Tuesday 13 January 2009

अपनी अपनी ढफली

---- चुटकी-----

पाक में सबकी
अपनी अपनी ढफली
अपना अपना राग,
कोई सुना रहा बन्नी
कोई गा रहा फाग।

6 comments:

महेंद्र मिश्रा said...

सच है अपनी ढपली अपना राग अलाप रहे है बहुत बढ़िया रचना है आभार

seema gupta said...

अपनी अपनी ढफली
अपना अपना राग,
कोई सुना रहा बन्नी
कोई गा रहा फाग।
" hm to bus narayan narayan kr rhe jnaab "

"regards"

विनय said...

आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

Amit said...

bahut sahi kaha hai aapne...

विवेक सिंह said...

कोई डाले पानी !

कोई लगाए आग !

राज भाटिय़ा said...

लेकिन मुनि साहब हमे तो अपना सोचना चाहिये, हमारे यहा भी हालात बेहतर नही है, हमरे यहां तो हर कुर्सी पर चोर लुटेरे बेठे है.
धन्यवाद