Tuesday, 25 May, 2010

प्यारे मोहन छोड़ोगे कब

---- चुटकी----

राहुल के लिए
छोड़ सकता हूँ
अपना पद,
पर
प्यारे मोहन
ऐसा करोगे कब।

Saturday, 22 May, 2010

उफ़! चार साल है मेरे यार

केंद्र में श्री मनमोहन सिंह की सरकार एक साल की हुई।

---- चुटकी---

एक साल में
खूब पड़ी
महंगाई की मार,
पर अभी भी
चार साल
बाकी हैं
मेरे यार।

Friday, 21 May, 2010

कहानी इस बार लम्बी है

माननीय आई पी एस ........ जी नमस्कार। आप ज्ञानवान और बुद्धिमान हैं तभी तो आई पी एस हैं। छोटी उम्र में बड़ी सफलता मिलने पर थोड़ा बहुत अहंकार तो आ ही जाता है। अहंकार आते ही विवेक इन्सान के बस में नहीं रहता। हो सकता है यहाँ लिखे गए शब्द आपके व्यक्तित्व के अनुरूप ना लगे लेकिन क्या करें आपकी और मेरी मुलाकात ही ऐसे समय हुई जब आपके साथ आपका विवेक नजर नहीं आया। जिस समय मैने आपसे मिलने की अभिलाषा की उस समय आपने कुछ समय पहले गिरफ्तार किये व्यक्ति को अपने सामने अलफ नंगा खड़ा कर रखा था। मुझे किसी ने बताया नहीं,थाने में खुद देखा। आपने और आपके शागिर्द एक पुलिस वाले ने ऑफिस का दरवाजा बंद कर पर्दा लगा ये पक्का इंतजाम किया था कि आपके अलावा उसे कोई और ना देखे। लेकिन ऑफिस में चलने वाले पंखे के कारण सारा कबाड़ा हो गया। मैने भी उसको देख लिया। पता नहीं कानून की कौनसी धारा के तहत आपने उसको नंगा किया? साहब जी, आपने यहाँ तक आते आते बहुत सा ज्ञान अर्जित किया है,बहुत मोटी-मोटी हिंदी अंग्रेजी की किताबें पढ़ी हैं। क्या किसी किताब में ये ज़िक्र है कि अंग्रेजों के राज में किसी अंग्रेज अफसर ने किसी हिन्दुस्तानी को इस प्रकार से नंगा किया हो। कहीं तालिबान का राज भी रहा है,उनके बारे में भी ऐसा पढ़ने या सुनने में नहीं आया। लादेन का भी सिक्का चलता है मगर ये खबर तो नहीं आई कि वह अपने मुलजिमो को अपने सामने नंगा कर देता है। शायर रवीन्द्र कृष्ण मजबूर कहते हैं कि हट के दिया,हट के किया याद रहता है। इसलिए आँखों में अब भी वह बसा हुआ है जो ४५ घंटे पहले देखा था। क्योंकि वह हट के था। मुलजिम को अपने सामने नंगा करने का आपका तर्क भी हट के है। तब आपने कहा था कि ऐसा करने से मुलजिम दुबारा अपराध करने से डरता है। वह तो थाने में महिला सिपाही भी थी इस कारण से उसको घुमाया नहीं। साहब जी, आपको याद होगा, आपने कहा था कि आप कभी कभी नंगे मुलजिम की अपने मोबाइल फोन से तस्वीर भी ले लेते हैं। ताकि उसको यह कहकर डराया जा सके कि अगर दुबारा अपराध किया तो फोटो घर वालों को दिखा देंगे। मुझे याद है इसके बाद आपने ये कहा, किन्तु अभी तक ऐसा किया नहीं है। मैं फोटो डीलिट कर देता हूँ।
साहब जी, चूँकि ज्ञान, बुद्धि और संस्कार में हम आपका मुकाबला नहीं कर सकते इस वजह से ये तो नहीं जानते की आपने जो किया वह सही है या गलत हाँ इतना जरुर पता है कि किसी को किसी के सामने नंगा कर देने से बड़ी जलालत उस आदमी के लिए तो हो ही नहीं सकती। भारतीय संस्कृति में तो नंगा नहाना भी पाप है,किसी के सामने नंगा होना या किसी को अपने सामने नंगा होने के लिए मजबूर करना तो हट के है। आज आप आई पी एस हैं, वक्त आपके साथ है। जो करोगे सब कानूनन सही कहलायेगा। कल का क्या पता । वक्त किसी दूसरे के पास जा सकता है। मुलजिमो को दुबारा अपराध करने से रोकने के लिए बहुत कुछ है। आपकी फाइल मजबूत हो तो अपराधी सजा से बच ही नहीं सकता। किन्तु आपका तो अपराध समाप्त करवाने का नजरिया ही हट के है। ऐसे में किसी और कानून की तो जरुरत ही नहीं। आज आप उस पोजीशन में हैं जहाँ आप पर कोई पाबन्दी नहीं। कानून! कानून तो वही है जो आप कहें और जो आप करें। किस की मजाल जो आपके हुकम की पालना में जय हिंद ना कहे। मजबूर के ही शब्दों में "कहने को तो सब कुछ कह डाला,कुछ कहते हैं कुछ कह नहीं सकते।" आप मुझे अपना तो मान ही नहीं सकते। इसलिए आपका गोविंद गोयल लिखना तो ठीक नहीं।
चुनांचे केवल -गोविंद गोयल
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यह श्रीगंगानगर में नियुक्त एक आई पी एस को समर्पित है।

Thursday, 20 May, 2010

अँधेरा है,रोशनी नहीं है


अँधेरे का अपना
कोई
अस्तित्व नहीं है,
बस,
रोशनी नहीं है
इसलिए अँधेरा है,
वरना तो
जिधर देखो
उधर
सवेरा ही सवेरा है।

Wednesday, 19 May, 2010

तुम क्या हो,कौन हो


मैं नहीं जानता
तुम क्या हो और
क्या बनना चाहते हो,
लेकिन तुम से
इतना अवश्य कहूँगा
तुम जो हो वही रहो
वो बनने की कोशिश
मत करो
जो तुम नहीं हो,
कहीं ऐसा ना हो कि
भविष्य का कोई झोंका
तुम्हारे वर्तमान अस्तित्व
कि मिटा दे,और
बाद में तुम
अपने अतीत को
याद करके अपनी
करनी पर पछताते रहो।

Saturday, 15 May, 2010

कौन बताएगा जात

---- चुटकी----

ना
बनी नहीं
ये बात,
जनगणना में
कौन बताएगा
नेताओ की जात।

कुछ पाने के लिए बहुत खोया


ठीक है कुछ पाने के लिए
कुछ ना कुछ
खोना ही पड़ता है,
मगर ये नहीं जानता था कि
मैं, कुछ पाने के लिए
इतना कुछ खो दूंगा कि
मेरे पास कुछ और पाने के लिए
कुछ भी तो नहीं बचेगा,
और मैं थोडा सा कुछ
पाने के लिए
अपना सब कुछ खोकर
उनके चेहरों को पढता हुआ
जो मेरे पास कुछ पाने की
आस लिए आये हैं,
लेकिन मैं उनको कुछ देने की बजाए
अपनी शर्मसार पलकों को झुका
उनके सामने से
एक ओर चला जाता हूँ
किसी और से
कुछ पाने के लिए।

Friday, 14 May, 2010

आता है एक व्यापारी

---- चुटकी----

हमारी गली में
एक व्यापारी
आता है,
खुशियों के बदले
सबके
गम ले जाता है।

सौदा घाटे का
करता है,
मगर खाते में
मुनाफा दिखाता है,

Thursday, 13 May, 2010

तुम्हारी किताब की किस्मत

मुझसे अच्छी है तुम्हारी इन
किताबों की किस्मत
जिन्हें हर रोज तुम
अपने सीने से लगाती हो,
मेरे बालों से भी
अधिक खुशनसीब हैं
तुम्हारी किताबों के पन्ने
जिन्हें तुम हर रोज
प्यार से सहलाती हो,
मेरी रातों से भी हसीं हैं
तेरी इन किताबों की रातें
जिन्हें तुम अपने
पास सुलाती हो,
इतनी खुशनसीबी देखकर
तुम्हारी इन किताबों की
मेरी आँखे सुबह शाम
बार बार बस रोती हैं,
क्योंकि हर नए साल
तुम्हारे सीने से लगी
एक नई किताब होती है,
और वो पुरानी किताब
पड़ी रहती है
अलमारी में एक तरफ
गोविंद की तरह
इस उम्मीद के साथ कि
एक बार फिर उठाकर
अपने सीने से लगा लो
शायद तुम उस किताब को ।

Wednesday, 12 May, 2010

एक्स्ट्रा प्लेयर की एक्स्ट्रा इनिंग

आज एक ऐसा काम करना पड़ा जो मैं समझता था कि मुझे नहीं करना पड़ेगा।तीस साल पुराने मित्र को अपने कंधे पर वहां सदा के लिए छोड़ आया जहाँ जाना कोई नहीं चाहता लेकिन जाना सबको पड़ेगा। बात १९८० के आस पास की है।हरी किशन अग्रवाल उम्र में मुझसे कोई पांच साल छोटा था। दोस्ती हुई, ना जाने कैसे हमारे ग्रुप में उसका नाम एक्स्ट्रा प्लयेर हो गया। इंजीनियर बनना चाहता था, मगर सफलतम कारोबारी बन गया। बीज के कारोबार में उसने वह तरक्की की जो लोग कई दशक तक नहीं कर सकते। तीस साल में कभी उसको गुस्सा करते नहीं देखा। कोई दोस्त नाराज होता तो बस मुस्कुरा कर उसकी नाराजगी दूर कर देता।१०-११ मई की रात को पंजाब में एक सड़क दुर्घटना ने उसकी जान ले ली। आज उसके दस साल के लड़के ने सफ़ेद धोती बांध कर अंतिम क्रिया करवाई तो दिल के जैसे टुकड़े टुकड़े हो गए। आँख से आंसू तो नहीं निकले लेकिन रोम रोम अन्दर से रो रहा था। इसकी तो कल्पना ही नहीं की थी कि ऐसा देखना पड़ेगा। उम्र तो मेरी अधिक थी चला वह गया। उसकी मौत के समाचार से लेकर अब तक आँखों में बस उसी और उसीके साथ बिताये पलों का स्लाइड शो चल रहा है। हालाँकि वह हमारे ग्रुप का एक्स्ट्रा प्लयेर था, इसके बावजूद वह अपनी इनिंग खेल कर चला गया। इनिंग भी शानदार,जानदार दमदार।
एक बार मैंने उसके घर फोन किया, उसकी मम्मी ने फ़ोन उठाया। मैंने कहा,आंटी हरी से बात करवाना। आंटी ने कहा-हरी तो गोविंद के साथ फिल्म देखने गया है। मैंने बताया कि मैं गोविंद ही बोल रहा हूँ। तब आंटी को गुस्सा आया और मुझे हंसी। शाम को जनाब मिले, उससे कहा भई तूने फिल्म जाना था तो मुझे बता तो देता ताकि तेरा झूठ सच बना रहता। आज भी यह बात हम लोग भूले नहीं हैं। मगर अब वह नहीं जिसके साथ इस बात को लेकर चुहल बाजी किया करते थे। उसके दो मासूम लड़कों को देखने की हिम्मत नहीं हुई, उनसे बात करने का हौसला तो होते होते ही होगा।

Sunday, 9 May, 2010

माँ सा कोई नहीं


माँ! क्या है माँ? कौन होती है माँ? कैसी होती है माँ? इन प्रश्नों के उतर हर किसी ने अपनी समझ से दिए है। कोई कहता है कि माँ एक सीप है जो अपनी संतान के लाखो रहस्य सीने में छुपा लेती है। माँ ममता की अनमोल दास्ताँ है। जो हर दिल पर अंकित है। भगवान कहता है कि माँ मेरी ओर से मूल्यवान और दुर्लभ उपहार है। इसके कदमो में स्वर्ग है। मै भी इसके आगे नत मस्तक हूँ । हर संतान को माँ की ममता नसीब है।
माँ वो है जिसने नो माह गर्भ में रखकर हमे मानव का रूप दिया। जिसने पंचतत्व से बने शरीर में जान डाली। जिसने दूध पिलाकर हमे बड़ा किया है। हमारी हर गलती पर हमे समझाया है। हमने चाहे उसे दुःख दिया पर उसने हमे हमेशा सुख दिया। हमारे दुखो को उसने अपनी खातिर मांग लिया। वो हमारी प्रथम गुरु बनी। हमे बोलना सिखाया। हमे संस्कार दिए, संसार में जीने लायक बनाया। कहानी, लोरी सुनकर हमे ज्ञान दिया। माँ की महिमा को हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते। उसने हमे इतने उपहार दिए जिसकी गिनती मुश्किल है। हमे व्यंजन देकर खुद रुखा सुखा खाया।
जिस व्यक्ति को जीवन में माँ का प्यार मिले आशीर्वाद मिले वो किस्मत वाले होते है। माँ के बारे में लिखे तो शब्द कम पद जाते है। कितना भी लिख ले लगता है कि अभी तो कुछ लिखा ही नहीं। उसकी सहनशीलता, ममता , प्यार, दुलार, दया, तपस्या, अनुराग, वात्सल्य, स्नेह, संस्कार, के बारे में तो हम लिख ही नहीं पाए। शायद कभी लिख भी नहीं पाएंगे। क्योंकि इन शब्दों को न तो परिभाषित किया जा सकता है और न ही इनका वर्णन किया जा सकता है। माँ से जुड़े ये सारे शब्द माँ के बारे में सिर्फ एक ही बिंदु बता पते है। माँ शब्द फिर भी अनसुलझा रह जाता है। जिस शब्द की व्याख्या भगवान भी न कर सका, उस शब्द की व्याख्या करने की कोशिश हमे बेकार मालूम पड़ती है। हम तो सिर्फ उस माँ के चरणों में शत शत प्रणाम करते है। हम उसे कुछ और तो डे नहीं सकते सिर्फ मदर्स डे के रूप में अपने साल का एक दिन उसे जरुर डे सकते है। अपनी कृतज्ञता माँ को प्रकट कर सकते है। मदर्स डे पर माँ को हमारा कोटि कोटि प्रणाम। अभी भी एसा लग रहा है मानो कुछ लिखा ही नहीं। माँ के बारे में लिखने के लिए शब्द ही नहीं। असंख्य शब्दों का ज्ञाता भी माँ के बारे में लिखते समय शब्द विहीन सा हो जाता है। अंत में सिर्फ इतना ही-जिंदगी में खुशिया भर देती है माँ , हमारे ख्वाबो को हकीकत बनाती है माँ, बेनूर जिंदगी को महकाती है माँ, पथरीले पथ पर चलना सिखाती है माँ।
मेरे ताऊ जी हॉस्पिटल में हैं। इस कारण पापा व्यस्त हैं। uनके व्यस्त होने के कारण आज मुझे इस पोस्ट लिखने का मौका मिला। गलतियाँ होंगी ही।क्योंकि इस से पहले मैंने ब्लॉग पर कभी पोस्ट लिखी ही नहीं। इसलिए क्षमा चाहती हूँ। मै स्वाति, गोविंद गोयल की छोटी बेटी हूँ ।

Thursday, 6 May, 2010

देश का दामाद

----चुटकी----

हमारे धर्मनिरपेक्ष
नेताओं को
आदाब,
कसाब भी
बन गया
अफजल की भांति
देश का दामाद।

जीवन का सार

---- चुटकी----

सर्दी
प्रचंड गर्मी
आंधी
फिर
बरखा बहार,
मानो ना मानो
यही है
हमारे
जीवन का सार।

Wednesday, 5 May, 2010

डोंट वरी,बी हैप्पी

----चुटकी----

हमारे नेता हैं
बच्चो
बड़े कमाल के,
अफजल की भांति
कसाब को

रखेंगें
संभाल के ।

Tuesday, 4 May, 2010

---- चुटकी---

पहले अफजल
अब कसाब,
आप इनका
करोगे

क्या जनाब।