Tuesday, 23 September, 2008

जख्म गहरा है


--- चुटकी ---
नवजोत सिद्धू जरुरत से
कुछ ज्यादा ही हँसता है,
अन्दर का जख्म बहुत
अधिक गहरा लगता है।
------गोविन्द गोयल

2 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सही ऑबजरवेशन!!

Suresh Chandra Gupta said...

हो सकता है.
किसी ने कहा है,
'तुम इतना क्यों मुस्कुरा रहे हो?
क्या बात है जो छिपा रहे हो?'