Saturday, 28 February, 2009

किसी ने कहा अपशगुन किसी ने वरदान

ये क्या है?भ्रम,चमत्कार, या अन्धविश्वास। इस पोस्ट में हमने एक विडियो दिखाया था। शनि देव की जोत की लौ में कुछ अलग किस्म का नजारा दिखाई दे रहा था। कई बुद्धिजीवियों ने अपनी टिप्पणी इस पर दी। मगर जिन के घर ऐसा हुआ उनको तस्सली नही हुई। उन्होंने जगती जोत का विडियो कई अन्य जनों को दिखाया। एक आचार्य ने बताया कि यह तो शनि देव का प्रकोप है। हो सकता है आपने उसकी पूजा अर्चना में कोई कसर छोड़ दी हो। उसने इस प्रक्पो से निपटने के उपाय भी बताये। एक ज्योतिषी ने ने आचार्य की हाँ में हाँ मिली। उसने बताया कि वैसे जो शनिदेव न्याय के देवता है। हो सकता है आपके परिवार ने उनके सम्मान में कोई गुस्ताखी की हो। इस लिए थोड़ा बहुत तो संकट आ ही सकता है। उसने भी संकट से उबरने के उपाए बता दिए। एक ज्योतिषी आचार्य ने बार बार विडियो को देखा। उस स्थान को देखा जहाँ जोत जलाई गई। जोत को नमन किया। ठंडी साँस लेकर कहने लगे--भाई आपके तो भाग खुल गए। शनि महाराज ने जोत पर अपने आशीर्वाद का हाथ रख दिया है। एक महाराज जी ने जोत पर जो दिखाई दे रहा है उसको शेष नाग के फन का प्रतीक बताया। हर शनिवार शनि मन्दिर में जाने वालों को बताया गया तो वे विडियो की प्रति लेने को आतुर हो गए। कहने लगे--हमारे यहाँ तो कभी ऐसा दृश्य दिखाई नही दिया।परिवार को बहुत ही भाग्यशाली बताते हुए उहोने इस बात का धन्यवाद दिया जो उनको यह जोत देखने को मिली। इस प्रकार के किसी आदमी ने इस बात को भ्रम या सामान्य बात बात मानी। सब ने इसको शनि के आशीष और शनि के प्रकोप से जोड़ा।

4 comments:

अंशुमाली रस्तोगी said...

इन अंधविश्वासों से बाहर निकलें।

ab inconvenienti said...

जो भ्रम में ही जीना चाहे तो कोई क्या करे, हमें वही सुनाई पड़ता है या हम वही सुनते हैं जो हम सुनना चाहते हैं. जैसे आपको इतनी आवाजों के बीच केवल एक ज्योतिषी की ही 'भाग्य खुल गए' वाली बात सुनाई दी. धन्य हैं आप!

मुसाफिर जाट said...

नारद जी, अब इस जोत को मैंने भी देखा वीडियो में. मुझे तो कुछ ख़ास दिखा नहीं.

PREETI BARTHWAL said...

लोगों को कभी गणेश जी दूध पीते दिखते हैं तो कभी शिवलिंग में कोई आकृति उभरती नजर आती है। ये सब क्या है? अब जोत में शनिदेव दिख रहें है। क्या इतना पूण्य का काम किया हुआ है कि भगवान दर्शन देने धरती पर आ रहें है। ये सब मन का भ्रम ही है कुछ लोग है जो इसे आग की तरह फैला रहे है इससे देश का क्या खुद भी कल्याण नहीं होगा। कहां जा रहे है हम लोग इस भ्रम में पङ कर।