Friday 10 July 2009

ईमानदारी और शराफत को चाटें क्या

ईमानदारी और शराफत, ये भारी भरकम शब्द आजकल केवल किताबों की शोभा के लिए ही ठीक हैं। ईमानदारी और शराफत के साथ कोई जी नहीं सकता। कदम कदम पर उसको प्रताड़ना और अभावों का सामना करना पड़ेगा। इनका बोझ ढोने वालों के बच्चे भी उनसे संतुष्ट नहीं होते। ईमानदार और शरीफ लोगों की तारीफ तो सभी करेंगें लेकिन कोई घास नहीं डालता। ईमानदार और शरीफ को कोई ऐसा तमगा भी नहीं मिलता जिसको बेच कर वह एक समय का भोजन कर सके। दुनियादारी टेढी हो गई, आँख टेढी करो,सब आपको सलाम करेंगें। वरना आँख चुरा कर निकल जायेंगें।

लो जी, एक कहानी कहता हूँ। एक निहायत ही ईमानदार और शरीफ आदमी को प्रजा ने राजा बना दिया। जन जन को लगा कि अब राम राज्य होगा। किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। राज के कर्मचारी,अफसर जनता की बात सुनेगें। दफ्तरों में उनका आदर मान होगा। पुलिस उनकी सुरक्षा करेगी। कोई जुल्मी होगा तो उसकी ख़बर लेगी। रिश्वत खोरी समाप्त नहीं तो कम से कम जरुर हो जायेगी। परन्तु, हे भगवन! ये क्या हो गया! यहाँ तो सब कुछ उलट-पलट गया। ईमानदार और शरीफ राजा की कोई परवाह ही नही करता। बिना बुलाए कोई कर्मचारी तक उस से मिलने नहीं जाता। राजा के आदेश निर्देश की किसी को कोई चिंता नहीं। अफसर पलट के बताते ही नहीं कि महाराज आपके आदेश निर्देश पर हमने ये किया। लूट का बाजार गर्म हो गया। कई इलाकों में तो जंगल राज के हालत हो गए। किसी की कोई सुनवाई नहीं। पुलिस और प्रशासन के अफसर,कर्मचारी हावी हो गए। जिसको चाहे पकड़ लिया,जिसको चाहे भीड़ के कहने पर अन्दर कर दिया।ख़ुद ही मुकदमा दर्ज कर लेते हैं और ख़ुद ही जाँच करके किसी को जेल भेज देते हैं। राजा को उनके शुभचिंतकों ने बार बार बताया। किंतु स्थिति में बदलाव नही आया। राजा शरीफ और निहायत ईमानदार है। वह किसी अफसर, कर्मचारी को ना तो आँख दिखाता है ना रोब। सालों से खेले खाए अफसर,कर्मचारी ऐसे शरीफ राजा को क्यों भाव देने लगे। उनकी तो मौज बनी है। राजा कुछ कहता नहीं,प्रजा गूंगी है, बोलेगी नहीं। ऐसे में डंडा चल रहा है,माल बन रहा है। उनका तो कुछ बिगड़ना नहीं। पद जाएगा तो राजा का, उनका तो केवल तबादला ही होगा। होता रहेगा,उस से क्या फर्क पड़ेगा। घर तो भर जाएगा।

बताओ,जनता ऐसे राजा का क्या करे? जनता के लिए तो राजा की ईमानदारी और शराफत एक आफत बन कर रह गई। उनकी आशाएं टूट गईं। उम्मीद जाती रही।राम राज्य की कल्पना, कल्पना ही है। राजा की ईमानदारी और शराफत पर उनके दुश्मनों को भी संदेह नहीं,लेकिन इस से काम तो नही चल रहा। राजा ईमानदार और शरीफ रहकर लगाम तो कस सकता है। लगाम का इस्तेमाल ना करने पर तो दुर्घटना होनी ही है

9 comments:

श्यामल सुमन said...

बिनु भय होहिं न प्रीत वाली बात है। कुछ भी हो ईमानदारी और शराफत को बचाये रखना है।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

Anil Pusadkar said...

नारायण नारायण ।

संगीता पुरी said...

बहुत सटीक .. लगाम का इस्तेमाल ना करने पर तो दुर्घटना होनी ही है !!

विनोद कुमार पांडेय said...

bahut hi vichar purn baten batayi hai aapne..aaj ke daur me har aadmi ke dil me khot bhara hai aur ek dusare ko piche karane ke firak me hai..

to ab koi imandari aur sarafat kahan tak nibhata rahe..

sidhe sade log ko aaj duniya jeene nahi deti hai..

bahut hi sundar ..aaj ke vastvik samaj ka charitr chitran..

badhayi...ho!!!

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ईमानदारी और शराफत को बचाए रखते हुए सजगता भी बहुत जरूरी है!!!

Murari Pareek said...

इमानदारी की इतनी दवाइयाँ बनाने के बावजूद दुनिया मैं इस रोग के रोगी कहीं न कहीं मिल ही जाते है!!!

डॉ. मनोज मिश्र said...

यह देश इमानदारी रहेगी ,तभी बचेगा भी.

ab inconvenienti said...

नुकसान ईमानदारी और शराफत से नहीं बल्कि शासन करने की बारीकियाँ न जानने और नेतृत्व गुण न होने से है. ईमानदारी और शराफत से लाभ ही होता है, बेईमान भी नेतृत्व गुण के आभाव में शासन नहीं कर पाता. नेतृत्व का गुण ईमानदारी और शराफत के साथ और भी अधिक निखर जाता है

भूतनाथ said...

जो चाटन की चीज़ है,उसे तो चाटेंगे ही ना.....हम तो चाट ही रहे हैं...आप भी चाटो....!!हा..हा..हा..हा..हा...!!