Sunday 19 July 2009

जो चीज सरकारी है, वह चीज हमारी है

" जो चीज सरकारी है,वह चीज हमारी है। " यह जुमला हिन्दूस्तान के जन- जन में जाना पहचाना है। इस पर आम जन अमल करे ना करे लेकिन हमारे नेता जब भी मौका मिलता इसको सार्थक जरुर करते हैं। अब देखो, हिन्दूस्तान के ऐसे ३६ पूर्व केंद्रीय मंत्री,सांसद हैं, जो लोक सभा का चुनाव हार गए। लेकिन उन्होंने सरकारी बंगले खाली नहीं किए। सब के सब ऐसे हैं जो जब चाहे जहाँ चाहे कोई दूसरा बंगला खरीद सकते हैं। किंतु जो चीज मुफ्त में मिल रही हो उस पर पैसा टका खर्च क्यों किया जाए। इसलिए बैठे हैं। चुनाव कोई कुम्भ का मेला तो है नहीं जिसको आने में १४ साल लगेंगें। यहाँ तो चुनाव ही चुनाव है। कभी आम चुनाव,कभी उप चुनाव। जीतकर फ़िर से बंगला लेने के हक़दार हो जायेंगें। अब कौन बार बार बदला सदली करे।
चाहे ये बंगले ना छोडें। देश वासी इनको शर्मसार तो कर ही सकते हैं। तो हो जाओ शुरू। आज से और अभी से। सबसे पहले हम ही इनको लानत भेजते हैं। सरकारी बंगले पर कब्जा जमाये रखने वाले किसी पूर्व मंत्री या सांसद का बन्दा इसको पढ़ रहा है तो वह जाकर उनको बताये। हर ब्लोगर जहाँ तक सम्भव हो इनके बारे में लिखे। इनको बार बार चुनाव हारने का श्राप दे। इनके वोटर इनसे नाराज हो जायें। समर्थक इनको गालियाँ निकालें । शुभचिंतक इनके घर आना बंद करदें। मीडिया इनको देखते ही गली बदल ले। इनके घर के आस पास कोई प्रदर्शन भी ना हो। ना इनका लैंड लाइन फोन बजे ना मोबाइल। कोई इनको पी पी कॉल भी ना करे।
मुझे अभी तो इतना ही समझ आ रहा है। ऐसा आप सब लिखो। नई नई बात,नए श्राप।

8 comments:

श्यामल सुमन said...

इसके बाद जो श्राप बचे हैं जनता समय पर दे देगी। नाराजगी जायज है।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

डॉ. मनोज मिश्र said...

जो चीज सरकारी है, वह चीज हमारी है...
नारायण-नारायण.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अजी हम तो इस बंगलेबाज़ी पर ही लानत भेजते हैं. इनको बंगले मिलने ही क्यों चाहिए.
जीतें,
आएं,
अपना जुगाड़ बिठाएं,
हारें तो मकान खाली कर घर जाएं.
वस.

मनोज गुप्ता said...

लानत है ऐसे नेताओ पर. सरकारी बंगला दवा के बैठने वाले नेताओ की लिस्ट भी सार्वजनिक की जाना चाहिए.

mukesh said...

नारद जी ! नारायण नारायण !!
बहुत सही बात पकड़ी आपने , आज ही एक खबर पढ़ी मैंने की पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को भी नई दिल्ली में नया बंगला अआबंतित किया जा रहा है . जबकि उन्हें बंगला देने का कोई वैधानिक आधार नही है. ये वही सोम दा है, जो कभी सांसदों के गलत आचरणों पर खूब फटकार लगाते थे.वह ये तो ढंग है !! बाकि अब आपके आदेशानुसार मेरे ब्लॉग की पोस्ट पर , शुक्रिया नारद जी

वाणी गीत said...

तथास्तु !!

Murari Pareek said...

अजी में तो कहता हूँ एक सरकारी गोदाम बना के सबको उसमे डाल दीजिये | इनसे इनकी सरकारी आवास की भी इच्छा पूरी होगी और जनता के लिए | नेता माल गोदाम हो जायेगा जब जिसकी जरुरत जनता को महसूस होगी निकाल लियें जायेंगे |

Prem said...

हमारे आपके श्राप देने से कुछ न होगा .सिस्टम ही बदलने की शुरुयात करनी होगी यह भी शुरुयात बुरी नहीं ।