Thursday 20 May 2010

अँधेरा है,रोशनी नहीं है


अँधेरे का अपना
कोई
अस्तित्व नहीं है,
बस,
रोशनी नहीं है
इसलिए अँधेरा है,
वरना तो
जिधर देखो
उधर
सवेरा ही सवेरा है।

8 comments:

दिलीप said...

bilkul sach baat kahi...bahut sundar

गिरीश बिल्लोरे said...

एक सुखद चिंतन है गोयल जी

sangeeta swarup said...

वाह...बहुत सुन्दर और सकारात्मक सोच...

डॉ. मनोज मिश्र said...

नारायण-नारायण.

KK Yadava said...

वरना तो
जिधर देखो
उधर
सवेरा ही सवेरा है।
...सकारात्मक अनुभूति...बढ़िया लगी.
___________
'शब्द सृजन की ओर' पर आपका स्वागत है !!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

क्या बात है ! इस सुन्दर सकारात्मक रचना के लिए बधाई !

उम्मेद गोठवाल said...

जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि........अन्धेरे पर उजाले की जीत की सुन्दर व सशक्त अभिव्यक्ति।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

kya baat hai ..ise kahte hain ummid... behad positive soch .. :)