Friday 10 October 2008

लाखों बाकी हैं

----- चुटकी-----
एक रावण जला दिया
लाखों बाकी हैं सरकार,
उसको मारा राम ने
कौन करे इनका संहार।
---- गोविन्द गोयल

5 comments:

Anil Pusadkar said...

सत्य वचन मुनिवर ।

seema gupta said...

भरत अब पादुका नही
सुपारी दे के बेठा हे
रावण से नही मरा
तो लछमन के हाथो तरेगा

ha ha ha very well said...

Regards

Udan Tashtari said...

सटीक प्रश्न, मुनिवर!!

योगेन्द्र मौदगिल said...

अच्छा व्यंग्य
एक सलाह दूं यदि आप अन्यथा न लें
नारद उपनाम बहुत ही अच्छा है
गोविंद नारद लिखा करें
शेष जैसी आपकी इच्छा

Suresh Chandra Gupta said...

आज का रावण अलग सत्ता नहीं है. वह तो हम सब के अन्दर जिन्दा है. उसे अगर मारना तो अपने अन्दर झांकना होगा और उसे अपने अन्दर से बाहर निकालना होगा. बाहर निकलते ही वह मर जायेगा.