Thursday 18 November 2010

अर्जुन की आँख में गंगानगर


श्रीगंगानगर के राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। तीन साल तक कोई चुनाव होने नहीं इसलिए सब लगभग चुप्प है। वे भी जो सत्ता में हैं और वो भी जो नहीं है। ऐसे में एक सांसद जो पड़ौस का है, इस क्षेत्र में अधिक दिखाई देने लगा है। उसका नाम है अर्जुन मेघवाल। कोई अंजाना नाम नहीं है। सब जानते हैं कि श्री मेघवाल बीकानेर के सांसद हैं। यहाँ के सांसद भरत राम मेघवाल चाहे ना दिखे हों लेकिन अर्जुन मेघवाल का आना लगातार बना हुआ है। सांसद बनने की उनकी चाहत काफी पुरानी है। यह चाहत बीकानेर से पूरी तो हो गई। इसके साथ एक वहम भी आ गया । वहम ये कि वहां पिछले लम्बे समय से कोई सांसद रिपीट नहीं हुआ। बस यही वहम उनको श्रीगंगानगर में बार बार ले आता है। अर्जुन मेघवाल का श्रीगंगानगर से पुराना नाता है। उन्होंने यहाँ से बीजेपी की टिकट लेने की कोशिश भी की है। उनके बन्दे उनको लेकर इलाके में घूमे भी है। जो पहले संभव ना हो सका वह अब करने की योजना है। इस बार उनका मानस श्रीगंगानगर चुनाव लड़ने का है। हालाँकि अभी चुनाव में बहुत समय बाकी है। उन्होंने ऐसा कोई संकेत भी नहीं दिया है। खुद इतनी जल्दी कोई संकेत देंगे इसकी उम्मीद नहीं है। हाँ अपने लोगों से इस बारे में इलाके में चर्चा तो करवाई ही जा सकती है। यही हो रहा है। सवाल ये कि निहाल चन्द क्या करेंगे? जवाब ये ,विधानसभा का चुनाव लड़कर कर मंत्री पद प्राप्त करेंगे!

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कई दिन पहले एसपी रुपिंदर सिंह अख़बार में सेना की वर्दी में छपे दिखे। ऐसा लगा कोई और होगा। बात आई गई हो गई। बाद में एक दिन ऑफिस में उनको सैनिक अधिकारी की वर्दी में देखा तो अचरज हुआ। इतने सालों में कितने ही एसपी आये गए। बड़े बड़े आन्दोलन के समय बहुत बड़े बड़े पुलिस अधिकारी आये। किसी को भी सेना की वर्दी में नहीं देखा। पहली बार परम्परा से हट के कुछ दिखे तो अचम्भा तो होना ही था। मुझे ही क्यों,उस दिन जो कोई उनसे मिला उसे भी यही हुआ। लेकिन अब अचम्भा करने वाली बात नहीं है। क्योंकि असल में यह भी एसपी की वर्दी का ही एक हिस्सा है। इसको कमबैक ड्रेस कहते हैं। इस ड्रेस को खास मौकों पर ही पहना जाता है। एसपी श्री सिंह ने बताया कि इस को हथियार चलने की ट्रेनिंग,रूट मार्च और फिल्ड में काम करते समय पहना जाता है। श्री सिंह को यह ड्रेस कुछ समय पहले तब मिली जब वे कोई कोर्स करने गए थे।

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चलो कुछ क्षण जवाहर नगर थाना का ख्याल कर लेते हैं। थाना क्षेत्र का तो पता नहीं थाने में सब ठीक नहीं है। वहां की दीवारें आजकल एक चर्चा सुनाने/सुनने में व्यस्त हैं। वह यह कि थाने का सिपाही भी अपने थाना अधिकारी की बात पर कान नहीं धरता। एक कान से सुनता है दूसरे से निकल देता है। बात जब निकलती है तो दूर दूर तक जाती ही है।

नज़र अमरोही कहते हैं--डूब कर दिल के भी अन्दर देखो, कितना गहरा है समन्दर देखो। हनुमानगढ़ से विकास का भेजा सन्देश--बुरा मत मानो अगर कोई तुमको अपनी जरुरत के समय ही याद करता है। इसे अहोभाग्य समझो, क्योंकि दीपक, मोमबत्ती अँधेरा होने पर ही याद आती है।

----गोविंद गोयल

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