Sunday, 1 September, 2013

पर्दे के पीछे कुछ ना कुछ तो जरूर है


श्रीगंगानगर-आइये, सरकारी हॉस्पिटल में चलें जहां मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास होने वाला है। मंच पर मौजूद हैं प्रदेश कांग्रेस की राजनीति के चाणक्य और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। उनके अगल-बगल में हैं राष्ट्रीय जमींदारा पार्टी के अध्यक्ष बी डी अग्रवाल विद फैमिली। मतलब कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रही उनकी पत्नी बिमला अग्रवाल,बेटी कामिनी जिंदल। जिले के कांग्रेस नेता बैठे हैं इनके पीछे। क्यों? बात कुछ हजम नहीं हुई। अशोक गहलोत कॉलेज का शिलान्यास करने आए तो मंच पर यही दृश्य बनता है। इसके अलावा और कोई दृश्य हो ही कैसे सकता है। बी डी अग्रवाल दौ सौ करोड़ रुपए से अधिक देंगे तो उसकी खनक ना सुनाई दे ये कैसे संभव है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार फिर लाने के ख्वाब देख रहे अशोक गहलोत का बी डी अग्रवाल से मिलना राजनीतिक विश्लेषकों को अचरज में डाल रहा है। उस बी डी अग्रवाल से जिसने  कांग्रेस के खिलाफ अपनी पत्नी और बेटी को चुनाव लड़वाने की तैयारी कर रखी है। चुनाव प्रचार शुरू है। यह कोई साधारण बात नहीं है। कहीं ना कहीं ऐसा कुछ जरूर है जो पर्दे के पीछे छिपा हुआ है या छिपाया जा रहा है। कुछ ना कुछ तो है जिस पर पर्दा है। क्योंकि मंच पर ऐसा होता नहीं कि विरोधी राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष दूसरी पार्टी के सीएम को खुद के पैसे शुरू होने वाले प्रोजेक्ट के लिए आमंत्रित करे। ये तो संभव है कि कोई सामाजिक संस्था सभी राजनीतिक लोगों को किसी मंच पर एक साथ बैठा दे। परंतु ये होना मुश्किल है कि जो हो रहा है या होने वाला है। सच में यह हो गया तो फिर कलुषित होती राजनीति में एक नई शुरूआत होगी। इसके साथ ही कांग्रेस के कई स्थानीय नेताओं के हाशिये पर जाने का संकट शुरू हो जाएगा। जब सीएम गहलोत शिलान्यास समारोह में बी डी अग्रवाल की तारीफ करेंगे, जो कि उनको करनी ही पड़ेगी, तो फिर उनका क्या होगा जो यहां से कांग्रेस की टिकट मांग रहे हैं। इस कहानी में कहीं न कहीं कोई पेच जरूर है। कोई छिपा हुआ एजेंडा अवश्य है। जो दस सितंबर से पहले या उसी दिन सामने जरूर आएगा। चाहे वह शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित होने के रूप में या बी डी अग्रवाल के कांग्रेस मंच पर आने के रूप में। ये नहीं हुआ तो समझो प्रदेश में राजनीति के नए युग की शुरुआत हो गई। बी डी अग्रवाल के बाद डॉ करोड़ी लाल मीणा भी मुख्यमंत्री से मिलने जाएंगे उनको किसी कार्यक्रम में बुलाने के लिए। संभव है वसुंधरा राजे सिंधिया भी इसी बी डी अग्रवाल और डॉ मीणा के पद चिन्हों पर चल पड़े। कितना सुखद होगा यह सब देखना। दो  लाइन पढ़ो.... जेब भारी हो तो जमाना साथ आता है, खाली जेब को अब कौन बुलाता है।

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