Wednesday 9 January 2013

देश का आक्रोश समाप्त और गुस्सा हुआ ठंडा


 श्रीगंगानगर-छोटे कस्बे से लेकर महानगर तक के युवाओं के आक्रोश पर कोहरा पड़ गया। व्यवस्था परिवर्तन के लिए उनके दिलों में प्रज्जवलित आग ठंडी हो गई। देश भर जलायी गई हजारों मोमबत्ती शीतलहर में बुझ गई। तो क्या यह सब बासी कढ़ी में उबाल था या फिर न्यूज चैनल की लाइव कवरेज का कमाल। एक लड़की पर हुए घिनोने अत्याचार से क्षुब्द बिना किसी के इशारे पर अपनी मर्जी से हजारों की संख्या में सड़कों पर न्याय की मांग के लिए सड़कों पर उतरे युवा आज कहाँ हैं? कल एक बेटी की इज्जत का सवाल था तो आज क्या  देश की मर्यादा,इज्जत,मान सम्मान और अखंडता का प्रश्न नहीं है? वह देश जिसे सब भारत माता कहते हैं। उसे मातृ भूमि के नाम से पुकार गौरव का अनुभव करते हैं। ये शब्द उसी देश के लिए हैं जिस पर भगत सिंह,राजगुरु,सुखदेव के बाद भी कितने ही जवान शहीद हो गए। आज उससे भी दर्दनाक दास्ताँ है शहादत की। पाक हमारे घर आकर ना केवल हमारे सैनिकों का मारता है बल्कि उनकी गर्दन  धड़ से अलग कर हमें चुनौती देता है। देश चुप्प हैं। विपक्ष ने  बयान दे अपना धर्म पूरा कर लिया और  सरकार ने चेतावनी दे अपना। लेकिन देश के युवाओं का वो जज्बा कहां है जो कुछ दिन पहले एक बेटी के लिए उमड़ आया था। वह आक्रोश,गुस्सा कहां है जिसने सरकार को घुटनों के बल झुकने के लिए मजबूर कर दिया था। वे युवा कहां हैं जिन्होने जंतर-मंतर से लेकर राजपथ तक को अपनी शक्ति का अहसास करवा दिया था। लोग कुछ भी कहें,ये घोर अचरज की बात है कि पाक की इतनी घिनोनी हरकत के बावजूद लोगों का खून नहीं खोल रहा। लगभग पूरा देश चुप है। जिस सोशल साइटस को ऐसे आंदोलनों का जन्मदाता कहा जाता रहा है वहां भी चुप्पी है। पाक सेना का शिकार हुए सैनिकों के सम्मान में कोई आयोजन नहीं। ना श्रद्धांजली का कार्यक्रम। ना उनकी आत्मा की शांति के लिए कोई प्रार्थना। सभी चौक खाली हैं। कोई भी मोमबत्ती लेकर नहीं आया। सैनिकों की शहादत पर युवाओं की ऐसी बेरुखी,हैरानी पैदा करती है। क्या इन शहीदों का परिवार उस बेटी के परिवार जैसा नहीं है क्या जिसके लिए पूरा देश न्याय के लिए उमड़ पड़ा था। लाठी खाई। आंसू गैस का सामना किया। ठंडे पानी से नहाए। शहीद हुए सैनिकों के लिए क्या एक मोमबाती भी नहीं युवाओं के पास! युवा इतना समय भी नहीं निकाल सकते कि उनको नमन कर सके और सरकार को नमस्कार! सरकार को समझाने के लिए इतना वक्त भी नहीं उनके पास कि जो कुछ वह कर रही है वह कायरता है। क्योंकि लातों के भूत कभी बातों से नहीं माना करते। कारगिल, संसद पर आक्रमण, मुंबई हमला.....आखिर कब तक।

6 comments:

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

हमारे देश का दुर्भाग्य है...सुन्दर चित्रण...उम्दा प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

Anita (अनिता) said...

गुस्सा हम सभी हैं..! आपका गुस्सा भी जायज़ है...! एक के बाद एक प्रहार हो रहे हैं हमारे धरती पर, हमारे दिलों पर...
~सादर!!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सच है सैनिकों को उचित सम्मान नहीं मिलता ... वीर शहीदों को नमन

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 10 -01 -2013 को यहाँ भी है

....
सड़कों पर आन्दोलन सही पर देहरी के भीतर भी झांकें.... आज की हलचल में.... संगीता स्वरूप. .

रेखा श्रीवास्तव said...

आपका आक्रोश शत प्रतिशत सही है लेकिन क्या हमारे दिल इससे क्षुब्ध नहीं है लेकिन ये राजनीति की घिनौनी चालें मित्रता के नाम पर अपने वीरों की बलि दे रहे हैं . कैसी मित्रता और कैसे पडोसी। अभी तक तो अपने घर में बेटियां होने की दुहाई देकर संवेदना जाहिर कर रहे थे और अब बताएं किस नेता ने सीमा पर अपना बीटा खोया है या फिर सेना में भेज है। वे दर्द क्या जाने?

नारदमुनि said...

आपके विचारों का स्वागत है। आशा है आपका सानिध्य मिलता रहेगा।