Wednesday, 17 September, 2008

अंजान से मुलाकात

बीस साल की पत्रकारिता में आम से लेकर सुपर वीवीआईपी से मुलाकात हुई। मगर आज की मुलाकात उन सबसे अलग थी। इस सज्जन से कल रात को ही मिलने का समय ले लिया था। सुबह आठ बजे का। आठ बजने से पांच मिनट पहले उनके घर के बाहर से उनको फ़ोन किया। परिचय दिया तो बोले-आठ बज गए क्या,आप घर बैठो मैं आता हूँ। कुछ क्षण बाद उनके सहयोगी,सेवक,कर्मचारी[ जो भी था] ने मुझे बुलाकर बैठा दिया। मिलने का समय देने या लेने के बाद इन्तजार करना या करवाना मेरे स्वभाव में नहीं है,ये बात मेरे से परिचित सब जानते हैं मगर आज ना जाने क्या बात थी कि मैं बैठा रहा ।[किसी बहुत जरुरी कारण से अपवाद हो सकता है दोनों और से] पता लगा कि जिनसे मिलने आया हूँ वो खेलने गए हैं। उनका आना लगभग ९ बजे हुआ। दो तीन मिनट के बाद हम दोने एक दुसरे के आमने सामने थे। उन्होंने मेरा पूरा नाम और जन्म की तारीख पूछी। उसके बाद वे मेरा हाथ देखने लगे। कई मिनट के बाद उन्होंने मेरे जीवन में जो कुछ हुआ वह संक्षेप में बता दिया। यहाँ तक कि मेरे बच्चो कि संख्या भी। यह भी कि उसमे कितनी लड़कियां हैं। आगे आने वाले
कुछ परिवर्तन भी बताये।हैरानी इस बात की कि इस से पहले हम दोनों ने एक दुसरे की सूरत तक नहीं देखी थी। कभी फ़ोन पर बात नहीं हुई थी। मेरे और उनके कोई दोस्त कोमन नहीं थे,हमारे रिश्तेदार तक एक दुसरे को नहीं जानते थे। इस के बावजूद उन्होंने वह बता दिया जो कुछ मैंने अपनी जिन्दगी में खोया पाया।यह भी कहा जाता है कि नसीब तो उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते ,मगर जो कुछ उनसे में मैंने महसूस किया वह भी मेरे लिए कुछ अचम्भा नहीं था। वह कोई साधू,संत,मुनि, बाबा नहीं है। मगर उसकी विद्या,जानकारी,अपने सब्जेक्ट पर पकड़ सम्मान और सराहना के काबिल है। जिन से मिला वे सज्जन एक आम आदमी है। सम्भव हुआ तो उनसे इसी माध्यम से सभी से मिलवाने की कोशिश की जायेगी। वैसे तो वक्त बलवान होता है। क्या पता क्या हो।

1 comment:

Dileepraaj Nagpal said...

AAp Purani Aabadi M Asopa Jee Se Milkar Aaye Hain Shayed. Agar Nahi o Kripya Btaye Ki Aap Kisse Mile...?