Wednesday, 23 February, 2011

कलेक्टर मक्खनबाजी और असली बात


श्रीगंगानगर--कलेक्टर मैडम की जनसुनवाईभीड़ इतनी की मैडम दिखाई नहीं दे रहीउनके कहे शब्द कान में पड़ेंगे यह सोचना बेकार थाइसके लिए इंतजार करना पड़ाजिनकी सुनवाई हुई वे चले गएअब मैडम दिख भी रहीं थी और उनके कहे शब्द कानों तक पहुँच भी रहे थेनगर का एक प्रतिष्ठित आदमी आवेदन लेकर मैडम के समक्ष आयाउसने एक सरकारी कर्मचारी की शिकायत की-मैडम वह कभी ऑफिस में नहीं आताउसके अधिकारी को भी बताया मगर कुछ नहीं हुआमैडम बोली, आपको उस से क्या तकलीफ है? मुझ से उसका कान मरोड़ कर अपना काम निकलवाना चाहते होखैर, मैडम ने आवेदन रख लियाकेसरीसिंहपुर से दो तीन लोग थेएक बोला,मैडम गैस एजेंसी वाले ने इसके साथ मारपीट कीएफआईआर करवाई क्या? मैडम ने पूछामैडम कहने लगी, सरकारी एजेंसी तो है नहींवैसे भी गैस एजेंसी वाले जनता से बहुत अधिक दुखी हैंकिसी दिन छोड़ कर चले जायेंगेमैडम ने डीएस से पता करवाने का आश्वासन देकर आवेदन ले लियाएक पुराना कांग्रेसी किन्ही लोगों के साथ आयावह उनकी पीड़ा बताने लगा तो मैडम ने उस से परिचय पूछ लिया और फिर सीधे पीड़ित से मुखातिब हो गईकांग्रेसी ने बताया कि हर कलेक्टर कार्यवाही की कहता हैहुआ आज तक कुछ नहींमैडम ने टिप्पणी के रूप में कुछ लाइन कहीहमें [ पी आर भी वहीँ खड़े थे ] हंसी आईमेरी नजर में वह यहाँ लिखना गरिमा के अनुकूल नहींएक बुजुर्ग कांग्रेसी को देख मैडम बोली, आप हर जनसुनवाई के समय होते होआखिर आप हो कौन? बुजुर्ग ने अपने बारे में बताया और अतिक्रमण तोड़ने का आग्रह के साथ कहा, नाजायज कब्जे तोडना जायज नहींमैम ने कहा, अतिक्रमण तो नाजायज ही होते हैंइस प्रकार से लगभग पचास व्यक्तियों की दुःख,तकलीफ,पीड़ा से कलेक्टर मैडम रूबरू हुईंये तो थी कलेक्टर की मक्खनबाजीअब असली बात
जिला कलेक्टरअर्थात ,जिले का मालिकसरकार का जिले में सबसे बड़ा प्रतिनिधिजिस से मंत्री तक को काम पड़ता हैउसके पास कोई कब जायेगा? तभी ना जब किसी को लगेगा कि अब तो बस कलेक्टर पर ही उम्मीद हैआने वाले सच्चे भी होंगे,झूठे भीइसका पता लगा उचित कार्यवाही करना कलेक्टर का काम हैएक तरफ तो कलेक्टर सरकारी दफ्तरों में छापे मार कर यह निरीक्षण करते हैं कि कितने कर्मचारी उपस्थित हैंदूसरी तरफ कलेक्टर उस शहरी को निरुत्साहित कर रहीं हैं जो लिखित में उनको बता रहा है कि फलां कर्मचारी कभी आता ही नहींडीएस गैस उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नए नए फंडे इस्तेमाल करते हैं और कलेक्टर मैडम जनसुनवाई में ये कहती हैं कि गैस एजेंसी वाले लोगों से दुखी हैंकलेक्टर मैडम गलत हैंसीधे सीधे ये कहने की हिम्मत तो नहीं हैंलेकिन अगर वे अपने पास फरियाद लेकर आये किसी इन्सान के सामने ही दूसरे का पक्ष लेंगी तो फिर उनके पास कोई जायेगा ही क्यों? वे जाँच करवाएंपता लगवाएंअगर शिकायत करने वाला गलत है तो उसको चेतावनी देंउसके विरुद्ध कार्यवाही करेंउसको सबक सिखाएं ताकि वह आइन्दा किसी की झूठी शिकायत कर कलेक्टर जैसे अधिकारी का समय ना ख़राब करेशिकायत करते ही अपना फैसला सुना देना तो उसके साथ अन्याय है जो चल कर आपके दरबार में आया है कलेक्टर मैडमरामसनेहीलाल शर्मा"यायावार" का शेर है--हमने शीशे के घरोंदे पर अभी चन्दन मला है ,और उनके हाथ में पत्थर नहीं पूरी शिला है

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