Thursday 31 December 2009

मीडिया में नकारात्मक सोच को बढ़ावा

भड़ास फॉर मीडिया ने पत्रकार जरनैल सिंह को मीडिया हीरो चुना है। हीरो चुना गया उसको बधाई,जिसने चुना उसका आभार। कोई किसी की नज़रों में कुछ भी हो सकता है।किसी को क्या एतराज! सो हमें भी नहीं है। हो भी तो जरनैल सिंह या यशवंत जी का क्या! यहाँ सवाल एतराज का नहीं, दूसरा है। वह यह कि मीडिया में लगातार नकारात्मक को बढ़ावा मिल रहा है। कुछ भी बुरा करो, मीडिया उसे हाथों हाथ ले लेता है। लपक लेता है। मुद्दा बना देता है। बुरा करने वाला अख़बारों के पन्नों पर छाया रहता है। न्यूज़ चैनल पर दिखाई देता है। वह कितने दिन मीडिया में रहता है, यह उस बन्दे की समाज में पोजीशन तय करती है। बड़ा तो कई दिन सुर्ख़ियों में रहेगा,वरना दो चार दिन में निपटा दिया जायेगा। कोई इन्सान अच्छा काम करता है। उपलब्धि प्राप्त करता है। तब उसको अपनी तस्वीर अख़बार में छपवाने के लिए अख़बारों के दफ्तरों के चक्कर निकालने पड़ते हैं। चैनल के लिए तो ये कोई खबर ही नहीं होती। हाँ, कुछ बुरा कर दिया,सनसनी फैला दी,तो आपको किसी पत्रकार के आगे गिड़गिड़ाने की जरुरत नहीं है। सब भाई लोग विद कैमरे अपने आप आपको खोजते हुए आपके पास चले आयेंगें। आप कहोगे,प्लीज़ फोटो नहीं। किन्तु फोटो उतरेंगी,अख़बार में छपेंगी। आपका धेला भी खर्च नहीं होगा। इसमें किसी का कोई कसूर नहीं, जमाना ही ऐसा आ गया।
दुनिया भर में सकारात्मक सोच के पाठ पढाये जाते हैं। सेमीनार होते है। पता ही नहीं कितने ही आदमी इस सब्जेक्ट पर लिखकर नाम,दाम कमा चुके। यह सिलसिला समाप्त नहीं हुआ है। इसके बावजूद सब तरफ नकारात्मक सोच का बोलबाला है। कोई भी अख़बार चाहे वह कितने ही पन्नों का हो,उठाकर देखो,पहले से अंतिम पेज तक,आपको नकारात्मक समाचारों का जमघट मिलेगा। पोजिटिव समाचार होगा किसी कोने में। वह भी दो चार लाइन का। इसलिए नए साल में सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि आज से क्या अभी से केवल और केवल नेगेटिव काम ही करेंगे। जिस से हमारा भी नाम सुर्ख़ियों में रहे। हम भी यह बात साबित कर सकें कि बदनाम होंगे तो क्या नाम नहीं होगा। होगा,जरुर होगा। सभी को नया साल मुबारक। हैपी न्यू इयर में सभी को हैपी हैपी न्यूज़ मिलती रहे।

4 comments:

राज भाटिय़ा said...

आप को ओर आप के परिवार को नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाए

मनोज कुमार said...

आपको नव वर्ष 2010 की हार्दिक शुभकामनाएं।

नीरज तिवारी said...

dekhiye, aapki baat ka main puri tarah se samrthan karta hoon. jahan tak baat yashwant ji ke faisle ki hai to we wahi kar rhe hain, jo Al Jaidi dwara bush ko juta maarne ke baad world media ne kiya hai. yahan main is vishay mein kuchh nhin kahunga ki Jarnail ji ne 84 ki aag ki jalan kaise utaari. magar jo hua wah galt tarika tha. rhi baat media mein nakaratmkta ke upaj ki to aapse main sirf itna kahunga ki ek ko udaharan maankar sabko galat karar dena thik nhin......
Ant mein shabdon ke chot achhe the......

नीरज तिवारी said...

dekhiye, aapki baat ka main puri tarah se samrthan karta hoon. jahan tak baat yashwant ji ke faisle ki hai to we wahi kar rhe hain, jo Al Jaidi dwara bush ko juta maarne ke baad world media ne kiya hai. yahan main is vishay mein kuchh nhin kahunga ki Jarnail ji ne 84 ki aag ki jalan kaise utaari. magar jo hua wah galt tarika tha. rhi baat media mein nakaratmkta ke upaj ki to aapse main sirf itna kahunga ki ek ko udaharan maankar sabko galat karar dena thik nhin......
Ant mein shabdon ke chot achhe the......