Tuesday 1 December 2009

मजबूर जी कहते हैं

तू है तो तेरा फ़िक्र क्या
तू नहीं तो तेरा ज़िक्र क्या।
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सीधे आए थे मेरी जां,औन्धे जाना
कुछ घड़ी दीदार और कर लूँ।
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ये कहना है श्री रवीन्द्र कृष्ण मजबूर का।

4 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

बहुत खूब !

Udan Tashtari said...

बहुत सही!

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी said...

samjhane kee koshish
kar raha hun ...

RAJNISH PARIHAR said...

बहुत खूब,क्या बात कही है....