर समय जनता के काम मे लगे रहते हैं। उन्होने कहा कि नौकरशाही लोकतन्त्र की भावना के अनुरूप होनी चाहिए। अच्छे जनप्रतिनिधि की बात नौकरशाही को हर हाल में सुननी चाहिए।श्री मेघवाल ने कहा कि नौकरशाही मुझे चकमा नहीं दे सकती। क्योंकि मैं जनता हूं कि सब काम कैसे करने है या करवाने हैं। श्री मेघवाल ने कहा कि वे ठीक 10.30 बजे लोकसभा पहुँच जाता हूं। समय पर आने वाले बहुत कम सांसद हैं। वे खुद कहते हैं कि चूंकि मैं एक बहुत अधिक सक्रिय सांसद हूं इसलिए मेरी जान पहचान भी बहुत अधिक है। कई बार किसी विषय पर पार्टी की ओर से तुरंत बोलना पड़े तो मैं संकट मोचक के रूप में काम में लिया जाता हूं। इस बात का मुझे गर्व है कि पार्टी मुझे इस काबिल समझती है। श्री मेघवाल के अनुसार राजनीति का बीज मेरे अंदर गंगानगर में 1991में श्याम चुघ ने डाला। तब में मण्डल अध्यक्ष थे। तब मेरे बच्चे छोटे थे। उसके बाद 1996 और 2003 में कोशिश की तो पार नहीं पड़ी। 2009 में ईश्वर ने यह चान्स दिया। ज्ञात रहे कि अर्जुन मेघवाल पहली बार सांसद बने हैं। इसके बावजूद वे ना केवल सांसदों बल्कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की निगाह में हैं। इसका कारण कि उनकी हर विषय पर गहरी पकड़। उनका अध्ययन। भाषण देने की शैली। और सबसे अधिक अपने काम के प्रति गंभीरता। यही वजह है कि आज उनको जानने वाले देश के हर क्षेत्र में हैं।

Friday 13 January 2012

गंगानगर पहला प्यार है,किन्तु चुनाव बीकानेर से लड़ूँगा-अर्जुन

श्रीगंगानगर-श्रीगंगानगर क्षेत्र मेरी कर्म स्थली और पहला प्यार है। लेकिन लोकसभा का चुनाव बीकानेर से ही लड़ूँगा। यह कहना है बीकानेर के मौजूदा बीजेपी सांसद अर्जुन मेघवाल का। वे बीजेपी के प्रहलाद टाक के निवास पर प्रेस से बात कर रहे थे। इस क्षेत्र में उनकी बढ़ती सक्रियता के मद्दे नजर उनके श्रीगंगानगर से लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा के तहत प्रेस ने उनसे यह इस बारे में पूछा था। श्री मेघवाल ने कहा, वे हर क्षेत्र के मुद्दे लोक सभा में उठाते हैं। इस कारण हर क्षेत्र में चुनाव लड़ने की चर्चा हो जाती है। उन्होने बताया कि 1974 में मैं टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में संगरिया में नौकरी शुरू की। उसके बाद से लगातार गंगानगर क्षेत्र से मेरा जुड़ाव रहा है। श्री मेघवाल ने कहा कि टिकट संसदीय दल तय करता है। सांसद ने कहा कि अगर ऐसा कोई मन होता तो मैं सारे कार्यक्रम छोड़ कर किसान सम्मेलन में भाग लेने आता। उनका कहना था कि मैं केवल इस क्षेत्र की ही समस्याएं उठता हूं,ऐसा नहीं है। देश में विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा के समय जो मुद्दा मेरे सामने आता है उसको लोकसभा में उठता हूं। मुद्दा उठाने का यह मतलब नहीं कि अर्जुन मेघवाल वहां से चुनाव लड़ेगा। उन्होने कितने ही मुद्दे गिनाए जो बीकानेर क्षेत्र के नहीं थे इसके बावजूद उन्होने लोकसभा में उनको रखा और फिर सरकार ने उन पर यथोचित कार्यवाही की। सांसद ने कहा कि वे राजनीति में मन,कर्म,वचन से ईमानदार रहने की कोशिश करते हैं। और उसमें कामयाब भी हुआ हूं। ज्ञात रहे कि वैसे तो श्रीगंगानगर क्षेत्र से कांग्रेस के भरत राम मेघवाल सांसद हैं। किन्तु सक्रियता के मामले में अर्जुन मेघवाल उनसे बहुत आगे हैं। इसलिए राजनीतिक क्षेत्र में यह चर्चा बहुत अधिक है कि इस बार अर्जुन मेघवाल बीकानेर की बजाए श्रीगंगानगर से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं।

Thursday 12 January 2012

अधूरा है राजस्थान का महिला आयोग,कई हजार केस पेंडिंग



श्रीगंगानगर-राजस्थान महिला आयोग के यहां कई हजार केस पेंडिंग हैं और अभी तक आयोग का पूरी तरह गठन भी नहीं हुआ है। आयोग की अध्यक्ष
प्रो लाड कुमारी जैन खुद स्वीकार करती हैं कि आयोग अभी अधूरा है। सर्किट हाउस में हुई वार्ता के दौरान प्रो जैन ने बताया कि अध्यक्ष,सचिव सहित कुल पांच सदस्य होने चाहिए। लेकिन अभी तीन सदस्यों की नियुक्ति की जानी है। उनके बिना आयोग ठीक ढंग से काम नहीं कर सकता। अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जल्दी ही सदस्यों के मनोनयन का भरोसा दिलाया है। प्रो जैन के अनुसार आयोग के पास लगभग 3500 हजार केस पेंडिंग हैं। 79 और आ गए। इस लिए हर रोज सुनवाई करने की योजना है ताकि पेंडिंग केसों की संख्या कम हो और पीड़ित को न्याय मिले। क्योंकि आयोग का अध्यक्ष ना होने के कारण सभी को तारीख पर तारीख ही दी जा रही थी। राजस्थान विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर लाड़ कुमारी जैन कहतीं है कि पद अधिक महत्वपूर्ण नहीं है उनके लिए। बस ये जरूर है कि कुछ नया और अधिक काम करने का अवसर मिला है। वह करके दिखाना है। अध्यक्ष ने कहा कि वे मन से महिलाओं के लिए काम करना चाहती है। सभी जिलों में एक्शन प्लान बनाना है। जिससे महिलाओं का शोषण किसी भी रूप में ना हो। राजस्थान की महिला नीति को रिव्यू किया जाना है। अध्यक्ष ने कहा कि उन्होने ज़िंदगी में कभी गलत बर्दाश्त नहीं किया। महिलाओं पर होने वाले अन्याय,शोषण के खिलाफ लड़ी। सबसे पहले 1987 में सती को महिमा मंडित करने से रोकने की लड़ाई लड़ी। उसके बाद पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इतने काम किए तभी तो सरकार ने यह ज़िम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर होने के बावजूद उन्होने कभी राजनीति में सक्रियता नहीं दिखाई। प्रो जैन के चेहरे पर अपने विचारों की दृढ़ता और आत्म विश्वास खूब झलक रहा था। उन्होने जो कुछ भी कहा वह पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ता से।

Monday 9 January 2012

बी डी की बड़ी किसान सभा ने नेताओं को हैरत में डाला




श्रीगंगानगर-क्षेत्र के अग्रवाल समाज में अपनी पैठ जमाने के बाद सोमवार को विकास डब्ल्यूएसपी के एमडी बी डी अग्रवाल ने किसानों के बीच भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करवाई। सर छोटू राम को श्रद्धांजलि देने के लिए श्रीअग्रवाल ने किसानों की बड़ी सभा आयोजित कर यह साबित कर दिया कि वे भी किसानों को एकजुट कर सकते हैं। नेता या कोई किसान नेता इस प्रकार की सभा उस जगह करवाना पसंद करता हैं जहां लोगों की भीड़ दिखे। किन्तु बी डी ने अलग हटकर उस जगह सभा की जहां कोई सोच भी नहीं सकता। शहर से दूर सभा में किसने क्या कहा,इसका उतना महत्व नहीं जितना ये कि उसमें कितनी संख्या में किसानों की भागीदारी रही। सभा में किसानों की संख्या के बारे में जैसे ही नेताओं को पता लगा उनके पास कहने को कुछ नहीं था। क्योंकि कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि एक अकेला बी ड़ी अग्रवाल किसानों को इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित कर सकता है। सर छोटूराम किसान समिति के कार्यकारी अध्यक्ष बी.डी. अग्रवाल ने कहा है कि वे और उनका पूरा परिवार किसानों की सेवा में समर्पित है और रहेगा। वे किसानों को पूरा हक दिलाने के लिए सदैव संघर्षरत रहेंगे। किसान अपने को इतना बुलंद करें कि भगवान खुद उससे पूछ कर उसकी किस्मत लिखे। अग्रवाल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ ने सरसों और अन्य जिंसों के भाव तय कर रखे हैं। किसानों को वह भाव नहीं दिए जा रहे हैं। इससे किसान का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा पहला लक्ष्य है डब्ल्यूटीओ के अनुसार किसान को उसकी उपज का न्यूनतम मूल्य मिले। अधिकतम मूल्य हम लेना जानते हैं। वह हम अपने आप ले लेंगे।सभा को जिला परिषद के सदस्य महेश बुडानिया,किसान नेता गुरबलपालसिंह संधू,पार्षद रमजानअली चोपदार, नत्थूराम सींवर, डॉ. सुखदेवसिंह, उदयपाल झाझडिय़ा, बालकिशन, अंग्रेजसिंह वाल्ला, अमरीककौर, कृष्ण सहारण, नत्थूराम सिंगला व विजेंद्र पूनिया ने भी संबोधित किया। मंच संचालन महेश गुप्ता ने किया।