Sunday 31 October 2010

परम्पराओं से भरा जीवन

हम सबका जीवन परम्पराओं के मामले में बहुत अमीर है। परम्परा कोई भी कहीं भी हो सबकी अपनी अलग कहानी,दास्ताँ है। कोई चाहे इसकी खिल्ली उड़ाए तो उड़ाए ,परम्परा का निर्वहन जारी रहता है। ऐसी ही एक परम्परा है, लंकेश रावण के कुल का बारहवां । श्रीगंगानगर में दशहरे का आयोजन श्रीसनातन धर्म महावीर दल करता है। रावण,मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतलों के दहन के बाद किसी दिन लंकेश के कुल का बारहवां यही संस्था करती है। इस दिन विधि विधान से ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है। नगर के गणमान्य नागरिक, दशहरा आयोजन से जुड़े सभी व्यक्ति इसमें शामिल होते हैं। कुछ व्यक्तियों की राय में यह महान पंडित रावण के पुतले जलाने के कथित पाप से मुक्ति हेतु किया जाता है। कई सज्जनों का मत है कि यह प्रायश्चित है ,उनके द्वारा जो रावण,कुम्भकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाते हैं। वजह जो भी हो परन्तु यह आयोजन गत छ:दशक से हो रहा है। संस्था के पदाधिकारी चाहे कोई रहा ,यह आयोजन अवश्य हुआ और होता रहेगा।

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