Friday, 5 December, 2008

फ़िर से बचपन लौट आए

शायद फ़िर से वो तकदीर मिल जाए
जीवन के सबसे हसीं वो पल मिल जाए
चल फ़िर से बनायें बारिस में कागज की नाव
शायद फ़िर से अपना बचपन मिल जाए।
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खामोशी में जो सुनोगे वो आवाज मेरी होगी
जिंदगी भर साथ रहे वो वफ़ा मेरी होगी
दुनिया की हर खुशी एक दिन तुम्हारी होगी
क्योंकि इन सब के पीछे दुआ हमारी होगी।
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कसमों से बंधी रस्में, रस्मों से बंधे रिश्ते,रिश्तों से बंधे अपने,अपनों से बंधे दिल,दिल से बंधी धड़कन, धड़कन से बंधी जान, जान से बंधे आप, आप से बंधे हम।
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जिक्र हुआ जब खुदा की रहमतों का
हमने ख़ुद को सबसे खुशनसीब पाया,
तमन्ना थी एक प्यारे से दोस्त की
खुदा ख़ुद दोस्त बन के आया।
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पल दो पल में ही मिलती हर खुशी
पल दो पल में ही मिलता हर गम
पर जो हर पल साथ निभाए
वो दोस्त मिलते हैं कम। जैसे आप सब...
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दोस्ती शब्द नहीं जो मिट जाए
उम्र नहीं जो ढल जाए
सफर नहीं जो ख़त्म हो जाए
ये वो अहसास है
जिसके लिए जिया जाए
तो जिंदगी कम पड़ जाए।

---ये सब भाव दोस्तों ने एस एम एस के द्वारा प्रकट किए हैं।

3 comments:

सीमा सचदेव said...

तमन्ना थी एक प्यारे से दोस्त की
खुदा ख़ुद दोस्त बन के आया।
बहुत ही सुन्दर भाव | नारदमुनि जी आप घबराते क्यों है |हम हैं न सबको सबका बचपन दिखाने के लिए |
चलो आपको भी आपके बचपन मे लिए चलते है | बस आप यहां
www.nanhaman.blogspot.com क्लिक कीजिए और पहुँच जाएँगे नन्हे से मन मे |
हाजिर है आपका बचपन आपके केवल एक क्लिक की दूरी पर | तो कभी दस्तक दीजिए नन्हा-मन मे |

राज भाटिय़ा said...

खामोशी में जो सुनोगे वो आवाज मेरी होगी
जिंदगी भर साथ रहे वो वफ़ा मेरी होगी
दुनिया की हर खुशी एक दिन तुम्हारी होगी
क्योंकि इन सब के पीछे दुआ हमारी होगी।
बहुत खुब, एक एक शव्द दिल के पास
धन्यवाद

दिगम्बर नासवा said...

दोस्ती की महक को बयान करती सुंदर अभिव्यक्ति
सारे ही छंद सुंदर हैं