Wednesday 9 December 2015

दो अधिकारियों की नाक का सवाल बने हैं थड़े


श्रीगंगानगर। विरोध हाईकोर्ट के आदेशों का नहीं, दो अधिकारियों की मनमर्जी का है। एक हैं श्रीमान जिला कलक्टर और दूसरे हैं उनके लाडले यूआईटी के सचिव, जिनके पास कलक्टर की मेहरबानी से नगर परिषद आयुक्त का चार्ज भी है। कलक्टर ऑफिस मेँ 7 अक्टूबर को हुई बैठक की कार्यवाही विवरण मेँ के अनुसार पैटीशनर ने कहा है कि नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे के कब्जे पहले हटाएँ जाएँ। लेकिन ये दोनों अधिकारी ब्लॉक एरिया मेँ लगे हैं। ये किसी के समझ नहीं आ रहा कि कब्जे क्या केवल  ब्लॉक एरिया मेँ ही हैं। इतना ही नहीं प्रशासन ने जो कब्जे चिन्हित कर लाल निशान लगाए हैं उनमें कोई भी चबूतरा शामिल नहीं है। लेकिन दोनों अधिकारियों के मनमर्जी के आगे सब बेबस हो चुके हैं। जन प्रतिनिधियों की खामोशी और जनता के डर ने ऐसा काम किया है कि आज ब्लॉक एरिया के लोग चिंतित हैं। कब्जे करने वाले तो हटा रहे हैं, लेकिन जिनके थड़ों पर कोई कब्जा नहीं वे भी परेशान हैं। जो थड़े शहर की बसावट के समय से हैं। प्रशासन ने खुद नाली बना हद तय कर रखी है, वे अचानक से कब्जे हो गए। मजे की बात ये कि प्रशासन के पास किसी सड़क का कोई नक्शा नहीं दिखता। सड़कें की चौड़ाई दशकों जैसी ही है, लेकिन इन दोनों अधिकारियों ने थड़ों को अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा बना रखा है। इस क्षेत्र के एमपी, जो अब केंद्र मेँ मंत्री हैं, कुछ नहीं बोल रहे। विधायक को कुछ पता ही नहीं। ऐसे ही सभापति आ गए। ऐसे मेँ दोनों अधिकारियों को अपनी मर्जी करने का पूरा मौका मिला हुआ है।

चिन्हित अतिक्रमणों मेँ थड़े नहीं, कलक्टर को दिया पत्र

श्रीगंगानगर। हाईकोर्ट के आदेश की पालना मेँ कब्जे हटाने वाले आठ व्यक्तियों ने जिला कलक्टर को पत्र देकर चबूतरे, उनके नीचे बने सैप्टिक टैंक न तोड़ने को कहा है। सुरेन्द्र सिंगला, घनश्याम दास, महेंद्र कुमार सिंगल, चंद्रमोहन, जगीर चंद, कश्मीरी लाल नागपाल और हरीश कुमार की ओर से दिये पत्र मेँ कलक्टर को बताया गया है कि है कोर्ट के आदेश की पालना मेँ चिन्हित अतिक्रमण हटा दिये गए हैं। ज्ञात हुआ है कि प्रशासन उनके मकानों के आगे बने चबूतरों के साथ साथ सैप्टिक टैंक, वाटर टैंक भी तोड़ने जा रहा है। जबकि हाईकोर्ट के आदेश मेँ ये कहा गया है कि जो अतिक्रमण चिन्हित हैं, उन्हीं को तोड़ा जाए। चिन्हित किए गए अतिक्रमण केवल चारदीवारी और चबूतरों पर बने शैड हैं। पत्र के अनुसार चबूतरों को अतिक्रमण के रूप मेँ चिन्हित ही नहीं किया गया है। जबकि हाईकोर्ट ने केवल चिन्हित अतिक्रमण तोड़ने के आदेश दिये हैं। पत्र मेँ कहा गया है कि इस बारे मेँ उचित आदेश पारित कर उनको सूचित करें, अन्यथा उनको अदालत की शरण मेँ जाना पड़ेगा। ज्ञात रहे कि 1 दिसंबर को हाईकोर्ट ने इस सभी को रिट  याचिका मेँ पक्षकार संयोजित करते हुए मौखिक आदेश पारित किया था कि प्रार्थीगण चिन्हित अतिक्रमणों को हटा कर फिर से कोर्ट मेँ उपस्थित होकर चबूतरे पर बने हुए सैप्टिक टैंक, पानी के टैंक आदि के संबंध मेँ अपनी प्रार्थना करें। उसी के संदर्भ मेँ ये अतिक्रमण हटा कर कलक्टर को पत्र दिया गया है। पता चला है कि प्रशासन ने कब्जों की जो सूची हाईकोर्ट मेँ दी है उसमें थड़ों का जिक्र नहीं है।  

टीटी ने कहा, मुझे तो किसी ने बताया ही नहीं


श्रीगंगानगर। प्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने पर आज मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी ने सूचना केंद्र मेँ प्रेस वार्ता की। श्री टीटी प्रैस वार्ता को जनसभा समझ लगभग आधा घंटा से अधिक तक सरकार की कम और अपने मंत्रालय की उपलब्धियां अधिक बताईं। आखिर उनको भाषण से प्रैस वार्ता पर आने को कहा गया। टीटी जी थोड़ा और थोड़ा करते रहे, लेकिन मीडिया नहीं माना। उसके बाद शुरू हुई वार्ता। मामला कब्जों का था। कई पत्रकारों ने पूछा कि गौशाला रोड के कब्जे तोड़े एक माह हो गया, मगर हालत आज भी खराब हैं। हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र हुआ। टीटी जी यही कहते रहें, कब्जे तो टूटेंगे। कब्जे तो टूटेंगे। एक पत्रकार ने कहा, कब्जे तोड़ने के लिए कौन मना करता है। लेकिन कोई प्लानिंग तो हो। पहले कब्जे तोड़ के क्या हाल कर दिया। कलक्टर भी बोले, मुझे कब्जे तोड़ने वाला अधिकारी  समझा जा रहा है। लेकिन मैं चाहता हूँ कब्जा तोड़ाने का प्रेसेस धीरे चले। धीरे चलाएँगे। टीटी और कलक्टर एक स्वर मेँ बोले, प्लान बना के भेजा हुआ है। एक दिन मेँ कुछ नहीं होता। प्रेस वार्ता के बाद टीटी जी को पूरी स्थिति से अवगत करवाया गया। उनको बताया गया कि कोर्ट के आदेश मेँ थड़ों का जिक्र नहीं है। ना ही प्रशासन ने थड़ों को कब्जों के रूप मेँ चिन्हित किया है। तब टीटी जी कहने लगे मुझे तो आज तक किसी ने ये बात बताई नहीं। उन्होने भरोसा दिया कि वे इस मुद्दे पर सीएम से बात करेंगे। बाद मेँ उन्होने सर्किट हाउस मेँ भी इस मुद्दे पर चर्चा कर पार्टी वालों से राय ली। 

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