Saturday 27 July 2013

जातिवाद तय करेगा दशा और दिशा आगामी चुनाव की

श्रीगंगानगर-पहले दो घटनाओं का जिक्र उसके बाद कुछ और। दोनों घटनाएँ यहां के दो प्रमुख नेताओं से संबन्धित हैं। ये दो प्रमुख नेता आज के समय में तो बीजेपी के राधेश्याम गंगानगर और कांग्रेस के राजकुमार गौड़ ही  हैं। ऐसा नहीं कि बाकी नेताओं की पूछ नहीं। उनकी भी अपनी अहमियत है राजनीति में परंतु शीर्ष पर ये ही हैं वर्तमान में। पहली घटना...नेता से सालों से घरेलू संबंध रखने वाला व्यक्ति अपने रिश्तेदार के लिए डिजायर लेने चला गया। गहरे रिश्ते थे....डिजायर मिलने में क्या परेशानी थी। नेता जी ने डिजायर तो दे दी....उसके बाद उन्होने ये पता करवाया कि इस डिजायर से उनकी जाति के बंदे पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दूसरी....नेता जी का बहुत मान करता था बंदा। उसी के भरोसा था। मन में कोई भी विचारधारा हो लेकिन वोट इसी को देना। तो जनाब बंदे का ट्रांसफर हो गया। बंदा इस पावरफुल नेता जी के घर गया। नेता जी की तबीयत थोड़ी ढीली थी...इसलिए वे आराम कर रहे थे। रिश्ते पुराने थे, बंदा आरामगाह में चला गया। बात हुई....उलाहना दिया...। वहीं नेता जी के परिवार का कोई युवक बैठा था। उसने बंदे को कहा...अब उठ जाओ....चले जाओ.....। ऐसी स्थिति में कोई गैरतमंद कैसे बैठ सकता था। बंदे के आंसू बाहर नहीं आए बस। इस घर में इतना अपमान झेलना होगा उसने कभी सोचा भी नहीं था। दोनों घटनाओं में जिनका अपमान हुआ वे दोनों अग्रवाल समाज के थे। जिसकी वजह से उनके साथ ऐसा व्यवहार हुआ वे नेताओं की बिरादरी  के थे। यह मात्र संयोग है तो बड़ा विचित्र है। अगर यह नियतन हुआ तो फिर इस नगर की अग्रवाल बिरादरी को सोच और समझ लेना चाहिए कि उनके लिए इन नेताओं के दिलों में कोई पूछ नहीं है। है तो इतनी जितनी वोट लेने के लिए जरूरी हो। बेशक दोनों नेता जात बिरादरी से दूर रहने की बात करते होंगे मगर हकीकत उक्त शब्दों में बयां की जा चुकी है। इन बातों का जिक्र कर हम ये नहीं कह रहे कि अग्रवाल बिरादरी इनको छोड़ दे, उनको पकड़ ले....इधर चली जाए उधर चली जाए। इन शब्दों का मतलब यह बताना है कि नेता अग्रवाल समाज के अपने खास बंदों को भी किस प्रकार से ट्रीट करते हैं जब उनके सामने उनकी ही बिरादरी का व्यक्ति हो। इतना ही नहीं ये शब्द इस नगर की राजनीति की दशा और दिशा की हकीकत भी है।संभव है ये विधानसभा चुनाव की जीत हार को प्रभावित करे। ये तो वे घटनाएँ हैं जो सामने आ गईं....संभव हैं ऐसी और भी हों। आस पास निगाह डालेंगे तो दिख भी जाएंगी।


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