Monday, 1 September, 2008

सार्थक लोकतंत्र


चुटकी
"राजा" नटवर सिंह जब
दलित मायावती की
शरण में आते हैं,
तो भारत में लोकतंत्र
के मायने
सार्थक हो जाते हैं।
--गोविन्द गोयल, श्रीगंगानगर

1 comment:

Anonymous said...

अबे घोंच्चु ! किस युग का आदमी है तु ! आज भी जातपात को श्रेष्ठता की कसौटी माने हुए है । फेंक दे एसे विचार ।