Monday 1 April 2013

बी डी के अलावा कुछ नहीं है जमींदारा पार्टी में


श्रीगंगानगर-श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ 11 विधानसभा सीटों में से कोई ऐसी नहीं जहां बी डी अग्रवाल की जमींदारा पार्टी का कोई वजूद हो। चुनाव लड़ने के शौकीन जरूर अपने आप पर इस पार्टी का ठप्पा लगवाना चाहते हैं ताकि सेठ से माल तो मिले। इसके अलावा कोई राजनीतिक बात नहीं। कोई राजनीतिक हलचल नहीं। कहीं कोई तैयारी नहीं। गांव से लेकर मंडी तक यही बात है। हाल ही में गठित जमींदारा पार्टी का ना तो कहीं संगठन है और ना कोई कार्यकर्ता। कोई भी दशकों से राजनीति कर रहे व्यक्ति, परिवार तो इस पार्टी की चर्चा तक नहीं करते। किसी समय अनेकानेक नेता इस पार्टी से भय खा रहे थे। लेकिन जैसे जैसे बी डी के कार्यक्रम हुए उनका यह भय समाप्त हो गया। आज के दिन कहीं भी कोई ऐसा व्यक्ति जमींदारा पार्टी के पास नहीं है जो चुनाव जीतने की क्षमता रखता हो। जीतने की तो बात बहुत दूर...टक्कर देने की स्थिति में नहीं है। बी डी अग्रवाल की जमींदारा पार्टी गुरमीत सिंह कुन्नर को समर्थन दे, ये दावा कर कि हमारा आदमी जीत गया....नोहर में चाचान को अपनी पार्टी का बता दूसरे तीसरे नम्बर पर आने के बाद इस उपलब्धि बताए तो कोई क्या कर सकता है। कभी बी डी अग्रवाल सरकार बनाने का दावा करते थे। कुछ सप्ताह पहले प्रेस वार्ता में 50-60 सीट जीतने की बात कही। 25 मार्च को नेहरू पार्क में किसानों से कहाकि आप दस विधायक ही दे दो। राजनीतिक विश्लेषक समझ गए कि इस राजनीतिक पार्टी के पास कुछ नहीं है। इसके उम्मीदवार वोट तो खराब कर सकते हैं लेकिन जीत सकने लायक हालत में नहीं है।  बी डी अग्रवाल के साथ हर जगह राजनीति में नकारे जा चुके व्यक्ति जुड़े हैं। ऐसे व्यक्ति जिनका विश्वास ना तो कांग्रेस नेता को है ना बीजेपी को। राजनीति में विश्वसनीयता भी कोई मायने रखती ही है।

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