Saturday 25 October 2008

राजनीति के माध्यम से सेवा









राजनीति का रास्ता बहुत अधिक काँटों वाला है। ये कहा जाता है कि राजनीति आम आदमी के बस की बात नहीं। इस में फ्रेश और गैर राजनीतिक परिवार के सदस्य को कोई नहीं पूछता। श्रीगंगानगर में इन बातों को झूठा साबित करने में लगे हैं प्रहलाद राय टाक। स्नातकोतर,विधि स्नातक प्रहलाद टाक राजनीति के पथरीले रास्ते पर बिल्कुल फ्रेश हैं। मगर उनको कोई कह नही सकता कि राजनीति में उनका ये पहला कदम है। उनका फ्रेश होना उनकी अतिरिक्त क्वालिटी बन गया है। प्रहलाद टाक समाज सेवा भावी तो पहले से ही हैं अब वे राजनीति को सेवा का माध्यम बना कुछ अधिक करना चाहते हैं। इस के लिए फिलहाल श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना है। उनके या उनके परिवार का इस से पहले राजनीति से कोई लेना देना नहीं था। प्रहलाद राय का परिवार कभी भी राजनीति में एक्टिव नहीं रहा। उन्होंने गत कई सप्ताह में अपने आप को बीजेपी के कार्यकर्त्ता के नाते इतना एक्टिव किया कि आज वे बीजेपी के बड़े लीडर्स की नजरों में हैं। राजनीति में किस तरह टिक पायेंगें इसके जवाब में प्रहलाद टाक कहते है- मेरा मकसद राजनीति को व्यवसाय बनाना नहीं है। मैं तो पहले भी सामाजिक रूप से एक्टिव था और अब और अधिक एक्टिव रहूँगा। मैं तो समाज सेवी ही कहलाना पसंद करता हूँ। मुझे आशा है कि जन जन फ्रेश को आगे बढने को मौका देगा । फोटो-१-अपने साथियों के साथ प्रहलाद टाक। फोटो-२-बीजेपी लीडर राजेन्द्र सिंह राठौर के साथ। फोटो-३-बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष श्री माथुर के साथ। फोटो-४- बीजेपी के प्रदेश प्रभारी गोपी नाथ मुंडे के साथ प्रहलाद राय टाक ।

5 comments:

Udan Tashtari said...

प्रहलाद राय टाक को शुभकामनाऐं.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

bhagwan se prarthna hai ki uneh rajnitik bectiria se bachai. har admi jo rajneti main pahli baar aata hai vah bhi pariwarbad ka shikar ho jata hai .aur jinka pariwar nahi hota vah DATTAK pariwar bana leta hai.

राज भाटिय़ा said...

आपको दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाये !

Dr. Kumarendra Singh Sengar said...

राज भी नीति भी, राजनीति से कोई लेना देना नहीं,

Suresh Chandra Gupta said...

@मेरा मकसद राजनीति को व्यवसाय बनाना नहीं है। मैं तो पहले भी सामाजिक रूप से एक्टिव था और अब और अधिक एक्टिव रहूँगा।

मैं भी यही मानता हूँ. सेवा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए और राजनीति उस का एक माध्यम. अगर कोई राजनीति में नहीं है तो भी सेवा कर सकते हैं. कुछ लोग सेवा के लिए पद की शर्त लगाते हैं. ऐसे लोग समाज के दोस्त नहीं हैं.

ऐसे सभी सही सोचने वालों को मेरी शुभकामनाएं.