Monday, 28 September, 2015

बड़े साहब ने दिये सभापति को दिये 10 मेँ से 4 नंबर


श्रीगंगानगर। नगर परिषद सभापति अपने समर्थक कुछ पार्षदों, पार्षद पतियों के साथ जिले के बड़े साहब से मिलने गए थे जन हित के मुद्दे पर, लेकिन बड़े साहब ने पार्षदों से रेटिंग पूछ ली सभापति की। खुद ने बिना पूछे सभापति को 10 मेँ से 4 नंबर दिये। ये सब जन प्रतिनिधि गए तो थे अपनी सुनाने, सुनानी तो क्या थी, उनकी सुन कर आ गए। बड़े साहब ने पूछ लिया पार्षदों से, 10 मेँ से कितने नंबर देना चाहोगे सभापति को। सवाल ही ऐसा था, खामोशी छा गई। पुत्रवधू पार्षद के प्रतिनिधि के तौर पर आए मास्टर बलदेव सिंह बोले, 10 मेँ से 10 । उनकी हां मेँ किसी ने हां नहीं मिलाई। कुछ ने बात बदलने की कोशिश की। परंतु बड़े साहब ने अपने पास बैठे हुए सभापति की पीठ पर प्यार से  धोल जमाते हुए कहा, मैं तो 10 मेँ से 4 नंबर दूंगा। बात यहीं नहीं रुकी। उनका कहना था, शहर की हालत इसकी वजह से ऐसी हुई है, नगर परिषद के कारण। इसे गुंडा एक्ट मेँ बंद कर जोधपुर भेजूँगा। साथ मेँ ये भी कहा कि वे ये सब प्यार से कह रहे हैं। क्योंकि प्यार मेँ सब संभव है। बड़े साहब ने शहर के बारे मेँ खूब बात की। ड्रेनज सिस्टम कैसा होना चाहिए।  किस शहर मेँ कैसा है। सड़क कहाँ कैसी बनानी चाहिए। डेंगू हो तो क्या करें।  सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर कैसे हैं। बहुत कुछ। कब्जों का जिक्र भी हुआ। किसी ने बीच मेँ बोलने की कोशिश की तो उसे ये कह कर बैठा दिया कि पहले मेरी सुनो। सभापति के पास बोलने को कुछ था ही नहीं। कभी किसी पार्षद की तरफ देखते, कभी किसी की तरफ। उन्होने ये भी कहा कि वे फंड लाने की कोशिश करेंगे। जहां से भी हो सकेगा, इसके लिए प्रयास करेंगे। पार्षद भी कहने लगे, आपके नेतृत्व मेँ शहर मेँ सुधार होना चाहिए।
कमला बिशनोई केस मेँ बड़े साहब ने किया पंचायती से इंकार
श्रीगंगानगर। जिले के बड़े साहब ने पार्षद कमला बिशनोई के खिलाफ दर्ज मुकदमे मेँ पंचायती करने से साफ साफ इंकार कर दिया। यह इंकारी सभापति अजय चान्डक के साथ गए पार्षदों, और  पार्षद पतियों के सामने आई। ये सभी शहर हित मेँ उनसे मिलने गए थे। इसी दौरान किसी ने इस मुद्दे को भी ले लिया। इस बार बड़े साहब ने चतुराई से कहा, उनको इसमें पंचायती करने का अधिकार नहीं है। वैसे भी यह मामला  80 प्रतिशत उनके क्षेत्राधिकार मेँ नहीं है। और केवल 20 प्रतिशत के लिए मैं अंगुली नहीं करता। साहब बोले, आयुक्त तो आत्महत्या की बात कर रहे थे। वे आहत थे और बार बार  सुसाइड करने की बात कह रहे थे। उनको मनाया गया। साहब बोले, मैंने उनसे ये कहा कि तुम मर गए तो मैं भी गया समझो। साहब ने कई कानूनी नुक्तों से सभापति और उनके साथ आए सभी को खामोश कर दिया। उन्होने उदाहरण देकर बताया कि ऐसे ही किसी  मामले मेँ एक डीएम ने पंचायती की थी। उनको नुकसान उठाना पड़ा था। कई साल परेशान रहे। साहब का कहना था कि इस प्रकार के मुकदमों मेँ पंचायती नहीं होती। इतना कुछ सुनने के बाद पार्षद कृष्ण स्याग बोले, साहब, ये तो कह सकते हैं कि इस मामले मेँ आपका रुख सकारात्मक है। अब साहब क्या कहते! हां कह दिया। सब कुछ। वैसे इन सबके साथ खुद कमला बिशनोई नहीं थी। सभापति के साथ आए अधिकांश पार्षदों ने कमला बिशनोई के मुद्दे को कोई खास महत्व नहीं दिया। वैसे खुद सभापति भी खामोश ही रहे।



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