बड़े से बड़े लक्ष्य को पाने के लिए जो सबसे जरुरी है, वह है एक कदम आगे की ओर बढ़ाना। ऐसा ही कुछ किया है यहाँ के तेरापंथ किशोर मंडल ने। मंडल के युवकों ने घर -घर,स्कूल-स्कूल जाकर बड़ों,छोटों को पटाखे ना चलने हेतु प्रेरित किया। विद्यार्थियों को पटाखे ना चलने का संकल्प करवाया। उनसे शपथ पत्र भरवाए। मंडल ने सभी को पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। ऐसा नहीं है कि किशोर मंडल के इस अभियान से लोग पटाखे चलाना छोड़ देंगे। सम्भव है संकल्प करने वाले भी दिवाली के दिन अपने संकल्प को भूल जायें। हाँ, एक दो ने भी संकल्प की पूर्ति की तो यह किशोर मंडल के अभियान की सफलता की ओर पहला कदम होगा। मंजिल दूर है, रास्ता काफी कठिन है। मगर ये भी है कि आसान काम तो कमजोर लोग किया करते हैं। फ़िर जिसने चलाना शुरू कर दिया उसे मंजिल जरुर मिलती है। शर्त इतनी है कि वह रुके नहीं।
'हमार' व 'फोकस' ने मनीष से नाता तोड़ा
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9 months ago
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नारदमुनि
नारायण नारायण करता हूँ मांगू सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर।
श्री कृष्ण को प्रणाम करके यदि यात्रा प्रारंभ की जाए तो विजय प्राप्त होती है| सेवा करके भूल जाओ | जब भी आप उदास हो तब ॐ का उच्चारण करे | जब परिस्थितिया विपरीत हो तो सब कुछ भगवान पर छोड़ दो | जब कुछ सन्देह हो , लिख लो । हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिये जिसे हम संसार मे देखना चाहते हैं । आओं हम मौन रहें ताकि फ़रिस्तों की कानाफूसियाँ सुन सकें । छोटा आरम्भ करो , शीघ्र आरम्भ करो । ईश्वर से प्रार्थना करो, पर अपनी पतवार चलाते रहो। सारी चीजों के बारे मे कुछ-कुछ और कुछेक के बारे मे सब कुछ सीखने की कोशिश करनी चाहिये | हँसते हुए जो समय आप व्यतीत करते हैंवह ईश्वर के साथ व्यतीत किया समय है। यदि बुद्धिमान हो , तो हँसो । जब मैं स्वयं पर हँसता हूँ तो मेरे मन का बोझ हल्का हो जाता है | -– टैगोर सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये । प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये ; यही सनातन धर्म है ॥ यदि आपको रास्ते का पता नहीं है, तो जरा धीरे चलें | स्वतंत्र वही हो सकता है जो अपना काम अपने आप कर लेता है। –विनोबा चिड़ियों की तरह हवा में उड़ना और मछलियों की तरह पानी में तैरना सीखने के बाद अब हमें इन्सानों की तरह ज़मीन पर चलना सीखना है। - सर्वपल्ली राधाकृष्णन सोचना, कहना व करना सदा समान हो। यदि किसी असाधारण प्रतिभा वाले आदमी से हमारा सामना हो तो हमें उससे पूछना चाहिये कि वो कौन सी पुस्तकें पढता है । नरम शब्दों से सख्त दिलों को जीता जा सकता है | – सुकरात यदि आप इस बात की चिंता न करें कि आपके काम का श्रेय किसे मिलने वाला है तो आप आश्चर्यजनक कार्य कर सकते हैं । मानसिक बीमारियों से बचने का एक ही उपाय है कि हृदय को घृणा से और मन को भय व चिन्ता से मुक्त रखा जाय ।
6 टिप्पणियाँ:
पटाखों को चलाने से रोकने का बच्चो द्वारा किया गया,सराहनिय काम ।
Chote bachcho dwara yah pryas sarahniy hai..
बच्चे ही सभी को पटाखे जलाने से रोक रहें हैं। यह समझाइस वास्तव में बड़े काम की चीज है भैया छोटे हो या बड़े सभी इसको जरूर माने।
बहुत सुंदर बात
आप को ओर आप के परिवार को दिपावली की शुभकामानायें.
आप को ओर आप के परिवार को दिपावली की शुभकामानायें.
दिपावली की शुभकामानायें.
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