Thursday 23 July 2009

घर में घुस गया डर

कई दिनों से हमारे घर के एक कमरे में घुसते ही मैं डर जाता हूँ। ऐसे लगता है जैसे न्यूज़ चैनल्स के अन्दर बैठे विभिन्न प्रकार के पंडित,ज्ञानी,ध्यानी,ज्योतिषी बाहर निकल कर हमें बुरी नजर से बचाने के लिए नए नए अनुष्ठान शुरू करवा देंगे। एक दो आदर्शवादी चैनल को छोड़ कर, हर कोई इन बाबाओं के माध्यम से धर्म में आस्था रखने वाले लोगों को डराने में लगा हुआ था। घर में जितने सदस्य उतनी राशियां। उनके अनुसार या तो किसी के लिए भी ग्रहण मंगलकारी नहीं और किसी की गणना के अनुसार सभी की पो बारह। अब जिसके लिए ग्रहण मंगलकारी नहीं उसका दिन तो हो गया ख़राब। वह तो उपाए के चक्कर में कई सौ रुपयों पर पानी फेर देगा। जिसके लिए ग्रहण चमत्कारी फायदा देने वाला है, वह कोई काम क्यूँ करने लगा। दोनों ही गए काम से। ना तो बाबाओं का कुछ कुछ बिगड़ा ना न्यूज़ चैनल के संचालकों का। हिन्दूस्तान में ग्रहण पहली बार लगा है क्या? सुना है हिन्दूस्तान तो पुरातन है। यहाँ तो सदियों से ग्रह -नक्षत्रों की खोज,उनके बारे में गहरी से गहरी बात जानने,समझने का काम चलता रहता है। घर के बड़े बुजुर्ग जानते हैं कि ग्रहण के समय क्या करना चाहिए और क्या नहीं। उनको यह सीख न्यूज़ चैनल देख कर नहीं मिली। यह तो हमारे संस्कार हैं। पता नहीं ग्रहण के पीछे लग कर न्यूज़ चैनल वाले क्या संदेश देना चाहते हैं। इसमे कोई शक नहीं कि लोगों में उत्सुकता होती है हर बात को जानने की, उसको निकट से देखने की। किंतु इसका ये मतलब तो नहीं कि उसकी ज्ञान वृद्धि में सहायक होने वाली जिज्ञासा को डर में बदल दिया जाए,उसकी उत्सुकता को आशंका ग्रहण लगा दें। हम तो इतने ज्ञानी नहीं, मगर जो हैं वे तो जानते हैं कि मीडिया का काम लोगों का ज्ञान बढ़ाना,उनको सूचना देना,घटनाओं से अवगत करवाने के साथ साथ उनको जागरूक करना है। यहाँ तो आजकल कुछ और ही हो रहा है। ज्योतिषी,वास्तु एक्सपर्ट,बाबा अपनी दुकान इन न्यूज़ चैनल के माध्यम से चलाते है। जो इनके संपर्क में आते हैं उनका तो मालूम नहीं, हाँ ये जरुर फल फूल रहें हैं। ग्रहण ने सभी खबरों में ग्रहण लगा दिया। देश के कितने हिस्सों में लोग किस प्रकार जी रहें हैं?उनकी जिंदगी पर लगा महंगाई का ग्रहण ना तो उनको जीने दे रहा है ना मरने। कितने ही बड़े इलाके में पानी ना होने के कारण खेती संकट में पड़ी है। खेती नहीं हुई तो इन इलाकों की अर्थ व्यवस्था चौपट हो सकती है। उसके बाद वहां होगा अराजकता का राज। भूखे लोग क्या करेंगें? सरकार अपने अधिकारियों ,मंत्रियों,सांसदों,विधायकों का पेट और घर भरेगी या इनका? खैर फिलहाल तो आप और हम ग्रहण और उसका असर देखेंगें। आख़िर ऐसा ग्रहण हमको इस जिंदगी में दुबारा तो देखने को मिलने से रहा।

14 comments:

AlbelaKhatri.com said...

bahut khoob.........
umda aalekh !

Murari Pareek said...

ग्रहण का बुरा असर देखने को मिला ! सचमुच ये ग्रहण का असर बहुत बुरा पड़ा है| आम आदमी जो धर्म में आस्था रखता है | बाबो पर विस्वास करता है | वो डरा हुआ है क्योंकि इन्ही बाबाओ ने उन्हें डराया है | अब लोग बाबो से जंतर मंतर और तंत्र लेने में लगे है| नारायण दत्त श्रीमाली के पारद यन्त्र, सिद्धि यन्त्र , पता नहीं और क्या क्या यन्त्र ले रहे हैं | मैं भी सोच रहा हूँ कोई यन्त्र ले लूँ | बाबाओ से बचाओ यन्त्र !!!!

PC Godiyal said...

नारदजी,
अगर इतने सारे न्यूज़ चैनलों की मण्डी लगाने की इजाजत दे दोगे तो उन्होंने दूकान तो चलानी ही है, आपको अन्दर की बात बताऊ, काफी पहले इंडिया टीवी कर एक प्रोग्राम देखते बक्त मैंने अपना टीवी का रिमोट तोड़ डाला था !

PREETI BARTHWAL said...

नारद जी नमस्कार,
सूर्य ग्रहण का होना किसी ङर को जन्म देगा ये तो सूर्यदेवता ने भी नही सोचा होगा। बेचारे सूरज भगवान ये सोच कर की इस गर्मी में लोगों को थोङी देर के लिए राहत दे दूं तो मैं छुप जाता हूं लेकिन असर उल्टा हो गया।

vinay said...

narad ji yeh to malum nahi ki suryagrhan ka kya asar hua parntu karntak ke gulbarga main apang aur bimar baccho par jaroor grhan lag gya,un lachar baccho ko andhvishwas ke chaltey galey tak mitti main dawa diya.

महामंत्री - तस्लीम said...

Satya wachan.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Dhiraj Shah said...

आज धर्म गुरुओ ने इतने भ्रम फैला रखा है कि आज कोइ भी कार्य करने से पहले हम मंगल और अमंगल के बारे मे सोचने लगते है । चैनल वालो ने भी कोइ कसर नही छोडी है, इसके कारण आज हर घर घर मे कोइ भी शुभ कार्य करने से पहले हम मंगल और अमंगल बारे मे हम ज्योतिष से हम पुछते है, जाहिर सी बात है कि आज घर मे घुसने से डर लगेगा ही ।

डॉ. मनोज मिश्र said...

सही है,नारायण-नारायण .

राजन अग्रवाल said...

देश के कितने हिस्सों में लोग किस प्रकार जी रहें हैं?उनकी जिंदगी पर लगा महंगाई का ग्रहण ना तो उनको जीने दे रहा है ना मरने। कितने ही बड़े इलाके में पानी ना होने के कारण खेती संकट में पड़ी है। खेती नहीं हुई तो इन इलाकों की अर्थ व्यवस्था चौपट हो सकती है। उसके बाद वहां होगा अराजकता का राज। भूखे लोग क्या करेंगें? सरकार अपने अधिकारियों ,मंत्रियों,सांसदों,विधायकों का पेट और घर भरेगी या इनका?

चिंता मत कीजिये, टीवी वाले इस समस्या के हल के लिए भी ज्योतिषों को बैठा लेंगे. किसी का दारिद्रय दूर हो या ना हो, उनका तो होता ही रहेगा. और हम और आप सिवाय गरियाने के कुछ भी नहीं कर पाएंगे.

वाणी गीत said...

काश कि ग्रहण का बुरा असर सनसनी फैलाने वाले मीडिया पर भी होता !!

gita said...

kya bat he narayn narayn grhn hlka ho ya bhari lgato sbhi ko he

adwet said...

सही विषय चुना। सही कहा।

Hemant Kumar said...

बहुत खूब,आभार।

अतुल said...

नारदमुनि जी क्यां करें चैनल की दुकानें बड़ी संख्या में खुल गयी है. इसलिए चेनल वाले धर्म के सहारे अपनी नैया पर लगा रहे हैं ओउर अपनी दुकान चला रहे हैं