Wednesday, 11 May, 2011

गौरवान्वित हुआ रेगिस्तान


श्रीगंगानगरगर्मियों मे रेगिस्तान का नाम आते ही लू का अहसास होने लगता है। आंधी के सीन आँखों के सामने आ जाते हैं। पसीना उस पर रेगिस्तानी रेत का जम जाना। कौन इन दिनों मे वहाँ जाना चाहेगा। सब उससे इस मौसम मे दूर से दूर रहने की कोशिश करते हैं। सन्नाटे मे डूबा रहता है रेगिस्तान। दो दिन से रेगिस्तान मे सन्नाटा नहीं उल्लास है। विजयी भव का जयघोष है। भारतीय सेना का गौरव है। बमों,मिजायलों के धमाके हैं। टैंको की घर्र घर्र है। हेलिकॉप्टरों का शोर है। हर पल हर क्षण रोमांच है। ऐसा रोमांच जो जीवन भर आपको सेना के साथ खड़े रखता है। हजारों सैनिकों का जोश है और साथ मे है देश का विश्वास। इन सब के साथ होने से रेगिस्तान का कण कण आह्लादित है। वहाँ अब दिन रात एक हो चुके हैं। ये सब कोई दिन तक रहेगा।

सेना के युद्धाभ्यास से राजस्थान का रेगिस्तान गौरवान्वित हो गया। अपने देश की सेना का युद्ध कौशल देख रेगिस्तानी मिट्टी का कण कण उत्साहित है। वह अपने सैनिकों का माथा चूम रहा है। माथे पर तिलक लगा रहा है। हजारों सैनिक इस रेगिस्तानी मिट्टी तो अपने पैरो से रोंद रहे है। मगर मिट्टी है कि इसको अपना अहोभाग जान हर सैनिक के चरण स्पर्श कर रही है। क्योंकि जो मिट्टी आज वहाँ है उसको फिर मौका नहीं मिलेगा अपने इन जांबाजों के चरण छूने का। उसे तो उड़ जाना है। आँधी बनकर। इसलिए रेगिस्तान की मिट्टी घर आई गंगा मे अधिक से अधिक डुबकी लगाने मे लगी है। रेगिस्तान की जुबान होती तो वो यही कहता कि ये सौभाग्य बार बार मिले। मीडिया इस अभ्यास से रेगिस्तान के थर्राने की बात करता है। रेगिस्तान अभ्यास से क्यों थर्राएगा। कोई थर्राए तो तब ना जब कोई दुश्मन रेगिस्तान मे आ गया हो। यहाँ तो अपनी सेना अपना क्षमता दिखा रही है। बता रही है, चिंता मत करो, किसी से मत डरो। सेना देश की सुरक्षा बहुत अच्छी तरह से कर सकती है। तो फिर यह थर्राने की नहीं गौरवान्वित होने की बात है। याद करो 18 मई 1974 को रेगिस्तान मे पहला परमाणु परीक्षण किया गया था। 11 से 13 मई 1998 को फिर से परमाणु परीक्षण किए गए। आओ रेगिस्तान की मिट्टी के साथ हमभी गर्व करे अपनी सेना पर। उनको बधाई दें,उनके रण कौशल के लिए। जयहिंद।

ओशो ने कहा हैसंबंध बढ़ाते हो जब जब,जानना एक दिन टूटेगा। जो मान दे रहा आज तुझे,वह यार एक दिन रूठेगा। उस दिन मत तनिक गिला करना,कहकर शुक्रिया विदा करना। भवितव्यम शरणम गच्छामी, भज ओशो शरणम गच्छामी। अब एसएमएस राजेश अरोड़ा कासंता को सपने मे एक लड़की ने कई जूते मर दिए। संता कई दिन अपने बैंक नहीं गया। क्योंकि बैंक मे लिखा हुआ था कि हम आपके सपने को हकीकत मे बदलते हैं।

3 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर गोरव बढाया हमारे नोजवानो ने इस रेगिस्तान का , जय हिन्द

गीता पंडित said...

गौरवान्वित हुए हम...

रेगिस्तान की मिट्टी और अपनी सेना दोनों पर गर्व ...

बधाई..
जयहिंद

गीता पंडित said...

गौरवान्वित हुए हम...

रेगिस्तान की मिट्टी और अपनी सेना दोनों पर गर्व ..


बधाई उनके रण कौशल के लिए |
जयहिंद|