Thursday, 8 December, 2011

कांग्रेस में सत्ता के तीन केंद्र गौड़,जांदू और कांडा

श्रीगंगानगर- ज्योति कांडा अग्रवाल के यूआईटी अध्यक्ष बनने का मतलब केवल इतना ही नहीं है की पहली बार अग्रवाल समाज को किसी पार्टी ने महत्व दिया है। इसके अलावा भी बहुत कुछ है। जो हाल फिलहाल बेशक किसी को दिखाई ना दे किन्तु विधानसभा चुनाव से पहले वह दिखाई भी देगा जो अब अधिक दूर नहीं दिखते। शहरके राजनीतिक मिजाज को समझने वालों से चर्चा करने पर यह पता लगता है की अब यहां कांग्रेस के तीन सत्ता केंद्र हो गए हैं।राधेश्याम गंगानगर जब कांग्रेसी हुआ करते थे उस समय तक केवल और केवल राधेश्याम ही सत्ता के पहले और आखिरी केंद्र थे। तब से ले कर आज तक बहुत कुछ बदल गया।राधेश्याम के हृदय परिवर्तन के बाद अशोक गहलोत ने राजकुमार गौड़ को दूसरा मौका दिया। अफसोस वह अपने आप को एक मात्र केंद्र नहीं बना सके या उनके आस पास के लोगों ने उनको ऐसा नहीं करने दिया। 2008 में जो उनके पास था उसमे भी कमी आ गई। 2009 में सभापति बनने के बाद जगदीश जांदू ने उसको अपनी और लपक लिया। कांग्रेस में वापसी ने गौड़ के प्रभाव को और कम किया। एक दो सभापति,दूसरा हर किसी को ओबलाइज करने की नीति। ये अलग बात है कि 2009 के मुक़ाबले जांदू का जनाधार बहुत अधिक कम हुआ है। परंतु चूंकि उनके पास भोग के लिए बहुत कुछ है इसलिए भीड़ तो होनी ही है। अब बात करें ज्योति कांडा की। वे पहली बार किसी पद पर आए हैं। किन्तु राजनीति से उनके परिवार का नाता बहुत पुराना है। 1977 में उनके पिता मदनलाल कांडा ने विधानसभा की टिकट ठुकरा दी थी। साढ़े तीन दशक बाद उनका बेटा यही टिकट लेने के प्रयास ना करे ये संभव नहीं। हां अगर डेढ़ ,दो साल की चेयरमेनी भी खुश हो गए तो बात अलग है। लक्ष्य टिकट है तो सत्ता का तीसरा केंद्र बनना तय है। कांग्रेस ने विकल्प तो दे ही दिया। राजकुमार गौड़ के पास नहीं जाना चाहते मत जाओ। जांदू के कार्यशैली पसंद नहीं,दफा करो। ज्योति कांडा अग्रवाल को आजमाओ। उसके पास जाओ। बस इसी प्रकार से कोई सत्ता का केंद्र बन जाता है। अब ज्योति कांडा, जिसने अपने नाम के आगे आज अग्रवाल और लिख कर पता नहीं क्या संदेश देने की कोशिश की है, इन सब बातों पर कितना गौर करते हैं? जनता से कैसा व्यवहार करते हैं? यह उन पर निर्भर करता है। ये सभी नेता एक मंच पर बैठ कर चाहे एकता के कितने भी भाषण दे मगर ये सच है कि तीनों की आँख आज के बाद टिकट पर होगी। किसी ने कहा है-हम ना बदलेंगे,वक्त की रफ्तार के साथ,हम जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा।

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