Wednesday, 14 October, 2009

हम तो बजा रहे हैं बीन

---- चुटकी----

तेरी जो मर्जी हो
वो कर ले चीन,
हमारी ओर से
डोंट वरी
हम तो
बजा रहें हैं बीन।

9 comments:

Udan Tashtari said...

आगे भी बजाते रहेंगे हम बीन...
प्लीज़ चीन, डोन्ट बी सो मीन...

-अपना काम जारी रक्खो, चीन!!

ePandit said...

बजा रहे हैं बीन, देख रहे हैं तमाशा।
चाहे ले जा सिक्किम चाहे अरुणाचल चाहे ल्हासा।

Murari Pareek said...

बिन की तान में खो रहे है|
बेशुध हो के शो रहे हैं!!

संगीता पुरी said...

बीन तो वो बजा रहे हैं .. यहां भैंस पगुरा रही है !!

पी.सी.गोदियाल said...

एकदम सही बजाई आपने नारद जी !

bebakbol said...

हम यूँही बजाते रहेंगे बीन
चाहे सब ले जाये चीन...

shikha varshney said...

सही कहा..चाहे सब ले जाये चीन...हम तो यूँ ही बजायेंगे बीन.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

यही हमारा धर्म है..जिसे कि हम बखूबी निभाए जा रहे हैं!!

संजय भास्कर said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें



बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com