Tuesday 24 March 2009

हिन्दुओं की बात करना गुनाह हुआ

चुनाव आयोग ने वरुण गान्धी को टिकट ना देने की सलाह देकर अपने आप को पता नहीं क्या साबित करना चाहता है। ना जाने कितने ऐसे "नेता" हैं जिन पर दर्जनों आपराधिक मुकदमें चल रहें हैं। उनके चाल चलन पर उंगुलियां उठतीं हैं। इसके बावजूद वे चुनाव लड़तें हैं,जीतकर विधायक,सांसद बन जाते हैं। चुनाव आयोग इनको टिकट दिलाने से क्यों नही रोकता। मीडिया में बार बार ऐसे "नेताओं" के बारे में बताया और दिखाया जाता है। चुनाव आयोग चुप्प। इसका तो सीधा सा यही मतलब है कि बस हिन्दुओं के पक्ष में बात करने वाला ही सबसे बड़ा देशद्रोही है। हिन्दुओं की वकालत करने वाला साम्प्रदायिक है। हिंदू हित की बात करने वाला विधायक या सांसद बनने के लायक नहीं। हिन्दुओं के बारे में सोचना भी गुनाह है। ऐसी क्या कमी है हिन्दुओं में? क्या जुल्म कर दिया हिन्दुओं ने? इंसान अपने भले की बात भी ना करे। यह कैसा वातावरण है? यह कोई किसी की चाल तो नहीं? मुस्लिम समाज की वकालत करने वाले नेता वन्दनीय और पूजनीय हो गए।हिंदू की बात करने वाला साम्प्रदायिक। कितनी हैरानी की बात है कि देश के कई कानून केवल हिन्दुओं पर ही लागू होतें हैं। कानून भी जाति,धर्म के अनुसार लागू किए जा रहें हैं। हिंदू-मुस्लिम भाई भाई हैं तो भेद-भाव क्यों? दोनों को सभी जगह समानता क्यों नहीं मिलती? अगर कोई इस बारे में बात करता है तो देश में बवाल क्यों मचाया जाता है। सही बात करने वाले की पीठ थपथपाई जानी चाहिए। यहाँ चुनाव आयोग सलाह देते हैं कि उसको टिकट ना दी जाए। चुनाव आयोग जी थोडी सलाह मुलायम सिंह यादव,लालू प्रसाद यादव,मायावती,राम बिलास पासवान,अमर सिंह जैसों को भी दे दो आपका क्या घट जाएगा। इस देश में तो अब नया नारा होना चाहिए--
जो हिंदू विरोधी
बात करेगा,
वही देश पर
राज करेगा।

7 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आप भी कुतर्क करने लगे। कोई अपराध करे तो क्या उस से सब को अपराध करने का अधिकार मिल जाता है। अपराधी को सजा देने की मांग करें। हाथ पैर काट डालने की बातें करने के पहले बात करनी चाहिए कि राज्य की मशीनरी फेल हो गई है। हिन्दुओं की बात करने वालों ने खुद देश पर शासन कर के क्या कर लिया? जिन राज्यों में उन की खुद की सरकारें हैं वहाँ क्या हो रहा है? राजस्थान में पिछले पाँच बरस में क्या हुआ है आप भी जानते हैं।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

@ द्विवेदी जी:- मुझे निजी तौर पर इन नारद जी से कोई सरोकार नहीं है पर द्विवेदी जी क्या आप भी राज्य की मशीनरी के सफल होने के पक्ष में खड़े हैं? जनाब आप कब जुडीशियल करप्शन पर लिखने का साहस कर पाएंगे? क्या आप इस मुगा़लते में हैं कि देश में सह्ज भाव से विधि का शासन चल रहा है? कुतर्क भी तो तर्क का ही एक प्रकार है अगर इन्होंने करा तो आपको गुरेज़ क्यों है? आप मत मानिये बस...। सच तो ये है कि इस देश में लोकतंत्र का छ्द्म स्वरूप मौजूद है तो क्या आप भी उसके हिमायती हैं और संविधान का जो रूप मौजूद है आप भी उसमें रिफ़ार्म्स नहीं चाहते जिसका कि सहज ही दुरुपयोग होता है जैसा कि जज आनंद सिंह व उनके परिवार के मामले में हुआ है अगर साहस है तो उनपर हुए १२४ ए के मुकदमें के बारे में जानकारी प्राप्त करके लिखिये आपको याद होगा कि यही सारा खेल इसी एक्ट के अंतर्गत शहीद भगत सिंह और स्वर्गीय बाळ गंगाधर तिलक पर भी अंग्रेजों ने करा था......।
जय हिंद

Suresh Chiplunkar said...

नारायण, नारायण… क्या आप नहीं जानते कि शहाबुद्दीन, अबू सलेम यहाँ तक कि अफ़ज़ल गुरु भी चुनाव लड़ सकते हैं, सिर्फ़ वरुण गाँधी को यह "पाक" सलाह दी गई है और बाल ठाकरे का मताधिकार छीना गया था… क्योंकि सिर्फ़ ये दोनो ही "पापी" हैं… जय हो… जय हो…

पंगेबाज said...

भारत मा को डायन कहो , बंगलादेशी मुसलमानो को भारतीय नागरिकता दिलाओ , पाक आतंकवादियो को अपने घर मे रखो . आतंकवादी वारदातो के बीच जब सेना उन से मोर्चा ले रही हो तब अंदर जाकर आतंकवादियो से कुशल क्षेम पूंच कर अपने मिलने वालो के साथ वापिस आये . संसद से लेकर न्यायालय तक उनके पक्ष मे खडे हो उन्हे मानवीय आधार पर छोडने की कोशिश मे लगे रहो .भगवा आतंकबाद का नाम उंचा करो आतंकवादियो की सहायता करो यही है आज की देश भक्ती . चाहे चुनाव आयोग हो या देश के न्यायालय कोई अछूता नही है राजनीतिज्ञो कि काली छत्र छाया से . तुम मुझे सहारा दो मै तुम्हे पोस्ट दूंगा , वैसे भी देश मे ज्यादा तर कुतर्क ही चलते है . तर्क नही . और मुझे नारद जी का तर्क कुतर्क नही दिख रहा है

dr. mukesh said...

hello

आलोक सिंह said...

जो हिन्दू की बात करेगा वो सत्ता के गलियारे से दूर रहेगा इसका मतलब तो ये है की हिन्दुओं के पक्ष में बात करने वाला ही सबसे बड़ा देशद्रोही है.

इंडियन said...

Bhagwan Dwivediji ko sadbuddhee de, jinhein apni aankh ke saamne ka ghor andhera bhee nahee dikhayee de raha hai. Apradh to Kidwai ji ne bhee kiya election commission unhein koi salaah kyun nahee de raha hai ? aap baat karte hain ki hinduwadi party ne raaj karke kya kar liya? Jis vyavastha ko bigaadne ke liye aap jaise logo ne congress ko 50 saal se zyadaa ka waqt diya aap kyu ummeed karte hai ki wo bina spasht bahumat ke hinduwadi party 5 saal mein theek kar degee?