Monday 10 June 2013

देश में मिसाल बनेंगे यहां के पुलिस अधिकारी




श्रीगंगानगर-वो दिन दूर नहीं जब दुनिया भर की पुलिस श्रीगंगानगर पुलिस की कार्य प्रणाली को देखने और समझने के लिए यहां आएगी। वो सुनहरी दिन भी आने ही वाला है जब हमारे श्रीगंगानगर के पुलिस अधिकारी दूसरे देशों में व्याख्यान दे काम करने का ढंग उनको समझाएंगे। कैसा होगा वो दिन। कैसे होंगे वो क्षण...यह सोच कर ही मेरे मन को  रोमांच का अनुभव होने लगता है। पतला दुबला सीना चौड़ा हो जाता है कि हम उस नगर के रहने वाले हैं जिसके पुलिस अधिकारी इतने काबिल है। खुशी है इस बात की कि हम आने वाली पीढ़ी को ऐसी पुलिस सौंप के जा रहें हैं जिसके किस्से,कहानी स्कूल,कॉलेज की किताबों में पढ़ाए जाएंगे। धन्य हो जाएगी हमारी संताने पुलिस अधिकारियों के बारे में पढ़ कर। उनकी काम करने की शैली को जानकार,समझ कर। कानून व्यवस्था की अब नो टेंशन। नई सोच के साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने के इंतजाम जिस प्रकर यहां के पुलिस अधिकारी करते हैं वैसा तो दूसरे क्षेत्र में तैनात अधिकारी सोच भी नहीं सकता। हम पहले अपराधी की कार्यप्रणाली को देखते हैं। उसके अपराध करने के तरीके समझते हैं। वारदात को निकट से देखने के लिए उसके होने का इंतजार करते हैं। उसके बाद करते हैं शानदार इंतजाम। सिहाग हॉस्पिटल के पास लगातार कई कार चोरी हुई। पुलिस अधिकारियों ने उस चौक पर परमानेंट पुलिस वाले बैठा दिये टेंट लगाकर। उधर बीकानेर में ज्वेलरी की दुकान लूटी गई। इधर श्रीगंगानगर  हमने उस जगह हथियार बंद जवान लगा दिये जिधर ज्वेलरी की दुकानें हैं। ....फालतू बात नहीं....इससे अधिक चौकसी क्या होगी,वारदात बीकानेर में हुई,सुरक्षा यहां दी गई। सभी को मिलेगी सुरक्षा। सभी के आस पास होंगे पुलिस के हथियार बंद सिपाही। पहले दो चार वारदात तो होने दो। चिंता क्यों करते हो ऐसा  ही दूसरे कारोबारियों के लिए होगा। जिनके यहां चोरी उनको सुरक्षा......जिस क्षेत्र में लूट उधर पुलिस का स्थायी बंदोबस्त। चौकसी पहले नहीं होती.....क्या पता कौन कैसा कहां अपराध करे! अपराध को देख कर,समझ कर ही तो इंतजाम होंगे। इसी तरीके को पूरी दुनिया में लागू किया जाना चाहिए। दुनिया नहीं तो प्रदेश में तो हो ही जाए। इसके लिए यहां के अधिकारियों को दूसरे जिलों में भेजना पड़े तो भेजा जाए। हमारा क्या है, हम तो दिल पर पत्थर रख लेंगे ऐसे अधिकारियों की जुदाई में। लेकिन इनकी काबिलियत पर तो पूरे देश का हक है। तभी देश-दुनिया को पता लगेगा कि थे कोई पुलिस अधिकारी जिनहोने अपनी सोच,नए डिजायन की कार्य प्रणाली,तकनीक से कानून व्यवस्था को संभाला। नई ऊर्जा का संचार किया पुलिस और आम जनता में। तभी तो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक [प्रशिक्षण] रवीन्द्र सिंह ढिल्लों ने पत्रकारों को कहा कि मैं श्रीगंगानगर पुलिस का टेस्ट लेने नहीं आया। सही है....किसकी हिम्मत है ऐसी अधिकारियों का टेस्ट लेने की जो मिसाल कायम कर रहे हैं।

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