Monday 26 November 2012

सबसे पहले हम की हौड़ से हुई सबको टेंशन


श्रीगंगानगर- आगे निकलने हौड़ और सबसे पहले हम के चक्कर में मीडिया कई बार ऐसे खबर प्रसारित कर देता है जिससे हजारों हजार लोगों को टेंशन हो जाती है। ऐसा करने वाले ये नहीं सोचते कि उनकी बात  कहां तक जाकर असर करती है। वे इस बात को भी भूल जाते हैं कि खबर पिटे तो पिटे लेकिन जो भी प्रसारित,प्रकाशित किया जाए उस पर कोई संदेह ना करे। उन्हे इस बात का भी ध्यान नहीं रहता कि अधूरी जानकारी देने से तो बेहतर है कि कुछ ना दिया जाए। परंतु मीडिया में ऐसे व्यक्तियों की कोई कमी नहीं है जिनको इन बातों से कोई मतलब नहीं। वे समाज,सामाजिकता,दायित्व सबको को अपनी पत्रकारिता के बाद समझते हैं। उन्हे इस बात से कोई लेना देना नहीं कि जो जितना अधिक प्रभावशाली होता है उसकी ज़िम्मेदारी भी उतनी ही अधिक होती है। लेकिन हम क्यों हमारे कर्तव्यों की बात करें। हम तो हमारे अभिव्यक्ति के अधिकारों को ही देखते,सुनते और मानते हैं। इसी की वजह से गत दिवस  श्रीगंगानगर के लोग कई घंटे तक हैरान परेशान और चिंतित रहे। इसकी वजह थी एक न्यूज चैनल द्वारा जल्दबाज़ी में दी गई गलत जानकारी। चैनल ने पट्टी में सरदारशहर के पास बस-ट्रक की टक्कर में सभी मृतकों को श्रीगंगानगर का बता दिया। बस,किसी नगर को परेशान करने के लिए इतना तो काफी था। जिस नगर को  एक साथ 14 व्यक्तियों के दुर्घटना में मरने की जानकारी मिली हो तो वहां के लोगों की मनोदशा का अंदाजा लगाना कोई मुश्किल नहीं है। यहां के निवासियों ने या जिस किसी शहर में गंगानगर से संबंध रखने वाले किसी  व्यक्ति ने जैसे ही चैनल की खबर देखी /पढ़ी उसने तुरंत दूसरों को फोन कर घटना की जानकारी दी। नेपाल तक के व्यक्ति ने श्रीगंगानगर फोन करके अपने परिजनों से घटना के बारे में पूछा। लोग सुबह का जरूरी काम काज छोड़ कर यह पता करने लग गए कि मरने वाले कौन कौन और किस मोहल्ले के थे। कुछ ही देर में यह खबर पूरे शहर में हो गई। हर कोई खबर से चिंतित। लेकिन ऐसा कोई जरिया नहीं जिससे ये मालूम हो सके कि मरने वाले कौन थे। मीडिया से जुड़े व्यक्तियों को धीरे धीरे घटना की जानकारी मिली तो पता लगा कि सभी मृतक श्रीगंगानगर के नहीं थे। तब कुछ तसल्ली हुई। ऐसा नहीं कि उनको घटना का दुख नहीं था,था लेकिन उतना जितना किसी दूसरे शहर में हुई घटना से होता है। जिसका जिस किसी  व्यक्ति,स्थान से जितना संबंध होता है मन के भाव भी उसी के अनुरूप खुशी,शोक,दुख,सुख,पीड़ा,आनंद महसूस करते हैं। बस,यही हुआ था उस दिन श्रीगंगानगर वालों के साथ।

2 comments:

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (28-11-12) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

नारदमुनि said...

aapka aabhar pradeep ji