Wednesday, 17 September, 2008

जंगल राज है क्या

श्रीगंगानगर के कलेक्ट्रेट के आस पास आज जो कुछ देखने को मिला उससे तो ऐसा लगता है कि यहाँ कुछ भी हो जाए कोई मालिक नहीं है। आज दोपहर को नर्सिंग विद्यार्थी हड़ताल का बैनर उठाये आए। पहले तो वो हाय-हाय करते रहे,फ़िर सड़क पर बैठकर रास्ता जाम कर दिया। वहां पुलिस प्रशासन का कोई आदमी नहीं था। आने जाने वाले परेशान हो गए। उनके पास रास्ता बदल लेने के अलावा कोई चारा नहीं था। लीडर विहीन भीड़ से कौन मगजमारी करे। जो लड़के-लड़कियां आन्दोलन कर रहे थे उनके पता ही नहीं था कि कौन सा अधिकारी कहाँ बैठता है और ज्ञापन किस को देना है। यह सब वहां हुआ जहाँ से सभी अधिकारी कर्मचारी अपने अपने ऑफिस आते जाते है। नगर में कौन कब रास्ता रोक कर बैठ जाए किसी को कोई मतलब नहीं है। ना तो उनको जो बेवजह रास्ता रोकते हैं और ना प्रशासन या जनप्रतिनिधियों को। मीडिया से जुड़े लोग जब उनकी फोटो लेते हैं तो उनमे और जोश आ जाता है। जब सबसे बुद्धिजीवी माने जाने पत्रकार ही रास्ता रोकने से नहीं हिचकिचाते तो फ़िर इनको कोई क्या कहे।लगता है यह नगर लगातार बेलगाम और लावारिश होता जा रहा है।

2 comments:

manvinder bhimber said...

bhole bhaale perdhershakariyon ki achchi tasveer khinchi hai

दिनेशराय द्विवेदी said...

पूरे देश में यही हो रहा है भाई, यहाँ कोटा में भी जब तक कलेक्ट्री परिसर के गेट तक कोई जलूस नहीं पहुँचता किसी को कोई परवाह नहीं।