Saturday 31 October 2009

कनस्तर का आटा

---- चुटकी-----

जब से ख़त्म
हुआ है
कनस्तर में आटा,
तब से
पसरा हुआ है
घर में सन्नाटा।

6 comments:

Rajey Sha said...

हमारे घर में
कनस्‍तर खाली होने पर
सन्‍नाटा नहीं होता


बच्‍चे कनस्‍तर बजाने लगते हैं

बीवी नश्‍तर नहीं दि‍खाती
बस अजनबी से ताने देने लगती है
हमें मजबूरि‍यों में

वही पुरानी
गालि‍यों और शर्मिन्‍दगी वाली नौकरी

फि‍र याद आने लगती है



जहां मालि‍क

छोड़ी गयी औरतों को

कार्यालयीन रखेलें बनाये हुए है

और आदमि‍यों के नाम पर

रोबटों की भीड़ लगाये हुए है


जब कनस्‍तर खाली होता है

मैं डर जाता हूं
कि‍ खाली कनस्‍तर से
बच्‍चों की चीखें न नि‍कल आयें

और चाहता हूं कि‍ न चाहते हुए भी

मेरे कदम

उन अय्य़ाश के रोबटों में
शामि‍ल होने के लि‍ए
बढ़ जायें।


http://rajey.blogspot.com/

राज भाटिय़ा said...

नारयण नारायण अजी हमे डिनर पर बुला कर अब खाली कनस्तर दिखा रहे हो... नारायण नारायाण

प्रदीप कांत said...

और हो भी क्या सकता है?
नारायण नारायण ...

शरद कोकास said...

यह गरीब के घर का कनस्तर होगा ..

gc said...

NARD MUNI JEE BAHUT ACHA JEEVAN CHALTA RAHE ISKA NIYAM HAI, PARANTU USME RANG TAMASHE NA HON ACHE-BURE NA HON TO KISI KI PARAKH NAHIN HO SAKTI AAPKA GUDH VAYNG ACHA HAI SHAYAD YAHI JEEVAN KI AAPADHAPI HAI.

ANSUN HAIN APNE LIYE GAM JO SAHE HAIN,
KHUSHIYAN APNE YAHAN JAHAN APNA GHAR HAIN.

gc said...

NARD MUNI JEE BAHUT ACHA JEEVAN CHALTA RAHE ISKA NIYAM HAI, PARANTU USME RANG TAMASHE NA HON ACHE-BURE NA HON TO KISI KI PARAKH NAHIN HO SAKTI AAPKA GUDH VAYNG ACHA HAI SHAYAD YAHI JEEVAN KI AAPADHAPI HAI.

ANSUN HAIN APNE LIYE GAM JO SAHE HAIN,
KHUSHIYAN APNE YAHAN JAHAN APNA GHAR HAIN.