Thursday 21 August 2008

सबको हो जानकारी

डॉक्टर अजय मिश्रा के मामले में सभी पक्षों में जो भी समझोता हुआ है या होने को है उसकी जानकारी श्रीगंगानगर को होनी चाहिए। डॉक्टर को शहर बदर करने,उनको हॉस्पिटल से निकालने की मांग की गई। डॉक्टर को गिरफ्तार करने के लिए तीन दिन का समय दिया गया। यह समय सीमा समाप्त हो गई। समय सीमा बांधने वालो को यह बताना चाहिए कि अब वे क्या करने वाले है? जब डॉक्टर के खिलाफ आन्दोलन सार्वजानिक हुआ तो फ़िर समझोता भी होना चाहिए। जिसे जन जन को यह पता लग सके कि इस प्रकरण में किस ने क्या खोया क्या पाया।पहले भी इस प्रकार के मामलो में किसी को पता ही नही चला कि अन्दर खाने क्या लेनदेन हुआ। हाय तोबा मचाने वाले कूल कूल क्यो हो गए। डॉक्टर नरेश बंसल हो या अजय मिश्रा उनको साफ शब्दों में इस बात की जानकारी सार्वजानिक करनी चाहिए कि उन्होंने किस को कितना भुगतान इस मामले को निपटाने में किया। लेकिन ऐसा होगा इसकी उम्मीद कम ही है। किसी बड़े व्यापारी के मामला निपटाने में पाँच सात पेटी लग जाए तो कोई खास फर्क नही पड़ता। क्योंकि अगर वह मामला न निपटाए तो उसका इस से अधिक तो नुकसान हो जाता है। श्री जयदीप बिहानी हो या श्री जगदीश जांदू,इन्होने जन जन को अपने साथ करने का काम करना है और डॉक्टर को अपना व्यापार, इस लिए विवाद तो समाप्त होना ही है और होना भी चाहिए। लेकिन यह तो सबको पता लगना ही चाहिए कि आख़िर विवाद निपटा कैसे और किस किस ने इस विवाद को निपटाने में अहम् पार्ट अदा किया। अब ऐसा क्या हो गया कि डॉक्टर अजय मिश्रा वही है जहाँ वह पहले था। जो दो दिन पहले ख़राब था एक दम से ठीक कैसे हो गया और जो समाजसेवी गुंडा था वह शरीफ हो गया। नारायण नारायण।

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