Sunday 15 November 2009

राजनीति ने तोड़े रिश्ते

राजनीति पर लोग अपने रिश्तों की बलि चढा देते हैं। ऐसा हमारे श्रीगंगानगर में देखने को मिल रहा है। यहाँ नगर परिषद् चुनाव में एक वार्ड में बहु और चाची सास के बीच मुकाबला है। सास को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया है तो बीजेपी ने बहु को। दोनों परिवार कई दशकों से एक साथ एक बिल्डिंग में रह रहें हैं। दोनों के घर के बीच एक दीवार है। इस चुनाव के कारण यह दीवार अब भौतिक रूप से बेशक ऊँची ना हो लेकिन सम्बन्धों में आई दरार के रूप में बहुत ऊँची हो जायेगी। अब रिश्तेदारों के सामने असमंजस की स्थिति है कि वे क्या करें। यह बात समझ से परे है कि क्या राजनीति आपसी रिश्तों से भी अधिक महतवपूर्ण हो गई? बहु का ससुर इलाके का माना हुआ वकील है। लेकिन जब बेटा बाप से बड़ा हो जाए तो फ़िर कोई वकील बाप भी क्या कर सकता है। हाँ वह इतना तो जरुर कर सकता था कि घर में चुपचाप बैठ जाता और दोनों को अपने हाल पर छोड़ देता। आख़िर वह उस खानदान में सबसे बड़े हैं। जब बड़े हैं तो बडापन दिखाना ही चाहिए,वरना बड़ा तो दही में पड़ा रहता है।
जो बहु बीजेपी की उम्मीदवार है वह पहले कांग्रेस की टिकट मांग रही थी। कांग्रेस ने नहीं दी तो बीजेपी के दरबार में चले गए।

3 comments:

Nirmla Kapila said...

ांजी यूँ भी कौन सा सास बहु की बनती है बल्कि नेता लोग कम से कम घोटालों मे तो एक दूसरे के होते हैं चाहे किसी पार्टी के हों तो ऐसे मे सास बहु को आपस मे सुलह करनी ही पडेगी। पाँच साल मे केवल कुछ दिन चुनाव के दोनों मे ही लडना होगा। बाद मे देखना सास बहु का प्यार । शुभकामनायें

MANOJ KUMAR said...

यो सियासती रिश्ते है। इनका क्या पड़ताल करना,,नारायण । नारायण।।

राज भाटिय़ा said...

अजी यह्सब दिखावा ही है पार्टी कोई सी भी हो माल आना आना चाहिये..... यानि सब चोर है, ओर चोर चोर मॊसेरे भाई