Tuesday 28 February 2012

कुछ तो बोल दे

लब तू खोल दे
कुछ तो बोल दे,
मन की सारी
गाँठे प्यारी
एक दिन
मुझ संग खोल दे।

Tuesday 21 February 2012

प्रभारी मंत्री ने की बस जनसुनवाई

श्रीगंगानगर-राजस्थान सरकार के जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत प्रभारी मंत्री विनोद कुमार ने कलेक्ट्रेट में जन सुनवाई की। पहली अर्जी सिंचाई विभाग के बारे में थी। मगर विभाग के एससी नहीं थे। उनके स्थान पर जो अधिकारी आया उससे पूछा गया तो वह कहने लगा कि एससी ही कर सकते हैं। उसके बाद एससी को बुलाया गया। बिजली वालों के लिए तो खुद कलेक्टर अंबरीष कुमार ने मेज बजा कर आवाज लगाई। लेकिन कोई होता तो आता। ऐसे ही शिक्षा विभाग के अधिकारी की आवाज लगती रही। सुनवाई के समय मदद करने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता सभाकक्ष में थे। बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। मंत्री ने अर्जी ली,उसकी बात सुनी,अधिकारी से पूछा और अर्जी उसके हवाले कर दी। या तो मंत्री ने खुद कह दिया कि अधिकारी से मिल लेना या खुद अधिकारी बोल पड़ा,मुझसे आकर मिल लेना। जो भी लोग आए उनके काम लंबे समय से अटके हैं। किन्तु उनको आज भी यह बताने वाला कोई नहीं था कि उनका काम कब होगा। मंत्री के साथ कलेक्टर,एसपी, विधायक राधेश्याम गंगानगर,संतोष सहारण,कांग्रेस नेता राजकुमार गौड़,कुलदीप इंदौरा,पृथ्वी पाल सिंह सहित अन्य नेता पदाधिकारी भी थे। अधिकांश तो बस उपस्थिति लगाने के लिए ही थे। जिनकी सुनवाई करनी थी वे बाहर थे अपनी बारी के इंतजार में।

अव्यवस्था रही मंत्री की सुनवाई में

श्रीगंगानगर-प्रभारी मंत्री की जन सुनवाई के समय शुरू में तो काफी अव्यवस्था का माहौल रहा। शोर इतना अधिक था कि कौन क्या कह रहा है सुना ही नहीं जा रहा था। बड़ी संख्या में लोग एक साथ अंदर आ गए। पत्रकार भी बहुत अधिक थे। एसपी ने कलेक्टर के इशारे पर पत्रकारों से पूछा भी। एसपी ने पत्रकारों को बाहर ले जाने के प्रयास भी किए। लेकिन पार नहीं पड़ी। कुछ समय बाद बार बारी से एक एक करके बुलाने का सिलसिला शुरू हुआ तब कहीं जाकर कोई व्यवस्था बनी। जो जनप्रतिनिधि देरी से आए उनको उनके अनुकूल स्थान पर बैठने के लिए कई बार कुर्सी खिसकानी पड़ी। जिला प्रमुख के आने पर तो कलेक्टर,एसपी को भी कुर्सी छोडकर उनके लिए कुर्सी लगवानी पड़ी।

शंकर पन्नू पहुंचे किसानों के साथ प्रभारी मंत्री के दरबार में

श्रीगंगानगर- कांग्रेस के इस शासन किसानों की सुनवाई नहीं हो रही। अगर किसानों की सुनवाई होती तो कांग्रेस नेता पूर्व सांसद शंकर पन्नू को खुद गन्ना उत्पादकों का प्रतिनिधिमंडल लेकर सुनवाई के लिए प्रभारी मंत्री के दरबार में नहीं आना पड़ता। वे अन्य कांग्रेस नेताओं की तरह अंदर नहीं बैठे थे। शंकर पन्नू गन्ना उत्पादकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। वे बिना के किसानों के साथ अंदर गए। मंत्री से बात की। उनसे बाहर आकर किसानों से मिलने को कहा। प्रभारी मंत्री सुनवाई बीच में छोडकर बाहर आकर गन्ना उत्पादकों से मिले। गन्ना उत्पादकों ने शुगर मिल की हालत से मंत्री को अवगत करवाया। उनका कहना था कि मिल की हालत खराब है। गन्ना लिया नहीं जा रहा। चूंकि किसान अधिकतर श्रीकरनपुर क्षेत्र के थे इसलिए पृथ्वीपाल संधु भी उनके साथ हो लिए।

काली पट्टी लगा पत्रकार मिले प्रभारी मंत्री से

श्रीगंगानगर-नगर के कुछ पत्रकारों ने काली पट्टी लगाकर प्रभारी मंत्री से बात की। उनका कहना था कि नगर विकास न्यास उनको रियायती दर पर भूखंड नहीं दे रहा जबकि सरकार के आदेश हैं। न्यास अध्यक्ष ज्योति कांडा ने कहा कि वे रिजर्व प्राइज़ पर भूखंड देने को तैयार हैं। इस मसले पर कई पत्रकारों की कांडा जी से बोल चाल भी हुई। कांग्रेस नेताओं ने बीच बचाव किया। न्यास के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़ ने प्रभारी मंत्री को बताया कि इसके लिए पीआरओ की चेयरमेनशिप में कमेटी बनाकर निर्णय लिया जाए। कांडा जी ने भूखंड से वंचित पत्रकारों को बात चीत के लिए बुलाया है।

Sunday 19 February 2012

तंत्र,टोटके,अश्लील वाक्यों की पुस्तक को कलेक्टर ने बताया लाभप्रद

श्रीगंगानगर-टोटकों,तंत्र विद्या का बेशक बहुत महत्व होता होगा। भूत प्रेत के बारे में भी सभी की अपनी अपनी मान्यता होगी। अश्लीलता भी पर्दे में गरिमामय होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जिला कलेक्टर जाने अनजाने इस प्रकार की बात को बढ़ावा दें और ऐसी बातों को समाज के लिए लाभप्रद बताएं। क्षेत्र में सोने,चांदी,डायमंड के जाने माने व्यवसायी,अनेकानेक सामाजिक धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए शामलाल जैन ने अरोग्यता का रहस्य नामक पुस्तक का लेखन व संकलन किया। कहने को तो इसमें आयुर्वेद से बीमारियों का इलाज की जानकारी है। परंतु इस पुस्तक में टोटकों के रूप में ऐसे ऐसे अश्लील वाक्य हैं कि उनको यहां लिखना भी संभव नहीं।ये टोटके आयुर्वेद से संबन्धित नहीं हो सकते। विज्ञान के इस युग में जब भूत,प्रेत जैसे अंधविश्वासों को दूर करने के प्रयास होते हैं, स्कूल से लेकर कॉलेज तक की शिक्षा में। ऐसे दौर में पुस्तक यह बताती है कि भूत प्रेत की बाधा कैसे बचा जा सकता है। तंत्र की जानकारी भी इस पुस्तक के कई पृष्ठों पर हैं। इस प्रकार की पुस्तक मेलों,बस अड्डे और रेलवे स्टेशन की स्टाल पर बिका करती हैं। किसी गर्ल्स कॉलेज के उत्सव में उसका विमोचन करवा खुले में वितरित करना उचित नहीं कहा जा सकता। मगर शाम लाल जी को कौन रोकता! वे कॉलेज के कोषाध्यक्ष जो हैं। इसलिए ऐसा हुआ। इसी पुस्तक के बारे में जिला कलेक्टर अंबरीष कुमार का संदेश भी है। जिसमें उन्होने कहा है कि यह पुस्तक समाज के लिए लाभप्रद सिद्ध होगी। पाठकों को इस पुस्तक के माध्यम से अपने जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। समाज खुशहाल एवं निरोगी जीवन व्यतीत कर सकेगा.........आदि आदि। शायद जिला कलेक्टर ने पुस्तक की पाण्डुलिपि पढे बिना ही संदेश दे दिया। अगर वे पढ़ते तो उन वाक्यों को जरूर हटवाते जो अश्लील हैं। तंत्र और टोटकों को बढ़ावा देने वाले हैं। अन्यथा संभव है संदेश देने से मना कर देते। इसी प्रकार के संदेश नगर परिषद आयुक्त हितेश कुमार और नगर परिषद सभापति जगदीश जांदू के भी हैं। शामलाल जैन का इतना नाम तो है ही कि कोई उनको संदेश के लिए कोई नाराज क्यों करने लगा। शामलाल जैन का उद्देश्य भी कोई गलत नहीं हो सकता। वे गर्व से कहते हैं कि जो कुछ लिखा है एकदम सही है....मैं दिखा सकता हूं कौनसी किताब से लिया। सही तो होगा....लेकिन उनके जैसे व्यक्ति के लिए ऐसे वाक्यों सार्वजनिक रूप से बांटी जाने वाली पुस्तक में लिखना ठीक है क्या?

Thursday 2 February 2012

शंकर पन्नू ने करवाई कांडा की मुर्दाबाद,हाय-हाय


श्रीगंगानगर-पूर्व सांसद शंकर पन्नू के सच्चे शब्दों ने नगर विकास न्यास अध्यक्ष ज्योति कांडा की मुर्दाबाद...हाय-हाय करवा दी। समारोह का जायका बिगाड़ दिया। गले में पड़े फूलों माला चुभने लगी। करनी मार्ग पर रेल फाटक उदघाटन समारोह था। छोटा सा शामियाना लगाया गया। हीरा लाल इंदौरा,शंकर पन्नू जैसे बड़े कांग्रेस नेता बुलाए गए। पूरी यूआईटी थी। साइड में वे परिवार भी खड़े थे जिनके मकान तोड़े थे। शंकर पन्नू ने बोलना शुरू किया। वे उनको देख कर बोले...कब्जा किया जब पूछा था क्या...तब अंदर कर देते तो.... इसके बाद पन्नू जी ने क्या बोलना था। वे परिवार शोर मचाने लगे जो मकानों की उम्मीद लगाए थे। शोर मचाते हुए मंच के करीब आ गए। पुलिस ने उनको दूर किया। वे जयोति कांडा मुर्दाबाद...हाय हाय करने लगे। हीरा लाल इंदौरा ने मंच से समझाया। ज्योति कांडा ने भाषण दिया। किसने सुनना था। मुर्दाबाद हाय हाय होती रही। कुछ क्षण बाद यूआईटी चली गई। नेता भी रवाना हो लिए। मकान मांगने वालों ने वहाँ लगे होर्डिंग को निशाना बनाया। पहले दोनों होर्डिंग पर ज्योति कांडा की फोटो पर गीली मिट्टी फेंकी। फिर फोटो पर पत्थर मार कर छेद किए। मन नहीं भरा तो होर्डिंग उखाड़ डाले। उनकी चिंदी चिंदी कर जिसके हाथ में जो आया वह उसे लेकर चलता बना। कोई बांस ले गया। किसी के हाथ लोहा आया। कोई फ़्लेक्स समेत कर चलता बना।जितना समय होर्डिंग को बनाने में लगा होगा उससे कम समय में उसको तार-तार करने में लगा। सभी खुश। शंकर पन्नू भी और कांडा जी भी। शंकर पन्नू की बात तो सच्ची थी किन्तु मौका और स्थान सही नहीं था। केवल उदघाटन होता तो मीडिया में उतना प्रचार नहीं होता। जितना अब होगा। इसीलिए तो कहते हैं कि कड़वा सच पत्थर के समान होता है,मगर वह नुकसान पत्थर की चोट से भी अधिक करता है।