Sunday 15 November 2015

भीतर तो कड़वाहटें, बाहर करवा चौथ



हनुमानगढ़मरुधरा साहित्य परिषद की ओर से 13 नवम्बर की  शाम ढिल्लों कॉलोनी  स्थित स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में देश के ख्यातनाम गजलकार एवं दोहाकार विजेंद्र शर्मा के सम्मान में एक शाम शब्द सारथी विजेंद्र के नाम कार्यक्रम आयोजित किया। अध्यक्षता राजस्थान कॉलेज के प्राचार्य और राजस्थान आर्थिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. संतोष राजपुरोहित ने कीआकाशवाणी सूरतगढ़ के उद्घोषक राजेश चड्ढा मुख्य अतिथि थे। पत्रकार बालकृष्ण थरेजा, गोपाल झा, दीनदयाल शर्मा विशिष्ट  अतिथि थे । विजेंद्र शर्मा ने अपनी सृजन यात्रा का वृतांत प्रस्तुत करते हुए गजल व दोहे के कहन व उनकी सृजनात्मक बारीकियों पर अपने विचार व्यक्त किये और अपने चुनिंदा दोहे व गजलें प्रस्तुत कर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने आज के बदलते परिवेश में पति पत्नी के सम्बन्धों पर कटाक्ष करते हुए दोहा 'जग जाहिर होती नहीं, इस रिश्ते की थोथ, भीतर तो कड़वाहटें, बाहर करवा चौथ, सुनाया तो श्रोता अपनी तालियां रोक नहीं पाए। उन्होंने पत्रकारों का आह्वान करते हुए कहांभले कलम दे हाथ में, या दे दे तलवार, मौला इनकी तू मगर, पैनी रखियो धार। क्षेत्र में फसलों के खराब हो जाने और किसानों के वर्तमान हालत पर जब ये दोहा 'कितना हुआ किसान का, पता करो नुकसान, पटवारी के आ गई, आँखों में मुस्कान सुनाया तो हॉल तालियों से गूंज उठा। विजेंद्र शर्मा के कविता पाठ के बाद वरिष्ठ साहित्यकार ओम पुरोहित कागद ने दोहाकार विजेंद्र शर्मा के कृतित्व पर तथा डॉ. प्रेम धींगड़ा ने उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कवि नरेश मेहन, अनिल जांदू, राजूसारसर राज, मनोज देपावत, हरीश हैरी, संजय शिल्प, एम.ए.राठौड़, डॉ. शीतल धूडिय़ा, राजू रामगढिय़ा, भारतेंदु सैनी, मनीष जांगिड़, विनोद यादव, जितेंद्र बठला ने कवि विजेंद्र शर्मा की सृजन यात्रा पर सिलसिलेवार विचार व्यक्त किए। विजेंद्र शर्मा के साहित्यिक योगदान के लिए  वर्ष 2015 का कुं.चन्द्रसिंह बिरकाळी सम्मान प्रदान किया गया। मरुधरा साहित्य परिषद की ओर से यह सम्मान प्रतिवर्ष एक साहित्यकार को दिया जाता है। डॉ. संतोष राजपुरोहित ने कहा कि राजस्थान कॉलेज में प्रकृति के चितेरे कवि कु. चन्द्रसिंह बिरकाळी के नाम पर हिंदी साहित्यपीठ की स्थापना की गई है। बालकृष्ण थरेजा ने कहा कि हनुमानगढ़ जिले के महाविद्यालयों के हिंदी विभागों की ओर से जिले के साहित्यकारों पर लघु शोध के साथ साथ एम फिल व पीएचडी स्तर के शोध करवाये जाने चाहिए। परिषद के उपाध्यक्ष अनिल जांदू व सचिव नरेश मेहन ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संयोजन ओम पुरोहित कागद ने किया ।

No comments: