Tuesday 30 September 2008

धर्मनिरपेक्षता या भ्रम

----चुटकी----
चर्च पर हमला
रास्ट्रीय शर्म
संसद और मन्दिर
पर हमले उनका धर्म,
ये धर्मनिरपेक्षता है या
कोई राजनीतिक भ्रम।
---गोविन्द गोयल

टॉम एंड जैरी

---चुटकी---
नेता आतंकवादियों के
हमदर्द और
सरकार बहरी है,
पुलिस हमारी टॉम
आतंकवादी जैरी है।
----गोविन्द गोयल श्रीगंगानगर

Monday 29 September 2008

जवाब नेता देंगें

----चुटकी----
बम ब्लास्ट के बारे में
पुलिस से
मत मांगों कोई जवाब,
क्योंकि आतंकवादियों के
प्रवक्ता तो
हमारे नेता हैं जनाब।
-----गोविन्द गोयल

Sunday 28 September 2008

शालीनता हो तो सोने पर सुहागा

ब्लॉग कोई छोटी मोटी बात नहीं है। इसके द्वारा न केवल हम अपने दिल की बात अनगिनत लोगों तक पहुँचा पाते हैं बल्कि इसके साथ साथ दूसरों के पक्ष भी जानने को मिल जाते हैं। इसका कारण है ब्लोगर्स का अनुभव,शिक्षा,अपने सब्जेक्ट की जानकारी। इन सबके चलते जब वह कोई बात लिखता है तो उसमे कुछ न कुछ तो दम होता ही है। कुछ होगा तो उसको बच्चे भी रीड करेंगें,महिलाएं भी और लड़कियां भी। क्योंकि इन्टनेट इनकी पहुँच से दूर नहीं है। लेकिन ये सब क्या अश्लील शब्दों का भेद जानने उनको जीवन में,रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल करने के लिए ब्लॉग विजिट करेंगे। किसी ने कहा है --"अपना किया ही उम्र भर पाता है आदमी, फ़िर भी खुदा का नाम उठाता है आदमी।" एक और तो ब्लॉग के माध्यम से हिन्दी का महत्व अधिक करने की बात की जाती है दूसरी तरफ़ अश्लील शब्दों की भरमार रहती है। कोई टिप्पणी में लिखता है, कोई अपने ब्लॉग पर। हिन्दी में शालीन शब्दों की ना तो कोई कमी है और ना ही उन शब्दों का प्रयोग करने से किसी की बात का वजन कम होता है। अगर शब्द गरिमामय होंगें तो उससे ब्लॉग लेखक से अधिक लोग प्रभावित होंगे। अश्लीलता के तलबगार भी अपने ही हैं। मगर ये तय है कि इस बारे में किसी ने कुछ लिखा नहीं होगा। कई तो ऐसे "देवता" हैं जो अश्लील शब्द जरुर लिखेंगें, उन्होंने इन शब्दों को अपनी पहचान बना लिया है। उनके संस्कार ही ऐसे हैं या वो ऐसा जानबूझकर करतें हैं पता नहीं। बहुत से ब्लोगर्स ऐसें भी हैं जो बाकायदा सुझाव,राय देतें हैं मार्गदर्शन करते हैं। एक ने लिखा था कि एक पेज लिखने से पहले १०० पेज रीड करने की बात अनुभवी व्यक्ति किया करते हैं। जबकि आज हालत ये है कि १०० पेज लिखने के लिए तो टाइम है लेकिन एक पेज रीड करने के लिए नहीं। जब स्थिति ये है तो फ़िर जानदार और शानदार शब्दों की उम्मीद की भी कैसे जा सकती है। सच कहा है किसी ने--रास्ता किस जगह नहीं होता,सिर्फ़ हमको पता नहीं होता। बरसों रुत के मिजाज सहता है,पेड़ यूँ ही बड़ा नहीं होता।" जब हमने पेड़ बनना है तो फ़िर थोड़ा सा तो वैसा होना ही पड़ेगा। हो सकता है अधिकतर ब्लोगर्स मेरे इस मत से सहमत नहीं हों,सम्भव है वे अपना मत भी ना प्रकट करें परन्तु मेरी उनसे यही विनती है कि वे अपने लेख और टिप्पणी में शब्दों की गरिमा के साथ साथ ब्लोगर्स की गरिमा भी अपने दिल में रखें।

ब्लोगर्स के लिए

दुनिया में ऐसे सज्जनों/सज्जनियों की कमी नहीं है जिनकी कोई सुनता नहीं। वे कुछ कहना चाहते हैं लेकिन अफ़सोस कि कोई सुनने वाला होता ही नहीं। अब बात तो कहनी ही है, नहीं कहेंगें तो दिमाग की नसें फटने का डर रहता है। अब ऐसा होने की संभावना कुछ कम इसलिए हो गई क्योंकिं ऐसे लोगों/लुगाइयों को एक माध्यम मिल गया अपनी भड़ास निकालने का। यहाँ भी समस्या कम नहीं है। अब हमने अपनी बात तो लिख दी। अब यह उम्मीद रहती है कि कोई कहे "वाह क्या बात है"। "बहुत खूब"। सब ऐसा चाहते हैं। कई तो टिप्पणी के साथ बाकायदा लिखते हैं "आप भी हमारे ब्लॉग पर आना"। "हमने दस्तक दी है, आप भी देना"। एक ने तो साफ साफ लिखा " हमें भी आपकी टिप्पणी का इन्तजार है"। एक का कहना था " मैंने आप के ब्लॉग पर टिप्पणी लिखी है आप भी लिखना"। जब हमारी हालत ये है तो फ़िर ये कहना ठीक रहेगा चुटकी के रूप में --
आ रे मेरे
सप्पन पाट,
मैं तैने चाटूं
तू मैंने चाट।
आप मेरी जय जय कार करो मैं आपकी।

Saturday 27 September 2008

कर्म करो

--- चुटकी ----
आंसू मत बहाओ
उठो,कर्म करो,
इस उम्र में
अधर्म नहीं
धर्म करो।
---गोविन्द गोयल

कलयुग की बात

---- चुटकी ----
अर्जुन अधर्म
के साथ है,
डोंट वरी
यह
कलयुग की बात है।
---गोविन्द गोयल

पाक की पहरेदारी

--- चुटकी ---
सारा पर सारा का सारा
फिसल गया जरदारी,
ऐसे लोग
क्या खाक करेंगें
पाक की पहरेदारी।
----गोविन्द गोयल

Friday 26 September 2008

बीआरपी के लिए

जिस प्रकार से न्यूज़ चैनल वाले टीआरपी के लिए मरे जा रहें हैं यही हाल ब्लॉग वालों का हो चुका है। टीवी की टीआरपी है तो ब्लॉग की बीआरपी। अब टीवी वाले क्या करतें हैं वही ब्लॉग लेखक करें तो क्या कहने। मसलन लड़कियों के बारे में ऐसी ऐसी कहानियाँ लिखो कि ब्लॉग पर दस्तक देने वाले को यूँ लगे जैसे वह कोई नीली फ़िल्म देख रहा हो। [तड़का लगाने के लिए केवल अधोवस्त्र पहने लड़की के फोटो डाले जा सकते है।] ख़ुद के साथ ऐसी कहानी जोड़ दो तो कुछ अलग बात हो। किसी बड़े से बड़े नेता, अभिनेता,पत्रकार, अभिनेत्री के बारे में लिख दो कुछ चटक मटक वाला, फ़िर देखो बीआरपी कैसे ऊपर जाती है। ख़ुद न लिखो तो जिसने लिखा है उसकी बखिया खोल दो और खुलवा दो अपने मित्रों से । अपने निजी संबंधों को ब्लॉग में उजागर करो फोटो सहित। अगर आप थोड़े बहुत जाने माने आदमी है तो और भी अधिक आसन है बीआरपी को ऊपर लेकर जाना। ब्लॉग पर जितनी अधिक मिर्च मसाले का तड़का होगा उतनी अधिक होगी बीआरपी। उसके बाद चैनल से मुकाबला होगा। जिस प्रकार टीआरपी एक ख़बर होती है उसी प्रकार बीआरपी भी ख़बर हुआ करेगी। महिलाएं अपने ब्लॉग पर तड़फ,विरह ,प्रेमरोग से ओत प्रोत शेरो शायरी लिख सकतीं हैं।[ खुले बाल उदास चेहरे की फोटो जलती हुई मोमबत्ती के साथ हो तो सोने पर सुहागा।] बी आर पी इतनी ऊपर जायेगी कि ब्लॉग लेखक को संभालनी मुश्किल हो जायेगी। भूतप्रेत,चमत्कार,टोने टोटके जो भी उलूल जलूल हो बस ब्लॉग में भर दो कौन से दाम लगते हैं। हमें तो अपनी बीआरपी से मतलब है। जब न्यूज़ चैनल वाले,जो हर घर में दस्तक देते हैं, कुछ भी दिखा सकते हैं तो ब्लॉग लेखक को क्या? तो आज से , आज से क्यों अभी से शुरू हो जाओ फ़िर देखो आप बीआरपी की किन बुलंदियों को छूटें है। ओके आल दी बेस्ट ।

टूट गई आस

--- चुटकी ---
मर्जी के मंत्रालय
नहीं मिले तो
टूट गई आस,
इसलिए आ गई
कांग्रेस और सपा के
रिश्तों में खटास।
-----गोविन्द गोयल

Thursday 25 September 2008

मायावती बने पीएम

videoसमय कब किस वक्त बदल जाए कौन जानता है। जो कुंवर नटवर सिंह कभी सोनिया गाँधी की आंखों का तारा हुआ करते थे वही आज उनके खिलाफ बोलने को मजबूर हैं। वह भी बीएसपी की सभा में। कांग्रेस के सालों साल तक नेता रहे नटवर सिंह ने आज श्रीगंगानगर में बीएसपी की सभा में कहा कि अब बहिन मायावती को देश की प्रधानमंत्री बनाना है। कई दल ऐसा नहीं होने देना चाहते लेकिन देश की जनता चाहती है कि मायावती प्रधानमंत्री बने। नटवर सिंह ने अपनी पूर्व नेता सोनिया गाँधी का नाम लिए बिना कहा कि एक विदेशी महिला बैठी है कांग्रेस की छाती पर जो हमें मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के कई videoशहरों में बम ब्लास्ट हुए लेकिन उत्तर प्रदेश में कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार से हिसाब माँगा जाएगा। आरम्भ में उन्होंने डॉक्टर अम्बेडकर और काशी राम के चित्रों पर माल्यार्पण किया। बीएसपी नेताओं ने उनका भावभीना स्वागत किया। उनके साथ उनके बेटे जगत सिंह भी थे। हालाँकि उनके आने का कोई प्रचार नहीं किया गया इसके बावजूद कई हजार लोग उनको सुनने के लिए आए। वे स्पेशल विमान से श्रीगंगानगर आए थे। शाम को वे उसी विमान से वापिस लौट गए। लालगढ़ हवाई पट्टी पर उनको विदा करने वाले केवल दलीप सहारण,मुरारीलाल सोनी और अप्पू थे। इन्होने नटवर सिंह और जगत सिंह को माला पहनाई। कुंवर नटवर सिंह ने इनसे बात की और आभार जताया। बीएसपी का कोई लीडर हवाई पट्टी पर नजर नही आया।

एक बार की बात है...

एक बार की बात है श्रीगंगानगर में एक नेता हुआ करता था। आर्थिक रूप से बहुत कमजोर वह नेता आम जन के लिए बहुत उपयोगी था। कुछ नहीं था फ़िर भी उसके यहाँ कम करवाने वालों की भीड़ लगी रहती थी। वह जाने माने राज नेता भैरों सिंह शेखावत का भी खास था। १९९३ में उसने श्रीगंगानगर से जनता दल की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा। मगर बहुत कम वोट से हार गया। इस चुनाव में भैरों सिंह शेखावत तीसरे स्थान पर रहे। हारने के बाद भी जनता का उस नेता से और नेता का जनता से मोह भंग नही हुआ। दोनों का प्रेम बना रहा। पॉँच साल गुजर गए। विधानसभा के चुनाव में इस बार नेता जी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। जनता फ़िर साथ लगी। इस बार भी कम अन्तर से नेता जी विधायक बनने से रह गए। खैर वक्त ने तो बीतना ही था, सो बीता। २००३ में फ़िर विधानसभा चुनाव आए। इस बार नेता जी के हाथ में बीजेपी की टिकट थी। जनता इसके पीछे पागल हो गई।नेता जी को रिकॉर्ड मतों से जीता कर विधानसभा भेजा। बस तब से नेता जी का हाजमा बिगड़ गया। जो मित्र घर का खर्च वहां करते थे उनसे लेकर आम जन तक से व्यवहार करने का उनका स्टाइल बदल गया। अपने साथी नेता पर जान लेवा हमला करवाने की शाजिश रचने के आरोप में न्यायिक हिरासत में भी रहा। इस मामले का मुख्य आरोपी तो अभी तक फरार है जो नेता जी का पीए था। और भी ना जाने क्या क्या हुआ। श्रीगंगानगर की जनता नेता जी से दूर और बहुत दूर हो गई। आज अखबार में नेता जी कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी के साथ खड़े हुए थे। वे अब इस बार का चुनाव कांग्रेस की टिकट पर लड़ने के मूड में हैं। पता नहीं वहां की जनता का क्या होगा जहाँ से ये चुनाव लडेंगें। राजस्थान के निवासी तो इस नेता जी को जान ही गए होंगें बाकी भी थोडी देर में जान जायेंगें। जिसने दुःख दर्द में नेता जी का साथ दिया नेता जी उनके ही नहीं हुए तो कांग्रेस के क्या होंगे जिसकी तमाम उमर उन्होंने खिलाफत की है। आदरणीय,सुबह सुबह स्मरणीय, पूजनीय,इस नेता का नाम है श्री श्री सुरेन्द्र सिंह राठौर । जब २००३ में ये चुनाव जीते तब जन जन को ऐसा लगा जैसे श्रीगंगानगर को लम्बी काली रात के बाद भोर का उजाला नसीब हुआ हो। तब कोई क्या जानता था कि रात और काली होने वाली है। चलो जो कुछ हुआ उस से कांग्रेस की नेता सोनिया जी को क्या सरोकार हो सकता है। उन्होंने तो राजनीती करनी है। उनकी बला से किसी के भी सपने खाक में मिले उनको क्या। यही तो है "राजनीती" जिसमे नीति तो गायब हो गई बस राज रह गया। राज करना है राज से।

Wednesday 24 September 2008

बोलते हो तो कुछ करो भी

"आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता" "आतंकवादियों की कोई जाति नहीं होती ............"। जैसे बयान हर रोज़ आते है। जितना बड़ा नेता उतना बड़ा बयान। जब ऐसा है तो फ़िर उनको पुचकारने,उनके लाड करने की जरुरत क्या है। क्यों उनके धर्म या जाति से जुड़े वोट बैंक की चिंता की जाती है।उनके खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार के अन्दर और बाहर के नेता हांफने क्यों लगते हैं। तुम ख़ुद कहते हो कि इनका कोई धर्म और जाति नहीं है फ़िर इनके खिलाफ ठोस कार्यवाही क्यों नहीं होती। आतंकवादी जब चाहे जहाँ चाहे धमाके करते हैं और हमारे नेता कपड़े बदल बदल कर बयान देने के अलावा कुछ नहीं करते। अगर इन नेताओं को केवल इनके ही वोट चाहिए तो फ़िर साफ कहें ना कि हम तो कुर्सी के लिए कुछ भी कर सकते हैं आप जानो आपका काम। कितने अफ़सोस की बात है कि हिन्दुओं की बात करने वाला तो साम्प्रदायिक कहा जाता है और इन आतंकवादियों का पक्ष करने वाला महान धर्मनिरपेक्ष। आज तक कोई बता नहीं सका कि यह कैसी धर्मनिरपेक्षता है। इस थोथी और वोट बैंक बनाये रखने के लिए तन पे लपेटी गई धर्मनिरपेक्षता ने देश का बंटा धार कर दिया है। हिन्दुस्तान में इन सबके पक्ष में बोलने वाले तो सभी हैं मगर ऐसा कोई नहीं जो उन लोगों की बात करें जो हिंदू कहलाते हैं। देश के नेता गाँधी जी की कोई और बात माने या न माने मगर "एक गाल पर कोई चांटा मारे तो दूसरा गाल भी आगे कर दो" वाली बात पर हर रोज़ अमल करते हैं। दूसरा गाल नहीं अपना देश तक उनके हवाले करने को तैयार हैं। मीडिया कौन सा कम है। बात करतें हैं न्याय की। करनी भी चाहिए। लेकिन न्याय तो वह होता है जिसमे सबको एक समान समझा जाता है। जिसको पाने के बाद सभी पक्ष न्याय करने वाले की बल्ले बल्ले करतें हैं। पता नहीं यह सब कब तक चलेगा। हिंदुस्तान कब हिन्दुस्तानियों का होगा। जब तक वोटों की राजनीति के चक्कर में किसी खास वर्ग जाति,धर्म को खास महत्व दूसरों के हितों को नकार कर दिया जायेगा। तब तक आतंकवाद को दौर थमेगा इस में संदेह है।

गलती सुधारो

---- चुटकी ----
सर जी गलती सुधारो
एक के बदले चार मारो
वरना सब कुछ
हाथ से निकल जाएगा,
भारत में खालिस्तान
तो नहीं बना हाँ
पाक जरुर बन जाएगा।
-----गोविन्द गोयल

Tuesday 23 September 2008

जख्म गहरा है


--- चुटकी ---
नवजोत सिद्धू जरुरत से
कुछ ज्यादा ही हँसता है,
अन्दर का जख्म बहुत
अधिक गहरा लगता है।
------गोविन्द गोयल

अब बस करो


भारत के वाइस प्रेजिडेंट रहे और जाने माने राजनेता श्री भैरों सिंह शेखावत का अपना एक वजूद है। शायद ही कोई ऐसी राजनीतिक पार्टी होगी जिसमे श्री शेखावत को चाहने वाले न हों। ऐसा इसलिए कि वे रिश्तों को निभाने में माहिर हैं। श्रीगंगानगर से उन्होंने १९९३ का विधानसभा चुनाव लड़ा था। वे वह चुनाव बुरी तरह हारे। वे किसी भी पद पर रहे,जिसको अपना कहा उसके साथ हर समय खड़े नजर आए। अब उनके राजनीति में एक्टिव होने की चर्चा पर बहस छिडी हुई है। इस में कोई शक नही कि श्री शेखावत जैसे इन्सान निष्क्रिय होकर घर बैठने वालों में से नहीं है। मगर वाइस प्रेजिडेंट रहे किसी नेता का फ़िर से राजनीति में आना वाइस प्रेजिडेंट पद की गरिमा को तो आहत करेगा हीश्री शेखावत का मान सम्मान भी कम होगा। श्री शेखावत जी आपने वह सब कुछ पा लिया जो आपने कल्पना भी नहीं की होगी। अब क्या ऐसा रह गया जिसके लिए अपना बुढापा ख़राब करने की नोबत आ गई। सच है कि राजनीति में पद कि चाहत कभी ख़त्म नहीं होती मगर कोई लकीर तो आप जैसे सीनियर को लगानी चाहिए। ये नहीं कहते कि आपके आराम करने के दिन है,आप जैसे घर आराम करेंगें तो तो देश को सही दिशा कौन देगा। किंतु अब आप राजनीति में कुछ पद पाने की बजाये उसको साफ सुथरा करने का अभियान चलायें। कुछ ऐसा करें जिस से नेताओं के प्रति जन जन का खोया विश्वास फ़िर लौटने लगे। आप इस बात को जानते है कि नेताओं के प्रति आवाम की भावना कैसी है। आप शक्तिशाली है,आपका नेटवर्क है,जन जन आप पर विश्वास करता है,आपके लिए अब हर पद छोटा है आप का कद बहुत ऊँचा है उसको किसी पद में बाँध कर उसको दायरे में मत रखना। अभी तो आपने अपनी जुबान से कुछ कहा ही नहीं कि अफसाने शुरू हो गए। आपके आने से किसको कितना नफा नुकसान होगा ये तो समय बताएगा किंतु ये तय है कि इस से भैरों सिंह शेखावत की वो बात नहीं रहेगी जो अब तक है। साहब जी जिंदगी में पाना ही सब कुछ नहीं होता,त्याग का भी अपना महत्व है । ऐसा नहीं हैं कि आप इन बातों को नहीं जानते,आप जानी जान हैं। हमसे अधिक अनुभव और ज्ञान आपके पास है। अगर आप ने राजनीति में आना है तो हमारे कहने से रुकने वाले नही और नहीं आना तो किसी के कहने से आने वाले नहीं। आप को आप से ज्यादा और कौन जानता है। [फाईल फोटो]

Monday 22 September 2008

शोक के बहाने

---- चुटकी----
मंत्री जी का मर गया डॉग
सूरत दिखाने के बहाने
शोक मनाने
आए हजारों लोग,
एक दिन मंत्री जी चल बसे
अब कौन मनाये शोक?
--गोविन्द गोयल

सपेरे को काटा

---चुटकी---
ओह!आह!हाय रे!
ये क्या गजब
हो गया पाक में ,
सपेरे को ही
काट खाया
काले नाग ने ।


Sunday 21 September 2008

धर्मेन्द्र के इलाके से

videoसिने स्टार सांसद धर्मेन्द्र के इलाके के कई किसान आज लगभग ४५ फ़ुट ऊँची पानी की टंकी पर चढ़ गए। वे अपने लिए वीरू स्टाइल में बसंती की मांग नही कर रहे थे । वे तो अपने गाँव को सिंचाई पानी देने की मांग कर रहे थे। इन किसानों के गाँव का नाम है जीवनदेसर। इनके बिल्कुल निकट से नहर निकलती है उसमे पानी तो होता है मगर इनके गाँव की जमीन को नही मिलता। इसी मांग को लेकर इन गाँव वालों ने २००४ के लोकसभा चुनाव में वोट भी नहीं डाले थे। गाँव वाले एक पखवाडे से जिला कलेक्टर के गेट के आगे धरने पर बैठे हैं महिलाएं भूख हड़ताल कर रहीं हैं। अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। आज तंग आकर चार किसान टंकी पर चढ़ गए। टंकी के नीचे बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरूष अपनी मांगों के लिए नारे बाजी कर रहें हैं। प्रशासन उनके मनाने के लिए लगा हुआ था। बुजुर्ग बताते हैं की जब १९२७ के आस पास नहर के लिए सर्वे हो रहा था तब गाँव वालों की एक अंग्रेज अधिकारी से कुछ कहा सुनी हो गई थी तब उसने गाँव को सर्वे से बाहर कर दिया था। यह बात भी सुनी जाती है कि गाँव वालो ने अंग्रेज को पानी नही पिलाया था इस कारण उसने सर्वे से गाँव को निकाल दिया। बात कुछ भी हो गाँव वाले आज तक अपनी जमीन के लिए पानी की मांग कर रहें हैं।

Saturday 20 September 2008

जो बोया वही काटा


---- चुटकी ----
बम ब्लास्ट से
भला पाक को
क्या घाटा है,
उसने जो बोया
वही तो काटा है।

जस का तस


---चुटकी---
बनावटी आंसू
श्रद्धांजली
मुआवजा
और बस ,
उसके बाद
जस का तस।
--------गोविन्द गोयल

आतंकवाद बेमानी है


---- चुटकी ----
कुर्सी नहीं है तो पानी है
अगर है तो बचानी है,
आतंकवाद ! छोड़ो भाई
ऐसे में ये बात बेमानी है।
---- --गोविन्द गोयल

Friday 19 September 2008

समाज को बांटने की तैयारी

श्रीगंगानगर में अग्रवाल समाज के कितने संगठन है कहना मुश्किल है। अधिक संगठनों से होना तो ये चाहिए कि आपसी तालमेल से समाज में एकता दिखाई दे। मगर इनके लक्षण इसके विपरीत है। इस रविवार को अग्रवाल समाज के दो संगठनो के दो कार्यक्रम है। अग्रवाल जागरण मंच राजनीति के लिए सुबह ११ बजे सिटी गार्डन में कार्यक्रम कर रहा है तो अग्रोहा विकास ट्रस्ट समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए सुबह १० बजे अमर पैलेस में। दोनों स्थान पास पास है। दोनों कार्यक्रम तीन तीन घंटे से कम के नहीं होंगें। ऐसे में समाज के लोग क्या करेंगें। किस में जाकर अग्रवाल समाज की एकता मजबूत करने में अपना योगदान देंगें। दोनों संगठनो ने जो निमंत्रण पत्र वितरित किया हैं उनमे कई नाम दोनों संगठनों के निमंत्रण पत्र में हैं। अब ये नाम अपने आप छापे गएँ हैं या उनकी सहमती से ये तो इन संगठनों के पदाधिकारी ही बता सकते हैं। अग्रोहा विकास ट्रस्ट के तीन पदाधिकारियों के नाम जागरण मंच के कार्ड में हैं। अब वे अपना कार्यक्रम संभालेंगें या मंच के कार्यक्रम में शामिल होंगें। मंच ने कार्ड में अग्रवाल सभा का भी नाम दिया है जबकि सब जानते हैं कि उनकी खिचडी अलग पकती है। दोनों संगठनों ने अपने अपने कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए खास इंतजाम किया है। मंच के कार्ड पर लिखा है"दोपहर का भोजन सम्मानित अतिथियों के साथ हम सब मिलकर एक साथ करेंगें."जबकि ट्रस्ट के कार्ड पर अंकित है"१० बजे से पूर्व पधारे सभी महानुभावों को कूपन वितरित किए जायेंगे जिनमे से १० लक्की पुरस्कार ड्रा द्वारा निकले जायेंगें।" "भोजन ग्रहण करने के पश्चात ही प्रस्थान करें"। एक ओर तो समाज का लीडर बनने के लिए समाज को एक जुट करने की बात की जाति है जबकि इनकी करनी इसके विपरीत है। दोनों संगठन हर अग्रवाल से संपर्क कर कार्ड देने की बात करतें है जबकि हकीकत में कार्ड उनके ही दिए जाते है जिनसे या तो चंदा लिया जाता है या जिनको कार्यक्रम में दिखाना पदाधिकारियों की मजबूरी होती है । इनकी हकीकत इनके सामने बयान करने वालों को तो ये बुलाना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते। ऐसे अग्रवालों को नही बुलाते जो इनसे अधिक समझदार और गरिमापूर्ण व्यवहार करने वाले होते हैं।

टिकट के दावेदार

इस बार तो बीजेपी और कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं की लाइन लगी हुई है। अरोड़ा,कुम्हार,ब्राहमण,बनिया और महेश्वरी समाज टिकट मांगने वालों में सबसे आगे है। ऐसे ऐसे लोगों को ग़लतफ़हमी हो गई कि नगरवासी चर्चा के दौरान उनका मजाक उड़ाते हैं। अग्रवाल समाज में श्री नरेश अग्रवाल,श्री महेश गुप्ता,रतन नागौरी जैसे लोगों को ऐसे लगने लगा है जैसे उनसे अच्छा उम्मीदवार तो कोई हो ही नही सकता। पहले इन लोगों ने कांग्रेस के मंत्री संतोष बागरोडिया तथा विवेक बंसल को बुलाया। अब ये लोग बीजेपी के लीडर को बुला रहें है। इनको तो टिकट चाहिए कांग्रेसहो या बीजेपी इस से कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि इनकी नजर में ये तो समाज के एक छत्र नेता हैं और जीत तो इनकी खाट के पैताने बैठी है। लोगों के मामले पंचायत करके निपटाते हैं और जब इनके ख़ुद मुसीबत आती है तो फ़िर इनकी पंचायत दुसरे करते है। वैसे अग्रवाल सभा [अब लीला सभा ] ने तो एलान कर दिया कि उनका कोई प्रत्याशी नहीं होगा। बात तो ऐसे करते हैं जैसे सब उनकी बात पर ठप्पा लगा देंगें। महेश्वरी समाज भी कौनसा कम है। यहाँ श्री महेश पेडिवाल,सीमा पेडिवाल और जयदीप बिहाणी टिकट मांग रहें हैं। हैरानी तो इस बात की कि संजय मुंदडा जैसे आदमी भी अपने आप को टिकट का दावेदार बता रहें हैं।कुम्हार समाज में डॉक्टर तारा चंद वर्मा ने तो अपने आप को उम्मीदवार घोषित कर पोस्टर नगर में लगा दिए। इस समाज से कमलेश वर्मा भी हैं। अब जबसे राजस्थान के मंत्री से रिश्ता हुआ है तो प्रहलाद टाक को ये लगने लगा कि टिकट पर तो उनका हक़ है। अरोड़ा बिरादरी में भी किस बात की कमी है। जुगल डुमरा के पता नही किसने हवा भर दी कि वे तो हवा में ही उड़ रहें है। कश्मीरी लाल जसूजा,बबिता अरोड़ा को पिरथी पाल सिंह ने टिकट के सपने दिखा रखे हैं। अगर ये लोग टिकट मांग सकते हैं तो राधेश्याम गंगानगर ने क्या कसूर किया है।ब्राह्मण समाज में ले दे के मुख्य रूप से राजकुमार गौड़ हैं जो कांग्रेस कि टिकट पाने की कोशिश में लगे हैं। चुनाव के बाद इनमे से कितने आदमी जनता के लिए तैयार रहेंगें ये आप और हमको देखना है। अभी तो चुनावी बरसात को मौसम है ऐसे मौसम में वो तो आते ही हैं।

Thursday 18 September 2008

समाज के ठेकेदार

श्रीगंगानगर में अग्रवाल समाज के कई ठेकेदार अपने अपने तरीके से समाज को एक जुट करने के लिए सेवा में लगे है। सब अलग अलग संगठनों के माध्यम से ऐसा कर रहें हैं। ऐसा ही एक संगठन है अग्रोहा विकास ट्रस्ट। इस संगठन को श्री नन्द किशोर गोयन्का जी ने तन मन धन से सींच कर वट वृक्ष बनाया। यहाँ जो इस संस्था को कई सालों से अपने कंधे पर उठाये घूम रहें हैं उनकी कहानी कुछ अलग प्रकार की है। अध्यक्ष जी तो कई सालों से आर एफ सी के डिफाल्टर हैं। कई लाख का लोन चुकाया नहीं। आरएफसी ने अपनी रकम के लिए जरुरी कार्यवाही कर फाइल तहसीलदार ऑफिस में भिजवा दी। २००६ से फाइल वहां पड़ी है। मगर कोई कार्यवाही नहीं हुई। नीचे स्तर पर फाइल अटकी रही । आज तहसीलदार ने अपने डीलिंग कर्मचारी को बुलाकर तुंरत कार्यवाही करने के आदेश दिए। कर्मचारी को उस बैंक से इस आदमी की सम्पति और खातो की डिटेल लेने के निर्देश दिए गए जिस बैंक के पैनल में वह वल्युअर है। इसी संगठन के महामंत्री के खिलाफ एक व्यापारिक संगठन ने उसके सहायक महाप्रबंधक को शिकायत भेजी है। इस संगठन का आरोप है कि यह महामंत्री अपने बैंक के ग्राहकों से चंदा लेते हैं और डरा कर पैसा बटोरते हैं। संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि इस शिकायत की जाँच शुरू हो गई है। बैंक के शाखा प्रबंधक ने बताया कि वे तीन चार दिन पहले ही आयें हैं। उन्होंने जल्दी ही जानकारी देने का भरोसा दिलाया। ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी हो सकता है इन बातों के बारे में ना जानते हों। ज्ञात रहे कि ट्रस्ट की ओर से रविवार को अग्र प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। उसमे अग्रोहा निर्माण समिति के अध्यक्ष श्री नन्द किशोर गोयन्का मुख्य अतिथि होंगें।

मौत पर हंगामा?

videoश्रीगंगानगर के जैन नर्सिंग होम आज शाम को एक प्रसूता की मौत हो गई। दोपहर को उसके ओपरेशन से बच्चा हुआ था। उसके बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई। उसके परिवार वालों ने शाम को नगर के कई प्रमुख लोगों को नर्सिंग होम में बुला लिया। आने वालों में जयदीप बिहाणी,बंशी धर जिंदल,गोपाल पांडूसरिया ,सीता राम शेरेवाला,तेजेंदर पाल सिंह टिम्मा आदि कई आदमी थे। महिला के परिजन मनीराम का कहना था कि उसके बेटे की पत्नी की मौत तो दिन में ही हो गई थी। अब तो डॉक्टर नाटक कर रहा है। डॉक्टरों ने कई जनों को मरीज की हालत दिखाने के लिए ओपरेशन थियेटर में बुला लिया। उन्होंने बाहर आकर यह कहा कि महिला की मौत नही हुई है। इस बीच बड़ी संख्या में पुलिस नर्सिंग होम के चारों और तैनात हो गई थी। कुछ देर बाद ही डॉक्टर ने महिला की मौत हो जाने की बात कह दी। कुछ क्षण पहले जो परिजन हाय तौबा मचा रहे थे वे डैड बॉडी लेकर रवाना हो गए । जब डैड बॉडी दी गई तब ना तो डॉक्टर आई के जैन और ना उनकी पत्नी डॉक्टर पी जैन वहां थीं। वहां कोई डॉक्टर संदीप चौहान था जो डॉक्टर दम्पती की पैरवी कर रहा था। उसने कहा कि वे टेंशन में थे इस लिए चले गए। यह नर्सिंग होम पहले भी कई बार सुर्खियों में आ चुका है। अनेक बार तो यह नर्सिंग होम के सामने पड़े कचरे के डिब्बों में अविकसित गर्भ मिलने की वजह से
सुर्खियों में रहा। हमने डॉक्टर जैन से बात करने की कोशिश की मगर डॉक्टर संदीप चौहान और अन्य ने कहा कि वे तो चले गए हैं। जिसके हॉस्पिटल में ऐसा कुछ हो रहा हो उसका चला जाना उचित है या नहीं यह पाठक तय करेंगें। पीड़ित परिवार गाँव ख्यालीवाला का रहने वाला है।

सोनिया के हाथ


---- चुटकी ----
सिंह के किंग
बनने का
यह भी है एक राज,
उनकी पीठ पर है
सोनिया जी के हाथ।
----गोविन्द गोयल ,श्रीगंगानगर

कुछ नही जाता


---- चुटकी -----
कपड़े बदलने से
कुछ भी नहीं जाता है,
कांग्रेसियों पर संकट तो
निष्ठा बदलने से आता है।
--गोविन्द गोयल श्रीगंगानगर

Wednesday 17 September 2008

हद कर दी


श्रीगंगानगर से प्रकाशित होने वाले सांध्य दैनिक प्रताप केसरी ने आज इंडिया टीवी पर दिखाए गए "अनीता स्वम्बर" के बारे में सम्पादकीय लिखा है। उसकी प्रति साथ में है। श्रीगंगानगर में एक दर्जन से अधिक डेली अखबार प्रकाशित होतें हैं। उनमे से एक ने अपने पाठकों की भावनाओं के अनुसार यह सम्पादकीय लिखा। किसी बड़े टीवी चैनल के बारे में किसी छोटे शहर के छोटे अखबार में इस प्रकार से लिखना हिम्मत की बात है। [अखबार पर क्लिक करो]

जंगल राज है क्या

श्रीगंगानगर के कलेक्ट्रेट के आस पास आज जो कुछ देखने को मिला उससे तो ऐसा लगता है कि यहाँ कुछ भी हो जाए कोई मालिक नहीं है। आज दोपहर को नर्सिंग विद्यार्थी हड़ताल का बैनर उठाये आए। पहले तो वो हाय-हाय करते रहे,फ़िर सड़क पर बैठकर रास्ता जाम कर दिया। वहां पुलिस प्रशासन का कोई आदमी नहीं था। आने जाने वाले परेशान हो गए। उनके पास रास्ता बदल लेने के अलावा कोई चारा नहीं था। लीडर विहीन भीड़ से कौन मगजमारी करे। जो लड़के-लड़कियां आन्दोलन कर रहे थे उनके पता ही नहीं था कि कौन सा अधिकारी कहाँ बैठता है और ज्ञापन किस को देना है। यह सब वहां हुआ जहाँ से सभी अधिकारी कर्मचारी अपने अपने ऑफिस आते जाते है। नगर में कौन कब रास्ता रोक कर बैठ जाए किसी को कोई मतलब नहीं है। ना तो उनको जो बेवजह रास्ता रोकते हैं और ना प्रशासन या जनप्रतिनिधियों को। मीडिया से जुड़े लोग जब उनकी फोटो लेते हैं तो उनमे और जोश आ जाता है। जब सबसे बुद्धिजीवी माने जाने पत्रकार ही रास्ता रोकने से नहीं हिचकिचाते तो फ़िर इनको कोई क्या कहे।लगता है यह नगर लगातार बेलगाम और लावारिश होता जा रहा है।

अंजान से मुलाकात

बीस साल की पत्रकारिता में आम से लेकर सुपर वीवीआईपी से मुलाकात हुई। मगर आज की मुलाकात उन सबसे अलग थी। इस सज्जन से कल रात को ही मिलने का समय ले लिया था। सुबह आठ बजे का। आठ बजने से पांच मिनट पहले उनके घर के बाहर से उनको फ़ोन किया। परिचय दिया तो बोले-आठ बज गए क्या,आप घर बैठो मैं आता हूँ। कुछ क्षण बाद उनके सहयोगी,सेवक,कर्मचारी[ जो भी था] ने मुझे बुलाकर बैठा दिया। मिलने का समय देने या लेने के बाद इन्तजार करना या करवाना मेरे स्वभाव में नहीं है,ये बात मेरे से परिचित सब जानते हैं मगर आज ना जाने क्या बात थी कि मैं बैठा रहा ।[किसी बहुत जरुरी कारण से अपवाद हो सकता है दोनों और से] पता लगा कि जिनसे मिलने आया हूँ वो खेलने गए हैं। उनका आना लगभग ९ बजे हुआ। दो तीन मिनट के बाद हम दोने एक दुसरे के आमने सामने थे। उन्होंने मेरा पूरा नाम और जन्म की तारीख पूछी। उसके बाद वे मेरा हाथ देखने लगे। कई मिनट के बाद उन्होंने मेरे जीवन में जो कुछ हुआ वह संक्षेप में बता दिया। यहाँ तक कि मेरे बच्चो कि संख्या भी। यह भी कि उसमे कितनी लड़कियां हैं। आगे आने वाले
कुछ परिवर्तन भी बताये।हैरानी इस बात की कि इस से पहले हम दोनों ने एक दुसरे की सूरत तक नहीं देखी थी। कभी फ़ोन पर बात नहीं हुई थी। मेरे और उनके कोई दोस्त कोमन नहीं थे,हमारे रिश्तेदार तक एक दुसरे को नहीं जानते थे। इस के बावजूद उन्होंने वह बता दिया जो कुछ मैंने अपनी जिन्दगी में खोया पाया।यह भी कहा जाता है कि नसीब तो उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते ,मगर जो कुछ उनसे में मैंने महसूस किया वह भी मेरे लिए कुछ अचम्भा नहीं था। वह कोई साधू,संत,मुनि, बाबा नहीं है। मगर उसकी विद्या,जानकारी,अपने सब्जेक्ट पर पकड़ सम्मान और सराहना के काबिल है। जिन से मिला वे सज्जन एक आम आदमी है। सम्भव हुआ तो उनसे इसी माध्यम से सभी से मिलवाने की कोशिश की जायेगी। वैसे तो वक्त बलवान होता है। क्या पता क्या हो।

Tuesday 16 September 2008

दी गंगानगर क्लब

श्रीगंगानगर में कलेक्टर,एस पी के घर और ऑफिस के बीच में एक क्लब है नाम है दी गंगानगर क्लब। इस क्लब में आजकल सदस्यों में काफी तनातनी चल रही है। इस तनातनी का कारण है गेम। यह गेम इस क्लब के अधिकतर सदस्य खेलते है। कुछ मेंबर ने एक गुट बना रखा है वे दस रूपये पॉइंट खेलते हैं। चर्चा है कि इस गुट के मेंबर मिलकर अन्य सदस्यों के साथ खेलते थे। इस कारण बहुत से लोग उनका उनका शिकार बने। जब पोल खुली तो ऐतराज हुआ। क्लब अध्यक्ष संजय मुंदडा ने इस पर रोक लगाने के आदेश जारी किए। इस गुट ने अब कांग्रेस लीडर गंगाजल मील के बेटे शराब ठेकेदार महेंद्र मील के पास शरण ली। उसने उनको कह दिया कि आप खेलो,मैं देखता हूँ कौन रोकता है। पता चला है कि इस मामले में कार्ड सचिव ने अपना पद छोड़ दिया है।क्योंकि वह चाहता है कि उनका सिस्टम चलता रहे। लेकिन अब अधिकतर सदस्य इस गुट के खिलाफ हो चुके है। इस कारण इस गुट की पार नहीं पड़ रही। अध्यक्ष संजय मुंदडा दुविधा में है कि क्या किया जाए। क्योंकि वह राजनीति में भाग्य आजमाना चाहता है इसलिए वह किसी को नाराज नहीं करना चाहता। अध्यक्ष संजय मुंदडा ने बताया कि ऐसा कुछ नहीं है सब ठीक चल रहा है। पदाधिकारियों में फेरबदल होता रहता है। श्री मुंदडा ने कहा कि क्लब में घुटनों के इलाज का कैंप लगाया गया है। इसके अलावा जल्दी ही राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता भी करवाई जायेगी। उनका कहना था कि इससे बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। श्री मुंदडा के अनुसार क्लब बहुत ही अच्छे तरीके से चल रहा है। वे इसको सामाजिक रूप से अच्छा बनाना चाहतें हैं ताकि लोगों की क्लब के प्रति जो aisee वैसी सोच है उसको बदला जा सके।

Monday 15 September 2008

नंगापन

--- चुटकी ---
नंगेपन पर परदा डालने हेतु
भाई तीन बार बदले कपड़े,
नंगापन तो गया नहीं
पड़ गए और सौ लफड़े।
-----गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

"पत्रकारों" का नया काम

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में जितने पत्रकार हैं उतने बहुत कम जिलों में होंगें। इसका कारण यहाँ से प्रकाशित होने वाले अखबारों की संख्या। श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय से एक दर्जन से अधिक दैनिक अखबार शानदार तरीके से प्रकाशित होतें हैं। सभी के रिपोर्टर कस्बों और गांवों में हैं। इस के अलावा हैं न्यूज़ चैनल्स के रिपोर्टर। ये अपने अपने जब ये पत्रकार हैं तो ख़बरों का काम तो करते ही होंगें। मगर इस के साथ साथ आजकल ये बीमा भी करतें है। दोनों जिलों में बहुत से पत्रकार आजकल प्राइवेट बीमा कंपनियों के एजेंट बने हुए हैं। चूँकि इनके पास कलम और गन माइक की ताकत है इस लिए इनको ऐसे लोग मिल ही जाते हैं जिनका ये बीमा करने में इनको कोई दिक्कत नहीं होती। ऐसे पत्रकार अपनी पत्रकारिता से चाहे कुछ ना कमाते हों हाँ पत्रकार की हैसियत से इनको बीमा करवाने वाले खोजने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। प्राइवेट कम्पनियों के बड़े बड़े अधिकारी आजकल ऐसे पत्रकारों की तलाश में रहते हैं जो उनके एजेंट बनने को तैयार हों। इस के लिए बाकायदा कई कई मीटिंग्स होतीं हैं। पत्रकारों का यह नया काम कस्बों में अधिक हो रहा है। इस काम में हर माह खूब पैसा कमीशन के रूप में मिल जाता है। महंगाई में और चाहिए भी क्या। इसे कहते है अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करना।

नेता का बयान

--- चुटकी ---
सिक्योरिटी से घिरे
घर में बंद
नेता का बयान आएगा,
इस बार आतंकवादियों को
बख्शा नहीं जायेगा।
------गोविन्द गोयल, श्रीगंगानगर

पटेल के देश में


---- चुटकी ----
पटेल के देश में
गृहमंत्री पाटिल,
कुछ भी करलो
कुछ नहीं होगा हासिल।
----गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

Sunday 14 September 2008

गणपति को विदाई

videoश्रीगंगानगर पाकिस्तान और पंजाब की सीमा पर है। यहाँ के लोगों को कल्चर लगभग पंजाबी है। यहाँ गत दो तीन सालों में गणपति की मान्यता में बढोतरी हुई है। यहाँ तक की राजस्थान का मूल निवासी एक परिवार भी अपने घर गणपति की स्थापना करने लगे हैं, ठेठ मुंबई स्टाईल में। ऐसे ही एक परिवार ने आज गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन अपने बंधू बांधवों के संग किया। मूर्ति को अपने हाथ में लिए परिवार जन " गणपति बप्पा मोरया रे बप्पा मोरया रे..." करते हुए जा रहे थे। नहर किनारे गणपति की पूजा आरती कर उसको नाहर में विसर्जित कर दिया गया। श्रीगंगानगर में प्रमुख रूप से दो स्थानों पर गणपति की प्रतिमा की स्थापना की गई थी।इन में से मराठा मंडल ने कल शनिवार को गणपति की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया था। [ विडियो]

ग़लतफ़हमी के शिकार

----- चुटकी ----
टिकट के असली दावेदार तो


हैं बस दो चार ,

बाकी तो हैं यूँ ही

ग़लतफ़हमी के शिकार।


----गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

Saturday 13 September 2008

किसको अंगूठे दिखाओगे

video
-----चुटकी----
कर्मचारियों को पटाने हेतु
यूँ खजाना लुटाओगी,
तो अगली बार
विरोधियों को
अंगूठे कैसे दिखाओगी।
----गोविन्द गोयल, श्रीगंगानगर

४०% वोट वाले को टिकट

दिल्ली में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने "तय "किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में उन नेताओं को टिकट दी जाए जिन्होंने गत चुनाव में पोल हुए वोटों में से ४०% वोट मिले थे। अगर ये पैमाना लागु हुआ तो श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में एक भी कांग्रेस उम्मीदवार पुराना नहीं होगा। यहाँ तक कि गत चुनाव में हनुमानगढ़ से विजयी रहे विनोद कुमार भी नहीं। क्योंकि उनको ३६.९८% वोट मिले थे। भादरा से कांग्रेस के संजीव कुमार को २१.६८%,नोहर से सुचित्रा को २४.५२%,टिब्बी से शंकर पन्नू को २६.७९%,संगरिया से के सी बिश्नोई को १८.४४%,गंगानगर से कांग्रेस के राधेश्याम गंगानगर को ३१.८७%,केसरीसिंहपुर से हीरा लाल indora को ३१.४५%,करनपुर से गुरमीत सिंह कुन्नर को ३०.९७%,पीलीबंगा से जगतार सिंह को २०.२६% तथा सूरतगढ़ से विजयलक्ष्मी बिश्नोई को २९.४५% वोट मिले थे। बात इस से पहले चुनाव अर्थात १९९८ की करें तो भी हालत ऐसे ही हैं। कांग्रेस ने दोनों जिलों की ११ सीट में से ९ सीट प्राप्त की। इनमे से राधेश्याम गंगानगर और हीरा लाल इंदौरा को ही ४०% से अधिक वोट मिले थे। १९९३ में केवल हीरा लाल इंदौरा ही थे जिन्होंने ४०% से अधिक वोट मिले। तब भैरो सिंह शेखावत को हराने वाले राधेश्याम गंगानगर को ३६% वोट मिले थे। कांग्रेस अपने पैमाने लगातार बदल रही है। अंत में उसको शायद एक ही पैमाना रखना पड़ेगा और वह होगा जिताऊ और जिताऊ बस। तब राधेश्याम गंगानगर,गुरमीत सिंह कुन्नर,दुला राम,महेंद्र सिंह बराड़ के भाग खुल सकते है।

मंत्री का सम्बन्धी

श्रीगंगानगर में प्रह्लाद टाक नामक एक अमीर कुछ दिन पहले तक राजनीति के आस पास भी नहीं था। कुछ सप्ताह पहले उसके लड़के की शादी राजस्थान के एक मंत्री की भतीजी से हो गई। बस, उसके बाद उसको लगा कि वह भी राजनीति में आ सकता है। या उसको कुछ लोगों ने अपना मोहरा बना लिया। आज वह अपने आप को अपनी जाति का लीडर मान कर श्रीगंगानगर से बीजेपी की टिकट का दावा कर रहा है। उसने बाकायदा २ बार प्रेस कांफ्रेंस की/करवाई। अब वह अपनी बिरादरी को अपने साथ करने में लगा है। हैरानी ये कि कई सालो से राजनीति में भागदौड कर रहे सीनियर लोग भी इसके पीछे हो गए। सच है भाई पैसे में बड़ी ताकत होती है। फ़िर प्रह्लाद टाक के पास तो मंत्री भी है बिल्कुल निजी, ऐसे में कौन साथ न लगेगा। टिकट मांगना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन श्रीगंगानगर में तो पता नहीं क्या हो गया कि जिसके पास धन हो या आ जाता है वह राजनीति में घुसपैठ करके अपने आप को भावी विधायक समझने लगता है। बीजेपी और कांग्रेस में आजकल यही हो रहा है। नए नए पैसे वाले ग़लतफ़हमी का शिकार हैं। इनके बारे में किसी ने टिप्पणी की कि छाज तो बोले ही बोले अब तो छलनियाँ भी बोलने लगी है।

Friday 12 September 2008

बुश बेकरार


---चुटकी---
परमाणु करार
बुश बेकरार,
सिंह को किंग
बनाने हेतु
कांग्रेस है तैयार।
-----गोविन्द गोयल

पत्रकार ने छुए चरण

videoमुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के चरण नेता तो सरे आम छूटे देखे जा सकतें हैं लेकिन पत्रकार भी ऐसा कर सकता है यह कमीनपुरा में देखने को मिला। वहां एक महिला पत्रकार ने मंच पर मुख्यमंत्री के चरण छुए दो बार। यह महिला बहार से आई थी हमने उनसे परिचय जानने की कोशिश की। मगर इस अकडू महिला पत्रकार ने अपना परिचय नहीं दिया। इसी मंच पर मुख्यमंत्री ने जनता की बलाएँ लीं। [ विडियो में देखा जा सकता है। ]

नीचे उतारा

videoमुख्यमंत्री के मंच की अपनी गरिमा होती है मगर बीजेपी के छुटभय्ये नेता इस बात को नही जानते। इस बात की जानकारी ख़ुद मुख्यमंत्री को करवानी पड़ी। उन्होंने तलवार भेंट करने आए बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष करुण मित्तल और पंचायत समिति श्रीगंगानगर के प्रधान हरभगवान सिंह बराड़ पर अपनी अंगुली की तलवार चलाई। इनको कुछ सैकिंड भी मंच पर नहीं रहने दिया और अंगुली का इशारा कर चले जाने को कहा।[ आप विडियो देख सकतें हैं।] करुण मित्तल तो कई युवकों को लेकर मंच पर ऐसे आ गए जैसे किसी छोटे मोटे नेता का मंच हो। हरभगवान को शायद इस बात की कल्पना भी नहीं होगी कि उनके साथ भरी सभा में यह होगा। इतना ताम झाम किया लेकिन मुख्यमंत्री ने कुछ सैकिंड भी नहीं दिए।

मुख्यमंत्री के अंगूठे

videoश्रीगंगानगर के निकट कमीनपुरा में मुख्यमंत्री कासुन्धरा राजे सिंधिया ने अपने दोनों हाथों के अंगूठे दिखाते हुए कहा कि उनका खजाना खाली नहीं है। ये अंगूठे उन्होंने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में किस किस की और थे मुख्यमंत्री ख़ुद ही जानती हैं।[ आप देख सकते है विडियो]

Wednesday 10 September 2008

मुख्यमंत्री के स्टाईल




श्रीगंगानगर के निकट कमीनपुरा में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के कई मूड देखने को मिले। उन्होंने मंच पर स्वागत और भेंट देने के लिए आने वालों को कोई खास तवज्जो नहीं दी। उन्होंने ख़ुद हाथ के इशारे से ऐसे बीजेपी नेताओं को मंच से जाने को कहा। एक टिकट मांगने वाले हरभगवान सिंह बराड़ को तो उन्होंने कोई भाव नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने उसे मंच से जाने को कहा। जिसे हजारों ने देखा। उन्होंने बीकानेर में सोनिया गाँधी ने जो आरोप लगाये थे उनकी सफाई दी। दोनों हाथों के अंगूठे दिखाते हुए वे बोलीं कि मेरा खजाना खाली नहीं है। श्रीमती सिंधिया ने श्रीगंगानगर जिले के लिए कई एलान किए। अपनी उपलब्धियां बतायीं ,जनता की बलइयां लीं। मौके पर एक साथ कई शिलान्यास और लोकार्पण किए। उनको सुनाने के लिए हजारों की संख्या में लोग आए हुए थे। हैलीपैड पर उन्होंने जनता से मुलाकात की। कई पत्रकार उनसे खास तौर से किसी की मार्फ़त मिलते दिखे। एक महिला पत्रकार ने तो मंच पर मुख्यमंत्री के २ बार चरण छुये प्रशासन आज भी पत्रकारों से खार खाए रहा। पहले तो पुलिस,प्रशासन ने पत्रकारों को मंच के निकट नहीं जाने दिया। इस बारे में काफी विवाद हुआ उसके बाद प्रशासन अपने आप मान गया

छूत की बीमारी

-- चुटकी --
कश्मीर तो पाक में
छूत की बीमारी जी,
प्रेजिडेंट बनते ही
जकड़े गए जरदारी भी।
-----गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

Tuesday 9 September 2008

मुख्यमंत्री का दौरा








राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के गोगामेडी दौरे की कुछ फोटो।




पुलिस का स्टाईल

श्रीगंगानगर में पत्रकारों को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के कार्यक्रम की कवरेज़ के लिए जो पास दिए गएँ हैं वह ऐसे हैं जैसे पुलिस विभाग अपने कर्मचारियों को देता है। पास पर लिखा है "वी आई पी ड्यूटी पास"।पत्रकारों का विभाग बताया गया है सूचना एवं जनसंपर्क। पत्रकारों की ड्यूटी लगाई गई है कमीनपुरा में। पास पर यह नहीं लिखा कि पत्रकार कौनसे अखबार या न्यूज चैनल से है। पास के अनुसार तो जिस को पास मिला वह पत्रकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में काम करता है। पास राजस्थान पुलिस श्रीगंगानगर ने जारी किए हैं और उस पर पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर की मोहर और हस्ताक्षर हैं।[ चित्र दो पास के ]

मुख्यमंत्री का दौरा










राजस्थान की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया ने ९ सितम्बर को अपने हनुमानगढ़ जिले के दौरे के दौरान कई कार्यक्रमों में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने भादरा में प्रस्तावित २२० के वी के ग्रिड सब स्टेशन,राजकीय यूनानी चिकित्सालयपल्लू-अरजनसर मेगा हाईवे परियोजना का शिलान्यास किया। ये सभी शिलान्यास उन्होंने गोगामेडी में ही किए। जबकि इनका निर्माण अन्य स्थानों पर होगा।

खबरें ऑफ़ दी रिकॉर्ड

पुलिस अधीक्षक--किसी और को मालूम हो या ना हो लेकिन पुलिस विभाग जानता है कि श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक रात ९-१० बजे तक ऑफिस में काम निपटाते हैं। अच्छी बात है। मगर ये बात बहुत कम लोग जानतें हैं कि पुलिस अधीक्षक ऑफिस ने दोपहर को आते हैं। जानकारी मिली है कि उन्होंने लिखित में आदेश जारी कर रखा है कि जब तक मैं ऑफिस में रहूँगातब तक सब रहेंगें। आदेश में ये नहीं लिखा कि बाकि सब भी ऑफिस में तभी आयें जब वे आयें। एक बार तो उन्होंने एक सी ओ को रात को रुकने को कहा। सी ओ ने साफ इनकार कर दिया। वैसे एक पुलिस अधीक्षक ने अपनी पहली प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि जल्दी बदलाव देखने को मिलेगा।
कलेक्टर की बातें--सब जानतें हैं कि जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा बहुत रूखे है। लेकिन कभी कभी वे किन्हीं से राजनीति की बात भी करने लगते है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अपने संबंधों का जिक्र करना नहीं भूलते।वे टिकटों के बारे में पुछेंगें,अशोक गहलोत उनके सहपाठी रहें है ये बताएँगे। बस उसके बाद कांग्रेसी तो अलग प्रकार से बात करतें हैं और दूसरी प्रकार के कांग्रेसी अलग प्रकार से। उन्होंने अपने यहाँ से चिट सिस्टम हटा दिया है।
राजनीति की चर्चा--बीजेपी के अध्यक्ष सीता राम मोर्य ने अपना ने संगठन -सरकार की मुखिया को पत्र लिख कर कुछ नाम सुझाये हैं । श्री मोर्य के अनुसार इनको टिकट दे दी जाए तो पार्टी का बेडा पार हो सकता है। चर्चा के अनुसार उन्होंने सादुलशहर से श्री गुरजंट सिंह बराड़, श्रीगंगानगर से हनुमान गोयल,करनपुर से कोई सोडी इसी प्रकार से अशोक नागपाल ,चिमन मधु और ख़ुद के नाम भेजें है। लगता है कि श्री मौर्य जी ने बहुत स्टडी की है। इसके लिए। वैसे जो लोगों के दिलो में है उससे तो ऐसा लगता है कि आज के दिन राधेश्याम गंगानगर,गुरमीत सिंह कुन्नर,दुलाराम ,सादुलशहर से महेंद्र सिंह बराड़ और संगरिया से गुरजंट सिंह बराड़ जिताऊ उम्मीदवार हैं।

Monday 8 September 2008

पहले तो बिगाडा

- चुटकी
फुल जेब खर्च देकर
पहले तो
बिगाड़ लिया पाक को,
अब ओबामा कहते हैं
नहीं जी तुम हिसाब दो।
-----गोविन्द गोयल

होटल में सम्मान

----चुटकी-----
क्लब वाले होटलों
में करतें हैं
शिक्षकों का सम्मान,
इस बारे में हम
क्या लिखें श्रीमान।
-----गोविन्द गोयल

जिताऊ चाहिए

--चुटकी--
अच्छे बुरे के
चक्कर में रहे तो
कुछ भी "हाथ" नहीं आएगा,
विरोधी दल के घर
फ़िर "कमल" खिल जाएगा,
इसलिए टिकट तो
जिताऊ को दी जायेगी,
तभी तो
हमारी सरकार बन पायेगी।
---गोविन्द गोयल

Sunday 7 September 2008

वक्त का खेल

-चुटकी-
वक्त भी देखो भाई
क्या क्या खेल दिखाता है,
जो कल तक था
मिस्टर १०%
वह प्रेजिडेंट बन जाता है।
--गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

खेद जताया-कलेक्टर

श्रीगंगानगर- जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा का कहना है की उन्होंने आन्दोलनकारी पत्रकारों से तभी बात की जब दुर्व्यवहार करने वालों ने अपने व्यवहार पर खेद जताया। एक रिपोर्टर से बातचीत करते हुए श्री देथा ने कहा कि वार्ता के लिए यही शर्त थी। उन्होंने कलेक्ट्रेट में पत्रकारों को रोकने के लिए की गई नाकाबंदी को ग़लत नहीं माना। उनका कहना था कि पत्रकार जैसा आन्दोलन करेंगे वैसे ही इंतजाम होंगें। श्री देथा ने कहा कि पत्रिका शिवभान सिंह फ़ोन करके आए उनको नहीं रोका गया। उन्होंने इस बात को नहीं माना कि पत्रकारों के लिए ऐसी नाकाबंदी केवल श्रीगंगानगर में ही हुई है। लेकिन वे किसी दूसरी जगह का नाम नहीं बता सके। उन्होंने कहा कि वंचित पत्रकारों को भूखंड देने की कार्यवाही आरम्भ पहले ही कर दी गई थी। उधर कल सोमवार को पत्रकार नगर विकास न्यास के सचिव से मिलेंगे और वार्ता में दिए गए आश्वाशन को लिखित में लेंगे। अभी तक यह बात समझ नहीं आई कि पत्रकारों को जिला कलेक्टर से टकराने की राय किसने दी थी। क्योंकि भूखंडों का मामला न्यास से सम्बंधित है और वहां सरकार द्वारा मनोनीत अध्यक्ष है। जो भी कार्यवाही होनी है वहीँ से होनी है। खैर समझौता हो गया एक बार तो बात ख़त्म।

Saturday 6 September 2008

समर्पण किया

चुटकी
कलेक्टर ने हथियार डाले
या पत्रकारों ने किया
दंडवत प्रणाम,
इस बारे में तो हम
कुछ नहीं कहेंगें श्रीमान।
----गोविंद गोयल ,श्रीगंगानगर
------------------------------------------------------
चुटकी
अब कलेक्टर की फोटो
अपने अपने घर ले जाओ,
उसकी पूजा करो
और मोज उडाओ।
- -गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

Friday 5 September 2008

शिक्षक दिवस


श्रीगंगानगर में भारती चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से संचालित संस्था में आज शिक्षक दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ट्रस्ट के सचिव अजय गुप्ता,निदेशक श्याम जैन और प्रशासनिक अधिकारी संजय खन्ना थे। प्राचार्य श्री विपिन सैनी ने शिक्षक दिवस का महत्व बताया। श्री अजय गुप्ता ने विद्यार्थियों को गुरुजनों से प्रेरणा लेने और उनका सम्मान करने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षकों के अनुभव से शिक्षा लेनी चाहिए। विद्यार्थिओं ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किया। सतबीर कौर ने पंजाबी गीत पर डांस किया। कार्यक्रम का संचालन सौरभ और गुंजन ने किया।[फोटो उसी कार्यक्रम के ]

कलेक्टर की तानाशाही

श्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा की पत्रकारों के खिलाफ तानाशाही आज दूसरे दिन भी जारी रही। आज भी कलेक्ट्रेट के सभी दरवाजों पर पुलिस का भारी बंदोबस्त था। आज तो जिला कलेक्टर ने अपने ऑफिस के इर्द गिर्द बैरिकेड्स लगवा लिए। उनको आशंका है कि आंदोलनकारी पत्रकार उन पर हमला कर सकते हैं। भारत में शायद श्रीगंगानगर जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा पहले ऐसे कलेक्टर होंगें जिन्होंने पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाई है। पता नहीं सी आई डी वाले सरकार को रिपोर्ट देतें हैं या नहीं। हैरानी इस बात की अधिक है कि जिले के विधायक मंत्री तक इस मामले में चुप हैं। पता नहीं जिला कलेक्टर क्या चाहते है। इतना प्रतिबन्ध तो आपातकाल में भी नहीं हुआ होगा।

साइबर वालों को एलर्ट किया

श्रीगंगानगर में कोई संधिग्ध व्यक्ति/व्यक्तियों द्वारा साइबर कैफे से देश विरोधी सूचनाओं को अपने लोगों तक प्रेषित करने की आशंका है। यह आशंका सी आई डी को है। सी आई डी ने नगर के साइबर संचालकों को कोई संधिग्ध आए तो सुचना देने को कहा है। सी आई डी वाले यह सुचना एक एक साइबर पर जाकर डी। उन्होंने अपने फ़ोन नम्बर भी दिये हैं ताकि संचालक उन्हें बता सकें। वैसे ये क्या जरुरी है कि ऐसे लोग साइबर पर ही आयेंगे। आजकल तो घर घर इन्टरनेट कनेक्शन है। ऐसे में कोई साइबर पर सार्वजनिक क्यों होने लगा।

चुटकी


चुटकी
परमाणु करार की
खुल गई पोल,
प्यारे मोहन
कुछ तो बोल।
----गोविन्द गोयल,श्रीगंगानगर

Thursday 4 September 2008

पत्रकारों का प्रदर्शन [विडियो]

श्री videoगंगानगर के बहुत से पत्रकारों का आन्दोलन आज भी जारी रहा। पत्रकारों ने रोष मार्च निकला,भगत सिंह चौक पर सांकेतिक रास्ता रोका और कलेक्ट्रेट के सामने सभा की। सभी कुछ शान्ति पूर्वक निपट जाता मगर जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा की कार्यवाही ने पत्रकारों को जबरदस्ती करने पर मजबूर कर दिया। हालाँकि उनका कलेक्ट्रेट के अन्दर जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था मगर पुलिस का भारी इंतजाम देखकर सब भड़क गए। उसके बाद तो पत्रकार पुलिस से जोर जबरदस्ती करके अन्दर चले गए। आज राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर के वे पत्रकार नहीं आए जो कल दूसरो को गाइड कर रहे थे।

videoदोनों अखबारों में पत्रकारों द्वारा कल किए गए प्रदर्शन की एक लाइन भी नहीं थी। कौनसी ख़बर छपेगी कौनसी नहीं ये अधिकार संपादक को है। किंतु जहाँ छोटी छोटी ख़बर को फोटो सहित प्रकाशित करने की मारा मारी रहती है वहां कलेक्ट्रेट के अन्दर बहुत से पत्रकारों के प्रदर्शन को जगह ना मिलना अचरज की बात तो है ही। एक घटना तो हुई,उसको किस प्रकार किस के पक्ष में किस के खिलाफ लिखना सम्पादक के विवेक पर है। अगर उनको लगा कि पत्रकार ग़लत हैं तो यह उस ख़बर के साथ लिखा जाना चाहिए था। पर बात तो ये कि "बाबा सबको निर्देश दे,बाबा को निर्देश कौन दे?"इस को ऐसे भी कहा जा सकता है कि समर्थ का कोई कसूर नहीं होता। और इतने बड़े बड़े अखबार के संपादकों से सवाल करके किसी ने मरना है क्या?।

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जिला कलेक्टर की नाकाबंदी [विडियो]

videoश्रीगंगानगर के जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा ने कलेक्ट्रेट को अपनी निजी जागीर मानते हुए पुलिस अधिकारियो को पूरे साजो सामान के साथ कलेक्ट्रेट के सभी दरवाजों पर इस लिए तैनात कर दिया ताकि कोई पत्रकार ना आ सके। आज जैसे ही एक न्यूज़ चैनल का रिपोर्टर अन्दर जाने लगा उसे पुलिस एक थानाधिकारी ने रोक लिया और कहा कि आप अन्दर नहीं जा सकते डीएम के आदेश है। रिपोर्टर ने डी एम से रोक का सबब पूछा। जब उनके पास कोई जवाब नहीं था तो उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारी से बात करवाने को कहा। रिपोर्टर ने फ़ोन डी वाई एस पी श्री दीक्षित को दे दिया। तब डी एम ने रिपोर्टर को अन्दर आने के आदेश दिए। श्रीगंगानगर के इतिहास में यह पहला ऐसा डी एम है जिसने पत्रकारों पर कलेक्ट्रेट के अन्दर आने पर प्रतिबन्ध लगाया। न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर ने डी एम,डी वाई एस पी,तहसीलदार से पुलिस की तैनाती का विरोध किया और कहा कि इससे दोनों पक्षों के सम्बन्ध ख़राब होंगें। मगर जिला कलेक्टर ने इसकी कोई परवाह नहीं की। क्योंकि जिला कलेक्टर ने कलेक्ट्रेट को अपनी निजी सम्पति समझ लिया है जहाँ कोई और चाहे कोई भी आए लेकिन पत्रकार नहीं। ज्ञात रहे कि बहुत सारे पत्रकार अपनी मांगों के लिए आन्दोलन कर रहें हैं। उन्होंने आज प्रदर्शन करना था। प्रदर्शन करने वालों में अधिकांश वे हैं जो हर रोज न्यूज़ एकत्रित करने के लिए कलेक्ट्रेट आते जाते हैं। आज जिला कलेक्टर ने उनको अन्दर आने से रोकने के लिए इतनी पुलिस लगाई जैसे कोई हिंसक आन्दोलन चलाने वाले नक्सलवादी आ रहें हों।

Wednesday 3 September 2008

मुंबई से श्रीगंगानगर

videoश्रीगंगानगर में भी मुंबई की भांति श्रीगणेश उत्सव की धूम मची है। बालाजी धाम में त्रिनेत्र गणपति और मनोकामना मन्दिर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। दोनों मंदिरों में सुबह से दर्शनार्थियों का आना शुरू हो गया था। आज बुधवार होने के कारण भी दोनों मन्दिर लोगों के आस्था के केन्द्र रहे। क्योंकि बुधवार को श्री गणेश जी का वार माना जाता है। तह बाजारी में मराठा मंडल ने गणपति की स्थापना की। मराठा मंडल १३ सितम्बर को गणपति जी का विसर्जन करेगा। नगर में कई घरों में भी गणपति की स्थापना की गई है। [विडियो १--मंदिरों के सीन। २-मराठा मंडल गणपति जी को ले जाते हुए। ]

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कलेक्टर के खिलाफ पत्रकार[विडियो]

videoश्रीगंगानगर में अनेकानेक पत्रकार आज जिला कलेक्टर के खिलाफ धरने पर बैठे रहे। पत्रकारों की ओर से कुछ ख़ास व्यक्ति जिला कलेक्टर से मिलने गए ताकि मामला निपट जाए लेकिन जिला कलेक्टर ने उनको कहा-"जब तक दुर्व्यवहार करने वाले पत्रकार सॉरी नहीं कहते वे कोई बात नहीं करेंगे।"इस के बाद पत्रकार नारे लगाते हुए चले गए। नारे थे "जिला कलेक्टर मुर्दाबाद","जिला कलेक्टर होश में आओ",जिला प्रशासन मुर्दाबाद आदि। पत्रकार नगर विकास न्यास से उन साथियों के लिए रियायती दर पर भूखंड मांग रहें हैं जिनको श्री अशोक गहलोत की सरकार द्वारा जारी की गई स्कीम में भूखंड नहीं मिले थे। इसी बात का विरोध करने के लिए आज पत्रकारों ने धरना देकर नारे बाजी की। कांग्रेस टिकट के दावेदार श्री जयदीप बिहाणी,श्री जगदीश जांदू,चेंबर ऑफ़ कॉमर्स के श्री बंशी धर जिंदल,श्री टिम्मा आदि भी पत्रकारों के साथ थे। पत्रकारों ने अपनी लडाई में ताकत के लिए इनको बुलाया या ये अपने आप आए इस बारे में दोनों ही बातें है। कोई कहता इनको फोन करके बुलाया गया किसी ने कहा-ना ये तो अपने आप आए हैं। हाँ इनको जिला कलेक्टर के पास पत्रकारों की ओर से बात करने जरुर भेजा गया था। जिला कलेक्टर भवानी सिंह देथा ने बताया कि प्रशासन पत्रकारों की मांगो को पुरा करने की कार्यवाही कर रहा था कि यह मामला हो गया। उन्होंने कहा कि जब तक दुर्व्यवहार करने वाले सॉरी नहीं कहेंगें वे बात नहीं करेंगे।[विडियो में सुनें और देखें किसने कही साड़ी खोलने की बात]

Tuesday 2 September 2008

नकारे गए नकारे

जयपुर- यहाँ आज दोपहर बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सी पी जोशी ने प्रेस कांफ्रेंस करके गत चुनाव में नकारे गए नेताओं की सिट्टी पिट्टी गुम कर दी। उन्होंने साफ साफ कहा कि गत चुनाव में जो १५ हजार वोट से हरा था उसको टिकट नहीं मिलेगी। श्री जोशी के अनुसार इसके अलावा उस नेता को भी टिकट नहीं मिलेगी जिसकी उम्र ७० साल की है। वह नेता भी टिकट पाने का अधिकारी नहीं होगा जिसे गत चुनाव में २५% से भी कम वोट मिले। जो नेता इस चक्कर में आ जायेंगे उनके परिवार वालों को टिकट मिल जायेगी ऐसा नहीं है। हारे हुए बड़े नेता के बेटे,बहू को तभी टिकट देने के बारे में सोचा जायेगा जब वह पुराना कांग्रेसी होगा। जो नेता २ बार लगातार चुनाव हार गया हो उसको भी टिकट नही मिलेगी। जो कुछ श्री जोशी ने प्रेस कांफ्रेंस में एलान किया वह सब प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में तय हुआ था।
श्री जोशी के एलान से श्रीगंगानगर जिले के राधेश्याम गंगानगर,गुरमीत सिंह कुन्नर,हीरा लाल इंदौरा,विजय लक्ष्मी बिश्नोई,सोहन लाल नायक के साथ साथ संगरिया से हारे के सी बिश्नोई की टिकट कट ही गई। इनमे से एक दो से बात चीत हुई तो ऐसे लगा जैसे इनके अन्दर से राम निकल गया हो।

चित्रकार बच्चे

videoश्रीगंगानगर में आज बीकानेर डिवीजन एल आई सी यूनियन,लाइफ इंश्योरेंस एजेंट यूनियन,दूरदर्शन कल्याणी क्लब की ओर से इंदिरा वाटिका में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आयोजन कई स्कूलों के सैंकडों बच्चों ने भाग लिया। सभी ने अपनी अपनी भावनाओं को चित्र के माध्यम से कागज़ पर उतर अपनी कल्पनाशीलता का परिचय दिया। कोई बच्चा बिगड़ते पर्यावरण से चिंतित था तो किसी ने गणपति के प्रति आस्था दिखाई। कोई मकान सपने साकार कर रहा था किसी ने नेचर के विभिन्न रूपों को कागज़ साकार कर रखा था। कार्यक्रम में श्री निर्मल जैन,संदीप बंसल,प्रेम तंवर आदि व्यवस्था में लगे थे।

Monday 1 September 2008

टीवी और टीआरपी

टीवी और टीआरपी : 17 अगस्त से 23 अगस्त 2008
स्टार न्यूज को बधाई। सिर्फ खबरों के दम पर आगे बढ़ने के लिए पिछले कई महीनों से कमर कस चुके इस चैनल की संपादकीय टीम अपनी मेहनत पर गर्व कर सकती है। इस हफ्ते की रेटिंग में स्टार न्यूज को इंडिया न्यूज के साथ संयुक्त रूप से नंबर दो की पोजीशन हासिल हुई है। और ये दोनों चैनल संयुक्त रूप से नंबर दो होने के साथ नंबर एक के लिए तगड़ी चुनौती पेश कर चुके हैं क्योंकि नंबर एक चैनल आज तक इनसे बस .6 अंक ही आगे है। मतलब एक अंक से भी कम की बढ़त। आज तक पिछले हफ्ते के मुकाबले .4 अंक नीचे गिरा है और वह 18.1 से 17.8 पर आ गया है जबकि स्टार न्यूज पिछले हफ्ते 15.6 से छलांग लगाते हुए 17.2 की रेटिंग हासिल कर ली है।
कुल 1.6 अंकों की बढ़त इस हफ्ते में दर्ज की है। वहीं इंडिया टीवी ने भी टीआरपी बढ़ा ली है। उसने कुल एक अंक की छलांग लगाते हुए 16.2 से बढ़ते हुए 17.2 पर पहुंच गया है। अगर यह चाल बरकरार रही तो अगले हफ्ते की रेटिंग में स्टार न्यूज या इंडिया टीवी में से कोई भी नंबर एक पर पहुंच सकता है। चौथे नंबर पर चल रहा जी न्यूज भी .8 की छलांग लगाते हुए इस हफ्ते 10.5 पर पहुंच गया है। आईबीएन 7 थोड़ा सा नीचे गिरा है। सबसे ज्यादा धड़ाम हुआ है एनडीटीवी इंडिया। उसने .9 अंक इस हफ्ते खोए हैं। न्यूज 24 भी कमतर हुआ है। देश में पहले १२ स्थानों की स्थिति ये रही। १-आज तक २-इंडिया टीवी ३-स्टार न्यूज़ ४-जी न्यूज़ ५-आई बी एन ६-एनडीटीवी ७-न्यूज़ २४ ८-समय ९-तेज १०-डी डी 1१-लाइव इंडिया और १२ पर न्यूज़ इंडिया। [साभार--भड़ास ४ मीडिया डॉट कॉम ]

सार्थक लोकतंत्र


चुटकी
"राजा" नटवर सिंह जब
दलित मायावती की
शरण में आते हैं,
तो भारत में लोकतंत्र
के मायने
सार्थक हो जाते हैं।
--गोविन्द गोयल, श्रीगंगानगर