Tuesday 2 October 2012

अफसरशाही का राज है “शासन” पर


श्रीगंगानगर-जो सरक सरक के काम करे वह सरकार। जैसे राजस्थान सरकार। जिसे शायद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टीम नहीं बल्कि अफसरों का एक दल चला रहा है। एक तबादला। फिर उसका तबादला। तबादले पर तबादला। जो करना है एक बार कर दो। ये क्या थोड़ी देर पहले कुछ,कुछ पल बाद कुछ और। आईएएस की सूची आई। रवि जैन को कलेक्टर लगाया। कितने ही व्यक्तियों ने गिफ्ट तैयार की। समाज के नाम पर मिलेंगे। गिफ्ट देंगे। रिश्ते बनाएंगे। अब ये गिफ्ट किसी और के काम आएगी। कितने आरएस बदले। श्रीगंगानगर में नगर विकास का सचिव लगाना है ये भूल गए। एक डीएसओ था, जैसा भी था था तो सही। उसको हटा दिया। वैसे बूआ जाऊँ जाऊँ कर रही थी...फूफा लेने आ गया। तीन सीओ हटाए एक लगाया। डीजीपी हरीश मीणा की मेहरबानी से अशोक मीणा पोने दो साल निकाल गए। तब से लाइन में लगे राजेन्द्र ढिढारिया को अब मौका मिला श्रीगंगानगर सीओ लगने का।अब एससी/एसटी प्रकोष्ठ और ग्रामीण सीओ के लिए सरकार या तो किसी डिजायर का इंतजार कर रही है या फिर इन पदों के लायक उनके पास कोई अफसर नहीं।वरना लिस्ट में सौ नाम हों वहां दो और बढ़ जाएं तो कौनसा कंप्यूटर लिस्ट निकालने से मना कर देता है। कंप्यूटर मना नहीं करता.....बड़े अफसर की पूछ कम हो जाती है। सभी कुर्सी एक साथ भर गई तो विधायक इनकी लल्ला लोरी कैसे करेंगे।  अब जब आप तबादले कर ही रहो हो तो कोई सीट खाली क्यों रखते हो। लगे हाथ सभी काम क्यों नहीं निपटाते। आगे दौड़। पीछे छोड़। यही नीति सरकार की शह पर अफसरों ने बना रखी है। और नहीं तो क्या! अब जो खाली सीट हैं उनको भरना तो पड़ेगा ही। जैसे भी अफसर हैं उनसे। जो खाली रह गई सीट उसके लिए फिर लिस्ट निकालनी पड़ेगी। फिर वही प्रक्रिया...वही मगज़मारी..... । श्रीगंगानगर में तो खैर कोई फर्क नहीं पड़ता कोई अफसर है या नहीं। किन्तु सरकार की प्रतिष्ठा पर तो असर पड़ता ही है। ये क्या सरकार हुई जो हर लिस्ट में कोई ना कोई घर खाली छोड़ देती है। उसको भूल जाती है। कई महीने तक याद ही नहीं करती कि कौनसी कुर्सी खाली रह गई। इसका चार्ज उसको....उसका चार्ज किसी को। एक कुर्सी का काम ठीक से हो नहीं पाता कि दूसरे में और उलझा दिया। अब अधिकारी उसमें अधिक रुचि लेता है जिसमें माल के साथ प्रचार मिले। लोगों को मालूम हो कि हां इस नाम का भी कोई अधिकारी है। सरकार बेचारी क्या करे....वह तो खुद अफसरों के भरोसे है। अफसरशाही पर सरकार का शासन नहीं अफसर सरकार पर शासन कर रहे हैं।

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