Sunday 13 March 2011

छोटी छोटी बातें

श्रीगंगानगर--जिंदगी में छोटी छोटी बातें भी बहुत रस प्रदान करती हैंरस कैसा! ये पढ़ने,सुनने वाले पर निर्भर करता हैकहते हैं -जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत ........... । जयपुर से रींगस के बीच आजकल अलौकिक दृश्य मन को पुलकित कर देता हैयह दृश्य है खाटू श्याम,खाटू नरेश के प्रति श्रद्धा रखने वालों कायात्रियों के रेले के रेले श्याम के रंग में रंगे खाटू के दरबार में जा रहे होते हैंइनके पास होती हैं बड़ी बड़ी ध्वजाएंअलग अलग रंगों की ये पताकाएं ऐसा आभास दिलाती हैं जैसे प्रकृति के सभी सुन्दर और शुभ रंग इनमे समाहित हो गए होंफाल्गुनी बयार में जब ये लहरातीं है तो उस सड़क से गुजरने वाले लोगों के दिलों में श्रद्धा,आस्था,भक्ति का समन्दर उमड़ने लगता हैजी करता है कि वह भी इन पथिको के साथ पथिक हो श्याम के रंग में रंग जायेलेकिन सभी तो बाबा के दरबार में पहुँच नहीं सकतेकहते हैं जिसको बाबा बुलाते हैं वही जाते हैंखाटू नरेश के इन बन्दों के लिए थोड़ी थोड़ी दूर पर ठहरने,चाय,पानी,अल्पाहार,भोजन की व्यवस्था हैबड़े बड़े सेठ सेवादार बनकर इन पथिकों को खिलते नहीं बल्कि मनुहार करके परोसते हैंजिनके पास ऐसा कुछ नहीं वह अपने घर के सामने से गुजरने वाले इन यात्रियों का पथ सुगम करने के लिए सबरी की तरह पथ साफ़ कर देता हैकिसी के प्रति आस्था,श्रद्धा का इस से बड़ा सबूत और क्या हो सकता है
जयपुर की ही एक और बात कर लेते हैंपुलिया कंट्रोल रूम के सामने तिराहे पर कई यातायात पुलिस के को बन्दे ड्यूटी पर हैंकई वाहनों के साइड में यह कह कर करवाते हैं कि उन्होंने ने नियमो का पालन नहीं कियावे ये भी कहते हैं कि ऐसा वे नहीं कहते बल्कि कंट्रोल रूम वाले इधर उधर लगे कैमरे में देख कर बताते हैंउनको रोका है तो चालान भी होगाबचने के रास्ते भी हैंएक बाइक वाले ने इंचार्ज से पूछा, क्या लगेगा? दो सौ, यातायात कर्मी बोलासाइड में आओ, बाइक वाले ने गरिमा दिखाईपुलिस वाला बेशर्मी दिखाता हुआ बोला, यहीं दे दोमेरे पास बहुत हैकोई चिंता नहींबाइक वाले ने वहीँ दो सौ रूपये दिएपुलिस वाले ने ठाठ से जेब गर्म कीपुलिस कंट्रोल रूम के सामनेजहाँ कैमरे लगे हुये हैंइन कैमरों में इस प्रकार के दो सौ रूपये तो शायद ही नजर आते होंरोका तो हमें भी थालेकिन यह कहकर कि आप तो काम के आदमी हो जाने दियाअब ये अभी तक समझ नहीं आया कि जो कैमरे नियमों का पालन ना करने की बात कर रहे थे वे ठीक कैसे हो गए?
नगर विकास न्यास की चेयरमैनी के लिए अनगिनत लोग सपने देख रहे हैंकिस के भाग में क्या है कौन जानता हैकिन्तु यह तो परम सत्य ही है कि गुरमीत सिंह कुनर के सम्बन्ध मुख्यमंत्री से बहुत की घनिष्ट हैंएक तरफ से नहीं दोनों तरफ सेसरकार में जिले के एक ही मंत्री हैइसके बावजूद चेयरमैनी के किसी भी तलबगार ने श्री कुनर से सम्पर्क नहीं किया हैचेयरमैनी के लिए मुख्यमंत्री श्री कुनर से बात करें या ना करें , ये अलग बात हैमगर इस में तो कोई संदेह नहीं कि श्री कुनर किसी नाम की सिफारिश करेंगे तो उस पर गौर तो अवश्य होगाविचार हमने दे दिया अब विमर्श वो कर लें जो न्यास का चेयरमैन बनने के प्रयास में हैंकिस के हाथ से क्या मिल जाये कौन जानता हैचलो होली की कुछ लाइन पढोये मेरी अपनी हैं। --" आया भरतार , ना लगाया रंगप्यासी गौरी ,लग गई अंग। "

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