Saturday 13 June 2009

आप नहीं होते तो.......


आप नहीं होते तो
हम,खूब अंगडाई
लेते हैं,इठलाते हैं,
आपके आते ही
छुई-मुई की भांति
अपने आप में
सिमट जाते हैं।
ये क्या है
ऐसा क्यों होता है
हम नहीं जानते,
हाँ,इतना तो है
आप के सिवा
हम किसी को
अपना नहीं मानते।

8 comments:

ओम आर्य said...

sahi hai aap nahi hote to .........lajawaab

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत खूब ,लाजवाब .

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत अच्छा लिखा,पठनीय है,

खूब अंगड़ाई लीजिए,
उनके आने से पहले,
मानते है,ये भी बता दीजिएगा,
उनके चले जाने से पहले.

AlbelaKhatri.com said...

achhi baat !

Murari Pareek said...

नारदजी नारायण नारायण कोण है वो? जिसे आप अपना मानते हैं भाई !!!!

राजन अग्रवाल said...

kisi aur ko bhi mauka dijiye

राजन अग्रवाल said...

kisi aur ko bhi mauka dijiye

Dhiraj Shah said...

कोइ किसी बारे मे कितना सोच सकता है
यह अनुमान लगाना मुश्किल है ।