Sunday 2 October 2011

अचरज,प्रसन्नता,खिन्नता,चिंता,उम्मीद और असमंजस है दवा योजना

श्रीगंगानगर-अचरज,प्रसन्नता,खिन्नता,असमंजस, थोड़ी चिंता और उम्मीद। बस यही है राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना। वह गरीब जिसको मुफ्त दवा मिली उसको अचरज और प्रसन्नता दोनों का अनुभव हुआ। डाक्टरों के लिमिट तय हो गई।उनको वही दवा लिखनी थी जो उनकी लिस्ट में है।जो नर्सिंग स्टाफ कभी काम नहीं करता था उनको काम करना पड़ा। इसलिए उनको खिन्नता हुई। वे लोग भी ऐसे ही दिखे जिनको पूरी दवा मुफ्त नहीं मिली। सरकारी अस्पतालों के आस पास जो दवाइयों की दुकाने हैं उनके मालिकों के चेहरों पर कुछ उदासी,चिंता थी।आज उनका काम 50 से 75 प्रतिशत कम रहा।मगर इसके बावजूद उनको उम्मीद थी कि उनके कारोबार पर इस योजना का अधिक असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि सरकार पूरी दवा उपलब्ध नहीं करवा सकती। जो दवा सरकारी दुकान पर नहीं होगी वह मरीज को बाहर से लानी ही होगी। इसके अलावा ऐसे लोगों की संख्या भी बहुत होगी लाइन में लगने की बजाए प्राइवेट दुकान से दवा खरीद कर जल्दी घर या अपने काम पर जाना चाहेंगे। एक वर्ग ऐसा भी है जो असमंजस में है कि उनका क्या होगा? इस वर्ग में पेंशनर्स अधिक हैं। सबसे अधिक राशि भी सरकार इन्ही की दवाओं पर खर्च करती थी। इसका दुरुपयोग भी भी बहुत अधिक होता था। कोई भी योजना पहले ही दिन सौ प्रतिशत सफल हो जाए,संभव नहीं। ऐसा ही यहां भी था। सरकारी दुकान पर जो दवा थी वह दे दी गई। जो नहीं थी पर्ची पर उसके नाम के आगे उपलब्ध नहीं की मोहर लगा दी गई। ताकि मरीज दवा कहीं और से ले खरीद सके। इसी योजना को शुरू करने के लिए राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त संसदीय सचिव श्री कुमावत यहां आए। सरकारी अस्पताल प्रांगण में समारोह हुआ। जिसमें आम जन की अनुपस्थिति साफ दिखाई दे रही थी। वहां श्री कुमावत के रूप में सरकार थी। सरकारी पार्टी के नेता थे।विपक्ष के रूप में बीजेपी विधायक राधेश्याम गंगानगर। सरकार के प्रतिनिधि के रूप में प्रभारी सचिव थे। जिला कलेक्टर थे। डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ तो होना ही था।


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