Tuesday 28 October 2008

नारदमुनि को मेनका का भ्रम

नारदमुनि दिवाली पर नगर भ्रमण कि निकले । चारों ओर आनंद ही आनंद बिखरा हुआ था। उल्लास और उत्साह की महक इस आनंद को बढ़ा रही थी। मंदी का कहीं अता पता नहीं दिख रहा था। परम्परागत और आधुनिक परिधानों से लक दक हर उमर के लोग लोग रौनक में चार-पाँच चाँद एक साथ लगा चुके थे। नारदमुनि भी नारायण नारायण करते इधर से उधर ,उधर से इधर आ जा रहे थे। अचानक नारदमुनि ने देखा कि हर कोई एक ही और देख रहा है। नारदमुनि नारायण नारायण तो भूल गए और उस तरफ़ देखा जिस ओर सब देखा देखी कर रहे थे।नारदमुनि चक्कर खा गए, अरे ! ये मेनका यहाँ कहाँ से आ गई? कमर तो उसके पास थी ही नहीं, बाकी के साइज़ लेडिज टेलर होता तो देखते ही बता देता। जींस टॉप पहने हुए,जुल्फें खुली,नारदमुनि भी नारायण नारायण की बजाय अहा ! वाह !,आह ! करने लगे। थोड़ा निकट जाकर देखा तो उस मेनका के स्वर्ग की मेनका होने का वहम मिट गया। नारदमुनि की टेंशन और बढ़ गई, ये मेनका नहीं तो वैसी ही अनुपम सुंदरी यहाँ धरती पर और वाह भी भारत पाक सीमा के निकट श्रीगंगानगर में क्या कर रही है। पडौस में तो श्रीमान जरदारी रहतें हैं। नारदमुनि उसको देखते ही रहे, और उनको काम भी क्या था? नारदमुनि ने देखा कि बाइकों पर सवार कई कितने ही भंवरे कीट पतंगों की तरह उसके आगे पीछे घूमने लगे। अपने हर अंग पर हुस्न का बोझ लिए वह बाला भी सब समझ रही थी इसलिए कभी कभी वहउनकी ओर देख उनके दिल की हसरत पूरी कर देती थी। इस कारण कई बाइक वाले आपस में टकराते टकराते बचे। इस से पहले कि नारदमुनि उसके पास जाकर उस से ये पूछते कि हमारी स्वर्ग वाली मेनका तुम्हारी रिश्तेदार है क्या, उनको ऊपर से सिग्नल मिल गया चुप रहने का। ऊपर से सिग्नल मिलने के बाद किसकी हिम्मत होती आउट ऑफ़ दी वे काम करने की। सो नारदमुनि फ़िर नारायण नारायण करने लगे। वह यूँ ही बिजलियाँ गिराती रही।
बाद में भेद खुला कि वह कोई लड़की नहीं बल्कि किसी डांसर ग्रुप का डांसर है। उसका चेहरा मोहरा बिल्कुल लड़कियों जैसा है इसलिए कभी कभी वह किसी त्यौहार और मेले ठेले में ऐसे किलोल करके लोगों को हैरत में डालता रहता है।

2 comments:

Udan Tashtari said...

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

समीर लाल
http://udantashtari.blogspot.com/

jayaka said...

Dipawali ki hardik shubh-kamanaayen!