Sunday, 20 December, 2009

निजी क्षेत्र से करप्सन

हिन्दूस्तान में निजीकरण के कारण करप्सन को बढ़ावा मिला है। इस बात में कितना दम है यह हमें आपके विचारों से पता चलेगा।

इस सब्जेक्ट पर यहाँ एक बड़ी वाद-विवाद प्रतियोगिता है।

आपके विचार हमारा मार्ग दर्शन करेंगे।

3 comments:

अंकुर गुप्ता said...

निजीकरण के अपने फ़ायदे हैं लेकिन हमने इसके फ़ायदों की बजाय नुकसान को अधिक लिया है.

रही बात भ्रष्टाचार की तो मैं यही कहूंगा कि निजीकरण से भ्रष्टाचार का रूप कुछ बदला है. मसलन अगर किसी निजी कंपनी को कोई सरकारी आर्डर लेना है तो उसके लिए उसे अफ़सरों नेताओं को घूंस खिलाना पड़ता है. पहले नेता/अफ़सर खुद ही माल चट कर जाते थे अब निजी कंपनी से कमीशन खाते हैं.

राज भाटिय़ा said...

निजी करण किन लोगो के हाथो मै है.....उन्ही कमीनो के हाथो मै जिन्होने पहले देश कओ लुटा अब निजी करण के बहाने कबजा कर लिया

परमजीत बाली said...

निजिकरण के नाम पर सरकारी नेताओ के रिश्तेदार ही फायदा उठा रहे हैं।निजि संस्थान अपनी मन मानी करते रहते हैं ...उन पर कोई अंकुश सरकार नही लगाती और लुटती है जनता।निजि करण से अब तक जो देखने में आया है कोई फायदा नही हुआ.....आम जनता को।